Latest Updates
-
कर्नाटक में 18-25 साल के 7 हजार से ज्यादा छात्र HIV पॉजिटिव, अब सभी कॉलेजों में टेस्टिंग होगी अनिवार्य -
Sawan 2026: सावन में शिवलिंग की पूजा के दौरान भूलकर भी न करें ये 7 गलतियां, नाराज हो सकते हैं भगवान शिव -
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर करिश्मा तन्ना के घर गूंजी किलकारी, इस शुभ दिन जन्मे बच्चों के लिए चुनें ये खास नाम -
30 जुलाई या 2 अगस्त, फ्रेंडशिप डे कब है? जानें International Friendship Day और Friendship Day में फर्क -
Happy Sawan 2026 Wishes: ...इन संदेशों के जरिए अपने प्रियजनों को दें सावन की शुभकामनाएं -
कांवड़ यात्रा की शुरुआत कैसे हुई? जानिए कौन था पहला कांवड़िया, जिसने सबसे पहले चढ़ाया था शिवलिंग पर जल -
कलौंजी के तेल से बनाएं बालों को लंबा और घना, जानें इसे घर पर बनाने का तरीका -
देव आनंद के बेटे सुनील आनंद का हार्ट अटैक से निधन, जिस अस्पताल में पिता ने ली थी अंतिम सांस वहीं तोड़ा दम -
Guru Purnima 2026 Speech: गुरु पूर्णिमा पर दें ये सरल और दमदार भाषण, तालियों से गूंज उठेगा पूरा हॉल -
Guru Purnima 2026 Wishes: गुरु से ही ज्ञान...गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरुजनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश
Amla Ekadashi Vrat Katha: आमलकी एकादशी की महिमा जानने के लिए जरूर पढ़ें ये व्रत कथा
Amalaki Ekadashi Vrat Katha: सनातन धर्म के हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रंगभरी या आमलकी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस वर्ष 2024 में 20 मार्च को आमलकी एकादशी व्रत है। संपूर्ण एकादशी में से इस एकादशी को श्रेष्ठ तथा उच्चतम स्थान में रखा गया है। आमलकी एकादशी को आंवला एकादशी या आम्ल ग्यारस एकादशी भी कहते हैं। इसको रंगभरी एकादशी के नाम से जाना जाता है।
आमलकी एकादशी के दिन व्रत रखने का विधान है और भगवान श्री विष्णु नारायण के साथ आँवले के वृक्ष की पूजा की जाती है। कहते हैं कि आँवले का वृक्ष भगवान श्री हरि को अत्यधिक प्रिय है। इस वृक्ष में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का वास होता है। इस एकादशी के दिन पूजा के दौरान आमलकी एकादशी व्रत की कथा पढ़ने का विधान है। इससे भगवान विष्णु अत्यंत प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों के सभी कष्टों को दूर करते हैं। तो आईए जानते हैं आमलकी एकादशी की व्रत की कथा:

आमलकी एकादशी या रंगभरी की व्रत कथा (Amalaki Ekadashi Ki Vrat Katha)
पौराणिक कथाओं के अनुसार वैदिश नाम का एक शहर था। उस शहर में ब्राह्मण, क्षत्रिय ,वैश्य तथा शूद्र निवास करते थे। वहाँ निवास करने वाले सभी शहर वासी भगवान विष्णु के बहुत बड़े भक्त थे। वहां कोई नास्तिक नहीं था। उस शहर के राजा का नाम चैतरथ था। राजा चैतरथ बहुत ही विद्वान तथा धार्मिक प्रवृत्ति के इंसान थे। राजा के नगर में कोई भी दरिद्र नहीं था क्योंकि वहां हर कोई एकादशी का व्रत रखता था । एक बार की बात है फाल्गुन मास में आमलकी एकादशी आई तो इस खास उपलक्ष पर सभी शहरवासी तथा राजा ने व्रत किया। साथ ही उन लोगों ने राजा के साथ मंदिर जाकर आँवले के वृक्ष की पूजा की और रात्रि जागरण किया। इस दौरान रात्रि के समय एक बहेलिया आया जो घोर पापी था। उस बहेली को बहुत भूख और प्यास लगी थी इसलिए वह शांत रूप से मंदिर के कोने में बैठकर जागरण देखने लगा तथा विष्णु एकादशी और महाम्य कथा सुनने लगा। इसी तरह रात बीत गई। शहर वासियों के साथ बहेलिया ने भी पूरी रात्रि जागरण किया। सुबह होने के पश्चात सभी शहरवासी अपने-अपने घर लौट गए। बहेलिया ने भी घर जाकर भोजन किया, और कुछ ही समय के पश्चात ही बहेलिया की मौत हो गई।
एकादशी की कथा सुनने एवं रात्रि जागरण करने के बाद भी उसकी मृत्यु हो गई लेकिन कुछ समय बाद उसने राजा विदूरथ के यहाँ जन्म लिया जिसका नाम वसुरथ रखा गया। बड़े होकर उसने अपने पिता का पदभार ग्रहण किया और एक सदाचारी एवं धार्मिक राजा बने। एक दिन वह जंगल में सुबह से शिकार पर निकले और रास्ता भूल गए। वह आराम करने के लिए एक पेड़ के नीचे बैठे और वहीं पर सो गए। थोड़ी देर हुई थी कि वहाँ पर म्लेच्छ आ गए। राजा को अकेला पाकर उन्हें मारने की योजना तैयार की गई। उन्होंने कहा कि इन्हीं राजा के कारण हमें देश निकाला हुआ था इसलिए इस राजा को हमें मार देना चाहिए। इन बातों से अनजान राजा गहरी नींद में सोए रहे। मलेच्छों ने राजा पर आक्रमण करने के लिए उनकी तरफ अस्त्र-शस्त्र फेंकने शुरू किए, परन्तु उनका हर एक वार उन पर फूल बनकर बरसा तथा कुछ वार उन्हीं को जा कर लगे जिसके कारण कुछ मलच्छे मूर्छित होने लगे। इन्हीं सब के दौरान राजा के शरीर से एक दिव्य स्त्री उत्पन्न हुई जिसने बाकी बचे मलच्छों को जान से मार दिया।
वही जब राजा की नींद खुली तो उन्होंने देखा कि कुछ म्लेच्छ मृत अवस्था में धरती पर पड़े हैं। इस दृश्य को देखकर वे तुरंत ही पूरी बात जान गए और सोचने लगे कि जंगल में ऐसा कौन है जो उनकी जान बचा सकता है। इस दौरान आकाशवाणी हुई कि हे राजन तुम्हारी जान भगवान श्री हरि विष्णु नारायण ने बचाई है। पिछले जन्म में तुमने रात्रि जागरण कर आमलकी एकादशी व्रत कथा सुनी थी जिसका फल तुम्हें आज प्राप्त हुआ है। आज तुम शत्रुओं से घिरने के बावजूद भी जीवित अवस्था में हो। यह सब सुनकर राजा अपना शहर की ओर वापस हुए और खुशी-खुशी शहर में राज करने लगे। धार्मिक क्षेत्र में कर्म कांड करने लगे और भगवान विष्णु की दिन रात पूजा अर्चना में अपने आप को लीन रखने लगे।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications