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तो वहीं नवंबर महीने का तीसरा गुरुवार पैंक्रियाटिक कैंसर दिवस के तौर पर जाना जाता है। इसका उद्देश्य पैंक्रियाटिक कैंसर के शुरुआती लक्षणों के साथ-साथ निवारण के उपायों को जन-जन पहुंचाना है, जिससे कि विश्व भर में कैंसर से पीड़ित रोगियों की संख्या को नियंत्रण में लाया जा सके। साल 2000 से जब पैंक्रियाटिक कैंसर अवेयरनेस मंथ की शुरुआत हुई तो उसी साल से वायलेट कलर के रिबन के साथ मेडिकल कैलेंडर पर पैंक्रियाटिक कैंसर को दर्शाया जाने लगा।

इस वर्ष की थीम 'हैलो पैनक्रियाज़' है - इस साल इस थीम को व्यक्तियों को शरीर के रोजमर्रा के कार्यों में पैनक्रिया द्वारा निभाई जाने वाली महत्वपूर्ण भूमिका के साथ अधिक संपर्क में रहने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
क्या है पैंक्रियाटिक कैंसर
पैंक्रियाटिक यानी अग्नाशय का कैंसर वह कैंसर है जो पेट के निचले हिस्से के पीछे स्थित अंग से शुरू होता है। यह तब होता है जब अग्नाशय की कोशिकाएं अपने डीएनए में परिवर्तन करने लगती हैं। इन कोशिकाओं में होने वाली वृद्धि ट्यूमर बनाने का काम करती हैं जो आगे चलकर कैंसर का रूप ले लेता है। यह एक ऐसा कैंसर है, जिसका पता चलने के बाद भी जीने की दर बहुत कम है। आइए जानते हैं कि इस कैंसर के प्रारंभिक लक्षण क्या होते हैं-
इन दो लक्षणों पर दें ध्यान
1. वजन कम होना -अगर पाचन एंजाइम काम करना बंद करने लगेगा तो सबसे पहले भूख लगना कम हो जाएगा और फिर वजन कम होने लग जाता है।
2. थकान होना - बेवजह ही थकान लगता रहता है। आराम करने के बाद भी थकान कम नहीं होता है।
3. पैर और तलवों में सूजन - अव्यवस्थित थक्के की वजह से ऐसा हो सकता है। ये शुरुआती लक्षणों में से एक है। फेफड़े की तरफ क्लॉट के जाने से परेशानी बढ़ सकती है।
4. पेट का बड़ा होना - इसके शुरुआती लक्षणों में पेट फुला हुआ और मुलायम लगता है।
5. मूत्र का रंग बदल जाता है - मूत्र का रंग मलिन हो जाता है। क्योंकि पेनक्रियाज लिवर सामान्य पित्त की नली को खोल देता है, जिससे पित्त स्त्रावित नहीं हो पाता और बिलीरुबिन मलिन मूत्र के रूप में बाहर आता है।
6. दर्द - पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द हो सकता है।
7. डिप्रेशन - पैंक्रियाटिक कैंसर के मरीज को डिप्रेशन की समस्या भी हो सकती है।
इन चीजों से बनाएं दूरी
- पैंक्रियाटिक कैंसर से बचे रहने के लिए ना तो स्मोकिंग करें और ना ही स्मोकिंग एरिया में रहें।
- नियमित तौर पर योग और एक्सरसाइज करें।
- हरी सब्जी और फलों का नियमित सेवन करें।
- रेड मीट खाने से परहेज करें।
- पैक्ड फूड प्रोडक्ट का सेवन करने से बचें।
- वजन को नियंत्रण में रखें।
इस तरह छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रखकर आप पैंक्रियाटिक कैंसर से खुद को बचा कर रख सकते हैं और अगर इसके शुरुआती कोई लक्षण दिखाई दे तो आप वक्त रहते इलाज करवा सकते हैं।
इस कैंसर में लक्षणों के निदान के बाद भी जीने की दर कम
Cancer.net के अनुसार, यदि कैंसर पहले स्टेज में ही निदान हो जाए तो 5 साल तक जिंदा रहने की दर 42% होती है। इस चरण में लगभग 13% लोगों का निदान किया जाता है। यदि कैंसर आसपास के ऊतकों या अंगों में फैल गया है, तो 5 साल की जीवित रहने की दर सिर्फ 14% ही रह जाती है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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