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Apara Ekadashi 2026: क्या अपरा एकादशी वाले दिन बाल धो सकते हैं? व्रत से पहले जरूर जान लें ये नियम
Can Washing Hair On Apara Ekadashi 2026: 13 मई 2026 को यानी बुधवार को अपरा एकादशी (Apara Ekadashi 2026) का व्रत रखा जाएगा। हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, और जब बात अपरा एकादशी की हो जो अपार पुण्य और सुख-समृद्धि देने वाली मानी जाती है तो नियमों का पालन और भी जरूरी हो जाता है। अक्सर व्रतियों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या इस पवित्र दिन पर बाल धोना या नाखून काटना शास्त्र सम्मत है? क्या अनजाने में की गई एक छोटी सी गलती आपके कठिन व्रत के फल को कम कर सकती है? अपरा एकादशी के व्रत में शुद्धता केवल मन की ही नहीं, बल्कि शरीर की भी अनिवार्य है। लेकिन शास्त्रों में कुछ विशिष्ट तिथियों पर बाल धोने को लेकर विशेष वर्जनाएं बताई गई हैं। यदि आप भी इस साल अपरा एकादशी का व्रत रखने जा रहे हैं, तो व्रत शुरू करने से पहले इन नियमों को स्पष्ट रूप से जान लेना आवश्यक है ताकि आपकी भक्ति पूर्ण रूप से सफल हो।

एकादशी के दिन बाल धो सकते हैं या नहीं?
धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, एकादशी तिथि पर बाल धोना शुभ नहीं माना जाता। विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं और व्रत रखने वाले पुरुषों के लिए कुछ नियमों का उल्लेख मिलता है। माना जाता है कि एकादशी पर चंद्रमा की स्थिति का जल तत्व पर गहरा प्रभाव पड़ता है, जिससे इस दिन सिर धोना मानसिक चंचलता बढ़ा सकता है। इसके अलावा कई क्षेत्रों में यह मान्यता है कि एकादशी पर बाल धोने से पुण्य फलों का क्षय होता है। इसलिए, अधिकांश लोग दशमी तिथि (एकादशी से एक दिन पहले) को ही स्नान आदि से पूरी तरह निवृत्त होकर शुद्ध हो जाते हैं।
अगर बाल धोना जरूरी हो तो क्या करें?
यदि बाल धोने जरूरी हों तो आप एकादशी तिथि से एक दिन पहले ही या दशमी तिथि का रात को बाल धो लें। वहीं अगर आप पीरियड्स में हैं तो एकादशी तिथि के दिन बाल धो सकती हैं। पीरियड्स के दौरान आप मानसिक रूप से व्रत तो रख सकती हैं लेकिन शारीरिक रूप से पूजा-पाठ नहीं कर सकतीं और न ही पूजा की सामग्री को छू सकती हैं।
अपरा एकादशी व्रत के अन्य महत्वपूर्ण नियम
दशमी से शुरुआत: व्रत के नियमों का पालन दशमी की रात से ही शुरू हो जाता है। इस रात सात्विक भोजन करें और मसूर की दाल या चावल का त्याग करें।
चावल का त्याग: एकादशी के दिन घर में चावल बनाना और खाना पूरी तरह वर्जित है, चाहे आप व्रत रख रहे हों या नहीं।
ब्रह्मचर्य और वाणी: इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें और कठोर शब्दों या झूठ बोलने से बचें।
तुलसी दल: एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। पूजा के लिए पत्ते एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।



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