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Ram Mandir: मोदी रहेंगे यजमान, शिवाजी का राज्याभिषेक कराने वाले गागाभट्ट के वंशज कराएंगे प्राण प्रतिष्ठा
Ram Mandir Pran Pratishtha: प्रतीक्षा की घड़ी अब पूरी होने वाली है। रामलला पूरे विधि विधान से अभूतपूर्व मंत्रोच्चारण की ध्वनि के बीच अपने जन्मस्थान पर विराजमान होंगे। तारीख निश्चित कर दी गयी है। 17 जनवरी 2023 को प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम शुरू होगा और इसका दायित्व मिला है विद्वान आचार्य लक्ष्मीकांत मथुरानाथ दीक्षित को।
अयोध्या राम मंदिर और शिवाजी महाराज का क्या है कनेक्शन?

उनका नाम आने के बाद से ही छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक का जिक्र होने लगा है। दरअसल 1674 ईस्वी में शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक काशी के महापंडित गागाभट्ट ने करवाई थी और इसके साथ ही हिंदवी साम्राज्य की स्थापना की थी। अब 350 वर्ष बाद गागाभट्ट के वंशज आचार्य लक्ष्मीकांत मथुरानाथ दीक्षित अयोध्या में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा कराएंगे।
लक्ष्मीकांत दीक्षित की अगुवाई में होंगे सभी अनुष्ठान
काशी के आचार्य दीक्षित के नेतृत्व में देशभर के 121 कर्मकांडी ब्राह्मण ऐतिहासिक राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के भव्य अनुष्ठानों को पूरा करेंगे। गौरतलब है कि 86 वर्षीय आचार्य पं. लक्ष्मीकांत महापंडित गागाभट्ट के 11वीं पीढ़ी के हैं। राज्याभिषेक के पश्चात जब छत्रपति शिवाजी काशी आए थे तो उनके साथ गागाभट्ट भी आए थे और उनके परिवार के कुछ सदस्य काशी में ही रह गई थी। ये लोग गागाभट्ट की उसी वंश परंपरा से ही हैं। यह परिवार रामघाट के समीप मंगला गौरी मंदिर के पास रहता है।
राम मंदिर में तैयारियां तेज
राम मंदिर को फाइनल रूप देने के लिए काम अंतिम स्टेज में चल रहा है। वहीं पूजा को लेकर भी सभी तरह की तैयारियां जोरों पर हैं। गौरतलब है कि प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम का शुभारंभ अयोध्या में 17 जनवरी से हो जाएगा।
अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा शेड्यूल

16 जनवरी 2024: इस दिन 'महापूजन' आयोजित किया जाएगा। अनुष्ठान लक्ष्मीकांत के नेतृत्व में वैदिक विद्वानों द्वारा आयोजित किए जाएंगे और उनमें शामिल होंगे- सर्व प्रायश्चित होम, दशविद स्नान (सरयू नदी में स्नान), दोपहर में यजमान (यज्ञ करने वाला व्यक्ति) द्वारा अपना स्थान ग्रहण करना।
17 जनवरी 2024: इस दिन जलयात्रा, तीर्थ और कलश पूजन जैसे अनुष्ठान किए जाएंगे, जिसके बाद कलश यात्रा होगी।
18 जनवरी 2024: इस दिन मंडप प्रवेश और यज्ञभूमि पूजन के साथ-साथ प्रधान संकल्प और गणेशम्बिका पूजन जैसे मुख्य अभिषेक अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे।
19 जनवरी 2024: इस दिन देवता पूजन, वेदों की सभी शाखाओं का पाठ, अधिवासन, कुंडपूजन, हवन के लिए प्राकृतिक विधि से अग्नि फूंकना, जलाधिवास (मूर्ति को पानी में डुबोकर रखना) और अन्य प्राण-प्रतिष्ठा पूर्व अनुष्ठान किए जाएंगे।
20 जनवरी 2024: इस दिन वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मंदिर का वास्तुपूजन किया जाएगा।
21 जनवरी 2024: इस दिन रामलला की मूर्ति को 114 कलशों में भरकर विभिन्न तीर्थ स्थलों और पवित्र नदियों के जल से स्नान कराया जाएगा। यह महापूजा और नगरभ्रमण करने से पहले किया जाएगा। बाद में, मूर्ति को यज्ञ मंडप में लाया जाएगा ताकि शैय्याधिवास, तत्वन्यास, महान्यास और अन्य अनुष्ठान किए जा सकें।
22 जनवरी 2024: यह वह दिन है जब दोपहर में देवप्राणप्रतिष्ठा (अभिषेक) होगी, जिसके बाद महापूजन, आरती और पूर्णाहुति होगी।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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