Latest Updates
-
नसों में जमा कोलेस्ट्रॉल को कम कर सकते हैं ये 5 योगासन, नियमित अभ्यास से हार्ट डिजीज का खतरा होगा कम -
चेहरे पर नारियल तेल में मिलाकर लगाएं कॉफी पाउडर, स्किन की इन 5 समस्याओं से मिलेगा छुटकारा -
Myth Vs Fact: टाइट ब्रा पहनने से ब्रेस्ट कैंसर होता है? डॉक्टर से जानिए ऐसे ही 10 मिथ और उनकी सच्चाई -
Karwa Chauth Kab Hai 2026: करवा चौथ कब है? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और चांद दिखने का सटीक समय -
डायबिटीज में नारियल पानी पिएं या नींबू पानी? जानें शुगर कंट्रोल के लिए क्या है बेहतर -
Papankusha Ekadashi Vrat Katha: पापांकुशा एकादशी पर जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, सभी पापों से मिलेगी मुक्ति -
Papankusha Ekadashi 2026 Wishes: विष्णु जी की कृपा...पापांकुशा एकादशी पर अपनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
पार्टी में जल्दी बिगड़ जाता है मेकअप? केकी और पैची लुक से बचने के लिए अपनाएं ये 5 टिप्स -
दशहरा के बाद दिल्ली की हवा हुई जहरीली, 200 के पार पहुंचा AQI, प्रदूषण से बचाव के लिए फॉलो करें ये टिप्स -
कुल्लू दशहरा में नहीं जलता रावण का पुतला, देवलोक से आते हैं देवी-देवता, जानिए क्या है सदियों पुरानी परंपरा
Ambubachi Mela: इस मंदिर में तीन दिन पीरियड्स से गुजरती हैं कामाख्या देवी, भक्तों को मिलता है अनोखा प्रसाद
पूर्वी भारत का सबसे बड़ा अम्बुबाची मेला असम के प्रसिद्ध कामाख्या मंदिर में 22 जून को शुरू हुआ है और 26 जून 2024 तक चलेगा। सदियों से तांत्रिक साधना का महत्वपूर्ण केंद्र रहा यह मंदिर भारत के 51 शक्तिपीठों में से एक है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान शिव सती के शव को ले जा रहे थे, तो भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से उसके 108 टुकड़े कर दिए थे। कामाख्या मंदिर वहीं बना है, जहां देवी सती की योनि गिरी थी और यह हजारों सालों से शक्ति साधना का प्रमुख केंद्र रहा है।

अम्बुबाची मेला: महिला शक्ति का प्रतीक
माना जाता है कि देवी कामाख्या साल में एक बार मासिक धर्म से गुजरती हैं, यह दिव्य घटना तब होती है जब सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करता है। इस दौरान, वह तीन दिनों तक मासिक धर्म से गुजरती हैं, और मंदिर में अंबुबाची मेला आयोजित किया जाता है। 'अंबु' शब्द का अर्थ है पानी, जबकि 'बाची' का अर्थ है पानी छोड़ने की प्रक्रिया। इस त्यौहार को नारी शक्ति का प्रतीक माना जाता है। इन तीन दिनों के दौरान, मंदिर के दरवाजे अपने आप बंद हो जाते हैं, और किसी को भी अंदर जाने की अनुमति नहीं होती है।
सफेद कपड़े के लाल हो जाने का रहस्य
मंदिर के कपाट बंद होने से पहले महामुद्रा योनि के आस-पास के क्षेत्र को एक सफ़ेद कपड़े से ढक दिया जाता है। तीन दिन बाद जब कपाट खुलते हैं, तो कपड़ा लाल और गीला पाया जाता है। इस रहस्यमयी घटना के परिणामस्वरूप 'अम्बुबाची वस्त्र' का निर्माण होता है, जिसे भक्त पवित्र मानते हैं। इस कपड़े का एक टुकड़ा प्रसाद के रूप में भक्तों में बांटा जाता है।
अम्बुबाची प्रसाद के दो रूप हैं: 'अंगोदक' और 'अंगवस्त्र'। अंगोदक महामुद्रा योनि से निकलने वाले जल पदार्थ को कहते हैं, जबकि अंगवस्त्र देवी कामाख्या के मासिक धर्म के दौरान महामुद्रा की दरार को ढकने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कपड़े को कहते हैं। ऐसा माना जाता है कि जो लोग इस प्रसाद को ग्रहण करते हैं, वे अपने जीवन में दर्द, पीड़ा और दुख से मुक्त हो जाते हैं। अंगोदक का उपयोग तांत्रिक अनुष्ठानों और उपचारों में भी किया जाता है।
ब्रह्मपुत्र नदी का पानी लाल
देवी कामाख्या के मासिक धर्म का प्रभाव मंदिर से आगे बढ़कर आसपास की प्रकृति को भी प्रभावित करता है। कामाख्या मंदिर के पास ब्रह्मपुत्र नदी अंबुबाची के कारण तीन दिनों तक लाल हो जाती है। देवी कामाख्या के मासिक धर्म समाप्त होने के बाद, नदी का पानी अपने सामान्य रंग में वापस आ जाता है।
अंत में, कामाख्या मंदिर में अंबुबाची मेला नारी शक्ति का उत्सव मनाता है और उन भक्तों के लिए बहुत महत्व रखता है जो अपने जीवन पर इसके चमत्कारी प्रभावों में विश्वास करते हैं। सफेद कपड़े का रहस्यमयी रूप से लाल हो जाना और ब्रह्मपुत्र नदी के पानी का रंग बदलना इस वार्षिक आयोजन के इर्द-गिर्द रहस्य को और बढ़ा देता है।



Click it and Unblock the Notifications
