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Adhik Maas Ki Katha: करोड़ों गुना ज्यादा पुण्य प्राप्त करने का मौका है पुरुषोत्तम मास! जानिये इसकी रोचक कथा
Adhik Maas Ki Katha: जिसका कोई नहीं उसके श्री हरी हैं। भक्तवत्सल श्री हरी की जिसपर कृपा हो जाये वो यशश्वी और पूजनीय भी हो जाता है। अधिकमास की कथा से तो यही सन्देश मिलता है।
अधिकमास की कथा जानने से पहले आपको बता दें कि अधिक मास होता क्या है? हिन्दू धर्म में पंचांग के अनुसार 12 मास होते हैं। ये बारहों मास सूर्य की बारह संक्रान्ति के आधार पर बनाये गए हैं, लेकिन हर तीन वर्ष के बाद एक मास बढ़ जाता है जिसे अधिक मास कहते हैं। जिस माह में सूर्य संक्रान्ति नहीं होती वह अधिक मास कहलाता है।

पुरुषोत्तम मास की कथा
पंचांग के अनुसार प्रत्येक मास, तिथि, दिन और नक्षत्र का कोई ना कोई स्वामी होता है। जैसे मेष राशि के स्वामी बुध हैं। चतुर्दशी के स्वामी शिव हैं। ऐसे ही हर मास के भी स्वामी होते हैं। लेकिन अधिक मास जो हर तीन वर्ष पर आता है उसका कोई स्वामी नहीं था। इसकी वजह से इसे अशुभ माना जाने लगा और इस मास में मंगल कार्य करना वर्जित कर दिया गया।
अधिक मास को मलमास यानी की अशुभ मास भी कहा जाने लगा। इससे दुखी होकर अधिकमास श्री हरी के शरण में गया। श्री हरी से अपनी समस्या साझा करने के बाद सहायता के लिए याचना की। भक्तवत्सल श्री हरी तो दया के सागर हैं ही, उन्होंने अधिकमास को लेकर गोलोक की यात्रा की जहां श्री हरी के स्वरुप भगवान् श्री कृष्ण से उन्हें मिलवाया।

अधिकमास ने श्री कृष्ण से याचना की कि हे प्रभु, मेरा कोई स्वामी नहीं है और इसके कारण मैं अशुभ माना जाता हूं कृपया मेरी मदद कीजिये! श्री कृष्ण ने कहा की चिंता ना करो, आज से मैं तुम्हारा स्वामी हूं, मैं पुरुषोत्तम नाम से भी जाना जाता हूं और चूँकि मैं तुम्हारा स्वामी हूं इसलिए आज से तुम्हे पुरुषोत्तम मास के नाम से जाना जायेगा।
तब से मलमास को पुरुषोत्तम मास कहा जाने लगा और कृष्ण की कृपा होने की वजह से इस मास के दौरान पूजा पाठ और दान धर्म करने के कई गुना ज्यादा पुण्य मिलते हैं। इसलिए मांगलिक कार्य भले ही वर्जित हों लेकिन इस माह में धर्म कर्म दान पुण्य करने से दूसरे माह की अपेक्षा कई गुना अधिक फल प्राप्त होता है। इस मास में दीपदान करने से धन की वृद्धि होती है और श्रीमद्भागवत दान करने से अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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