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क्या पीरियड्स के दौरान रख सकते हैं नवरात्रि व्रत? बीच में मासिक धर्म शुरू हो जाए तो क्या करें
Can We Do Navratri Puja In Periods: शक्ति की उपासना का महापर्व श्रद्धा और शुद्धता का संगम है। इस बार 19 मार्च, दिन वीरवार से नवरात्रि व्रत शुरू हो रहे हैं। लेकिन महिलाओं के लिए यह समय कभी-कभी असमंजस भरा हो जाता है, जब नवरात्रि के नौ दिनों के बीच ही मासिक धर्म (Periods) शुरू हो जाता है। अक्सर मन में यह सवाल कौंधता है कि क्या अशुद्धि की इस अवस्था में व्रत जारी रखना चाहिए? क्या माता रानी नाराज तो नहीं होंगी? या फिर अगर व्रत के बीच में पीरियड्स आ जाएं, तो क्या किया गया उपवास बेकार चला जाता है?
धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों के अनुसार, भक्ति का संबंध तन से ज्यादा मन की शुद्धता से है। मासिक धर्म एक प्राकृतिक शारीरिक प्रक्रिया है, जिसे लेकर शास्त्रों में कुछ विशेष संयम और नियम बताए गए हैं। यदि आप भी इस दुविधा में हैं कि 'पीरियड्स में नवरात्रि व्रत कैसे करें', तो यहां दी गई जानकारी आपकी हर शंका का समाधान करेगी।

पीरियड्स में नवरात्रि व्रत रख सकते हैं या नहीं?
शास्त्रों के अनुसार, उपवास (Fasting) का अर्थ है 'ईश्वर के निकट बैठना'। पीरियड्स के दौरान आप शारीरिक रूप से व्रत रख सकती हैं। अगर आपने पहले से संकल्प लिया है, तो उसे पूरा करना ही श्रेष्ठ है। उपवास और खान-पान के संयम का पीरियड्स से कोई विरोध नहीं है। आपकी श्रद्धा और संकल्प शक्ति ही व्रत का असली आधार है। आसान शब्दों में कहें तो पीरियड्स के दौरान आप व्रत रख सकती हैं लेकिन कुछ नियमों का पालन करना जरूरी है जो आगे बताए गए हैं।
बीच में पीरियड्स आ जाएं, तो क्या टूट जाता है उपवास?
अक्सर महिलाएं डर जाती हैं कि व्रत के तीसरे या पांचवें दिन पीरियड्स आने से उनकी मेहनत बेकार हो गई। ऐसा बिल्कुल नहीं है। अगर व्रत के दौरान अचानक मासिक धर्म शुरू हो जाए, तो आपका उपवास खंडित (Broken) नहीं माना जाता। आप केवल पूजा की सामग्री और मूर्ति को स्पर्श करना बंद कर दें, लेकिन अपना व्रत पूरा करें।
पीरियड्स में कैसे करें पूजा
पीरियड्स के दौरान मंदिर के भीतर जाना या अखंड ज्योति को छूना वर्जित है। लेकिन आप दूर बैठकर या अपने कमरे में एकांत में मानसिक पूजा कर सकती हैं। आप 'दुर्गा चालीसा' या 'सप्तशती' का पाठ कर सकती हैं, लेकिन ध्यान रहे कि आप धार्मिक पुस्तक (किताब) को स्पर्श न करें। इसके बजाय मोबाइल या डिजिटल माध्यम से पाठ पढ़ना या सुनना सबसे उत्तम विकल्प है।
क्या कन्या पूजन और हवन में शामिल हो सकते हैं?
नवरात्रि के समापन पर होने वाले कन्या पूजन और हवन में पीरियड्स के दौरान सक्रिय रूप से शामिल होना वर्जित माना गया है। यदि आप व्रत के अंतिम दिन अशुद्ध अवस्था में हैं, तो आप स्वयं कन्याओं को भोजन न कराएं और न ही हवन कुंड में आहुति दें। आप घर के किसी अन्य सदस्य (जैसे पति, भाई या माता) से अपने नाम का संकल्प दिलाकर यह कार्य पूर्ण करवा सकती हैं।
हाँ, आप पाठ कर सकती हैं, लेकिन धार्मिक पुस्तक (किताब) को स्पर्श न करें। मोबाइल में देखकर या सुनकर पाठ करना सबसे उत्तम है।
बिल्कुल नहीं। यदि आपने व्रत का संकल्प लिया है, तो मासिक धर्म शुरू होने पर भी उपवास जारी रखें। व्रत का संबंध आपके मानसिक संकल्प से है, शारीरिक अवस्था से उपवास खंडित नहीं होता।



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