Latest Updates
-
Mother's Day Wishes for Chachi & Tai Ji: मां समान ताई और चाची के लिए मदर्स डे पर दिल छू लेने वाले संदेश -
क्या आपने कभी खाया है 'हरामजादा' और 'गधा' आम? मिलिए Mango की उन 14 किस्मों से जिनके नाम हैं सबसे अतरंगी -
Mother's Day 2026 Wishes for Bua & Mausi: मां जैसा प्यार देने वाली बुआ और मौसी को भेजें मदर्स डे पर ये संदेश -
Periods Delay Pills: पीरियड्स टालने वाली गोलियां बन सकती हैं जानलेवा, इस्तेमाल से पहले जान लें ये गंभीर खतरे -
वजन घटाने के लिए रोज 10K कदम चलना सबसे खतरनाक, एक्सपर्ट ने बताए चौंकाने वाले दुष्परिणाम -
Maharana Pratap Jayanti 2026 Quotes: महाराणा प्रताप की जयंती पर शेयर करें उनके अनमोल विचार, जगाएं जोश -
Shani Gochar 2026: रेवती नक्षत्र में शनि का महागोचर, मिथुन और सिंह सहित इन 5 राशियों की लगेगी लॉटरी -
Aaj Ka Rashifal 9 May 2026: शनिवार को इन 4 राशियों पर बरसेगी शनिदेव की कृपा, धन लाभ के साथ चमकेंगे सितारे -
Mother Day 2026: सलाम है इस मां के जज्बे को! पार्किंसंस के बावजूद रोज 100 लोगों को कराती हैं भोजन -
Aaj Ka Rashifal 08 May 2026: शुक्रवार को इन 4 राशियों पर बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा, जानें अपना भाग्यशाली अंक और रंग
Bhalchandra Sankashti Chaturthi 2026: 6 या 7 मार्च, कब है भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी? जानें शुभ मुहूर्त, महत्व औ
Bhalchandra Sankashti Chaturthi 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। यह दिन विघ्नहर्ता भगवान गणेश को समर्पित होता है। भालचंद्र का अर्थ होता है जिनके मस्तक पर चंद्र देव शोभायमान रहते हैं। इस दिन भक्त व्रत रखकर भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करते हैं। इस दिन रात को चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य दिया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी पर व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से व्यक्ति के जीवन के सभी दुख दूर हो जाते हैं। साथ ही, जीवन में सुख-समृद्धि आती है। ऐसे में, आइए जानते हैं कि इस बार भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी व्रत की तिथि, शुभ मुहूर्त, चंद्रोदय का समय और पूजा विधि के बारे में -

कब है भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी?
पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 06 मार्च, शुक्रवार को शाम 07 बजकर 53 मिनट पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 07 मार्च, शनिवार को शाम 07 बजकर 17 मिनट पर हो जाएगा। संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्रोदय के अनुसार रखा जाता है, इसलिए भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का व्रत 6 मार्च को रखा जाएगा। इस दिन चंद्रोदय का समय रात 9 बजकर 31 मिनट पर होगा।
भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी के दिन पूरे श्रद्धा भाव से गणेश जी की पूजा करने और व्रत रखने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं। साथ ही, घर में सुख-समृद्धि आती है और कार्यों में सफलता मिलती है। इस व्रत को रखने से व्यक्ति की सभी मनोकामना भी पूरी होती हैं।
भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी की पूजा विधि
भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी के दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और लाल या पीले रंग के साफ कपड़े पहनें।
इसके बाद चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर गणेश जी की मूर्ति या प्रतिमा को स्थापित करें
इसके बाद गणेश जी को रोली, कुमकुम और अक्षत से तिलक करें।
भगवान गणपति को फूल और उनकी प्रिय दूर्वा अर्पित करें।
भगवान को तिल के लड्डू और मोदक का भी भोग लगाएं।
पूजा के दौरान श्रद्धा भाव से "ॐ भालचंद्राय नमः" मंत्र का जाप करें और संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा का पाठ करें।
इसके बाद दीपक जलाकर गणेश जी की आरती करें।
रात को चंद्रोदय के बाद चंद्र देव को अर्घ्य अर्पित करें।
इसके बाद प्रसाद ग्रहण कर व्रत का पारण करें।



Click it and Unblock the Notifications