Aja Ekadashi Vrat Katha: अजा एकादशी पर पढ़ें ये व्रत कथा, मिलेगा अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य

Aja Ekadashi Vrat Katha In Hindi: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। सालभर में आने वाली सभी एकादशियों का अपना अलग महत्व होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अजा एकादशी कहा जाता है। इस साल अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर को रखा जाएगा। अजा एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा और व्रत किया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से सारे पाप दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन पूजा के दौरान व्रत कथा का पाठ न करने से पूजा अधूरी मानी जाती। ऐसे में, आइए, जानते हैं अजा एकादशी की व्रत कथा -

Aja Ekadashi Vrat Katha

अजा एकादशी 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 6 सितंबर को शाम 7 बजकर 29 मिनट से शुरू होगी और 7 सितंबर को शाम 5 बजकर 3 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। उदयातिथि के नियम के अनुसार 7 सितंबर को ही अजा एकादशी का व्रत रखा जाएगा।

अजा एकादशी व्रत कथा (Aja Ekadashi Katha in Hindi)

पौराणिक कथा के अनुसार, अयोध्या में राजा हरिश्चन्द्र नाम के एक राजा थे। वे अपनी सच्चाई और ईमानदारी के लिए पूरे संसार में प्रसिद्ध थे। एक बार देवताओं ने उनकी परीक्षा लेने का विचार किया।

राजा हरिश्चन्द्र ने एक रात सपने में देखा कि उन्होंने अपना पूरा राज्य ऋषि विश्वामित्र को दान कर दिया है। अगले दिन ऋषि विश्वामित्र सच में उनके पास पहुंचे और उन्हें सपने में किए गए दान की याद दिलाई। राजा ने अपनी सत्यनिष्ठा निभाते हुए अपना पूरा राज्य विश्वामित्र को सौंप दिया।

इसके बाद दान की दक्षिणा चुकाने के लिए राजा को अपनी पत्नी और बेटे समेत खुद को भी बेचने की नौबत आ गई। एक चाण्डाल ने राजा को खरीद लिया और उन्हें श्मशान में काम करने के लिए रख लिया। राजा वहां शवों के दाह संस्कार के लिए कफन लेने का काम करने लगे। इतनी कठिन परिस्थिति में भी उन्होंने कभी सत्य का साथ नहीं छोड़ा।

कई साल इसी तरह बीत गए। अपने जीवन की परेशानियों से दुखी राजा हरिश्चन्द्र मुक्ति का उपाय सोच रहे थे। तभी महर्षि गौतम वहां पहुंचे। राजा ने उन्हें अपनी पूरी दुखभरी कहानी सुनाई। तब महर्षि गौतम ने उन्हें भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अजा एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि इस व्रत को करने से पापों का नाश होता है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

राजा हरिश्चन्द्र ने महर्षि गौतम के बताए अनुसार अजा एकादशी का व्रत रखा और रात में जागरण किया। व्रत के प्रभाव से उनके सभी कष्ट दूर हो गए और उन्हें अपना खोया हुआ राज्य फिर से प्राप्त हो गया। इसके बाद राजा अपने परिवार के साथ सुखपूर्वक जीवन बिताने लगे और अंत समय में स्वर्ग लोक को प्राप्त हुए।

मान्यता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और विधि-विधान से अजा एकादशी का व्रत करता है, उसके पाप नष्ट होते हैं और उसे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। कहा जाता है कि अजा एकादशी की कथा सुनने मात्र से अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल मिलता है।

Story first published: Monday, September 7, 2026, 8:00 [IST]
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