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Bakrid 2026: बकरीद पर जानवरों की कुर्बानी क्यों दी जाती है? जानिए क्या कहता है कुरान और इस्लामी नियम
Bakrid 2026: ईद-उल-अजहा, जिसे बकरीद के नाम से जाना जाता है, इस्लाम धर्म के सबसे पवित्र और अहम त्योहारों में से एक है। इस्लामी कैलेंडर के आखिरी महीने ज़िलहिज्जा की 10वीं तारीख को मनाया जाने वाला यह पर्व त्याग, आस्था और अल्लाह के प्रति समर्पण का प्रतीक माना जाता है। साल 2026 में भारत में बकरीद 28 मई, गुरुवार को मनाई जाएगी। हालांकि, इस्लामी परंपरा के अनुसार अंतिम तारीख चांद दिखने पर तय होती है। रमजान और ईद-उल-फितर के लगभग 70 दिन बाद आने वाला यह त्योहार हज यात्रा से भी जुड़ा होता है। बकरीद पर कुर्बानी की परंपरा निभाई जाती है, जो हजरत इब्राहिम की अल्लाह के प्रति अटूट आस्था और बलिदान की याद दिलाती है। यही वजह है कि ईद-उल-अजहा को इस्लाम में इंसानियत, त्याग और भाईचारे का संदेश देने वाला पर्व माना जाता है। आइए, इस लेख में जानते हैं कि बकरीद पर कुर्बानी का महत्व और इसके पीछे इस्लामी नियम क्या कहते हैं -

क्यों दी जाती है बकरीद पर कुर्बानी?
बकरीद का पर्व हजरत इब्राहिम की अल्लाह के प्रति गहरी आस्था और समर्पण की याद में मनाया जाता है। इस्लामी मान्यताओं के अनुसार, अल्लाह ने हजरत इब्राहिम की परीक्षा लेने के लिए उन्हें सपने में अपनी सबसे प्यारी चीज कुर्बान करने का संकेत दिया। इब्राहिम के लिए उनके बेटे हजरत इस्माइल सबसे अजीज थे, लेकिन उन्होंने अल्लाह के आदेश को सर्वोपरि मानते हुए कुर्बानी देने का फैसला कर लिया। कहा जाता है कि जब हजरत इब्राहिम अपने बेटे की कुर्बानी देने जा रहे थे, तब हजरत इस्माइल ने भी अल्लाह की रजा में खुशी-खुशी हामी भर दी। लेकिन जैसे ही कुर्बानी का वक्त आया, अल्लाह ने करिश्मा दिखाते हुए इस्माइल की जगह एक दुंबा भेज दिया। इस घटना को अल्लाह के प्रति सच्ची निष्ठा और त्याग का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। तभी से ईद-उल-अजहा पर कुर्बानी देने की परंपरा निभाई जाती है।
बकरीद का क्या है धार्मिक महत्व?
ईद-उल-अजहा यानी बकरीद इस्लाम धर्म का एक बेहद पवित्र पर्व माना जाता है, जो त्याग, समर्पण और इंसानियत का संदेश देता है। इस दिन मुस्लिम समुदाय अल्लाह के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए कुर्बानी की रस्म निभाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कुर्बानी केवल जानवर की नहीं बल्कि अपने अहंकार, स्वार्थ और बुरी भावनाओं का त्याग करने का प्रतीक भी मानी जाती है। यही वजह है कि बकरीद को भाईचारे, बराबरी और जरूरतमंदों की मदद से जोड़कर देखा जाता है।
कुर्बानी को लेकर क्या कहता है इस्लाम?
इस्लाम में कुर्बानी को नेक अमल माना गया है। कुरान और इस्लामी मान्यताओं के मुताबिक, अल्लाह इंसान का दिल, नीयत और उसकी सच्ची आस्था देखता है। ईद-उल-अजहा पर स्वस्थ और तय उम्र के जानवर की कुर्बानी दी जाती है। इसके बाद मांस को तीन हिस्सों में बांटने की परंपरा है-एक हिस्सा परिवार, दूसरा रिश्तेदारों और दोस्तों, जबकि तीसरा गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए रखा जाता है। इस परंपरा का मकसद समाज में दया, सहयोग और इंसानियत की भावना को मजबूत करना माना जाता है।
क्यों खास माना जाता है ईद-उल-अजहा?
बकरीद केवल धार्मिक त्योहार नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और प्रेम का भी प्रतीक है। इस मौके पर लोग ईद की नमाज अदा करते हैं, एक-दूसरे को मुबारकबाद देते हैं और खुशियां बांटते हैं। यह पर्व हजरत इब्राहिम की उस कुर्बानी की याद दिलाता है, जिसमें उन्होंने अल्लाह के हुक्म को सबसे ऊपर रखा था। यही कारण है कि ईद-उल-अजहा लोगों को त्याग, सेवा और मानवता के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है।



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