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Chaiti Chhath Geet 2026: 'कांच ही बांस' से 'उग हो सुरुज देव' तक, इन गीतों के बिना अधूरा है छठ पर्व
Chaiti Chhath 2026 Puja Songs Lyrics: जैसे बिना सूर्य के सृष्टि की कल्पना असंभव है, वैसे ही बिना लोकगीतों के छठ महापर्व की पूर्णता अधूरी है। साल 2026 में आस्था का यह महापर्व 22 मार्च (नहाय-खाय) से शुरू होकर 25 मार्च (उषा अर्घ्य) तक अपनी दैवीय छटा बिखेरेगा। चैती छठ के इन चार दिनों में जब व्रती कठिन निर्जला उपवास और शुद्धता की साधना में लीन होते हैं, तब फिजाओं में गूंजते 'कांच ही बांस के बहंगिया' और 'उग हो सुरुज देव' जैसे गीत उनकी थकान को असीम भक्ति में बदल देते हैं।
'स्वर कोकिला' शारदा सिन्हा की कालजयी आवाज से लेकर अनुराधा पौडवाल के भक्तिमय भजनों तक, ये गीत केवल शब्द नहीं, बल्कि छठी मैया से हर भक्त का सीधा संवाद हैं। बिहार की मिट्टी की सोंधी खुशबू और गंगा घाटों की पवित्रता को समेटे ये पारंपरिक गीत पीढ़ियों से हमारी पहचान बने हुए हैं। आइए, चैती छठ 2026 के इस पावन अवसर पर डूबते हैं भक्ति के उन सुरों में और जानते हैं उन 5 सदाबहार छठ गीतों के बोल, जिनके बिना माता का हर अनुष्ठान अधूरा माना जाता है।

1. कांच ही बांस के बहंगिया (शारदा सिन्हा)
यह गीत छठ पूजा की पहचान है, जो बहंगी लेकर घाट जाते हुए भक्त की श्रद्धा को दर्शाता है।
बोल (Lyrics):
कांच ही बांस के बहंगिया, बहँगी लचकत जाए,
कांच ही बांस के बहंगिया, बहँगी लचकत जाए,
होखू न बलम जी कहरिया, बहँगी घाटे पहुँचाए,
होखू न देवर जी कहरिया, बहँगी घाटे पहुँचाए।
बाट जे पूछेला बटोहिया, बहँगी केकरा के जाए?
बाट जे पूछेला बटोहिया, बहँगी केकरा के जाए?
तू त अन्हर होवे बटोहिया, बहँगी छठी माई के जाए,
तू त बाभन होबे बटोहिया, बहँगी छठी माई के जाए।
2. केलवा के पात पर (पारंपरिक)
यह गीत प्रकृति और सूर्य देव के प्रति समर्पण का प्रतीक है।
बोल (Lyrics):
केलवा के पात पर उगेलन सुरुज देव, झाँके-झुके,
केलवा के पात पर उगेलन सुरुज देव, झाँके-झुके।
हे करेलु छठि बरतिया, से झाँके-झुके,
हे करेलु छठि बरतिया, से झाँके-झुके।
हम त पूछिले सुरुज देव, कतने के लागल हो बेर,
हम त पूछिले छठी माई, कतने के लागल हो बेर।
भइले अरघ के बेर, से झाँके-झुके,
भइले अरघ के बेर, से झाँके-झुके।
3. उग हो सुरुज देव (अरघ के बेर)
जब भक्त डूबते या उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं, तब यह गीत हर घाट पर गूँजता है।
बोल (Lyrics):
उग हो सुरुज देव अरघ के बेर,
उग हो सुरुज देव अरघ के बेर।
भइले अरघ के बेर हो, पूजन के बेर हो,
अँजोर करीं सुरुज देव, अरघ के बेर हो।
बाट निहारेले बरतिया, कतने लागल हो बेर,
बाट निहारेले बरतिया, कतने लागल हो बेर।
सातहु रे घोड़वा के रथी, सुरुज देव,
अरघ के बेर हो, पूजन के बेर हो।
4. मारबो रे सुगवा धनुष से (लोक कथा)
यह गीत शुद्धता का संदेश देता है कि पूजा का फल (प्रसाद) कोई पक्षी भी जूठा न करे।
बोल (Lyrics):
मारबो रे सुगवा धनुष से, सुगा गिरे मुरझाय,
मारबो रे सुगवा धनुष से, सुगा गिरे मुरझाय।
सुगा जे मरले अभागा, सुगनी जे रोवे ले वियोग,
सुगा जे मरले अभागा, सुगनी जे रोवे ले वियोग।
आदित मल होखिहें सहाय, सुगनी जे रोवे ले वियोग,
आदित मल होखिहें सहाय, सुगनी जे रोवे ले वियोग।
ऊ जे खइले जूठ कइले, छठी माई के परसाद,
ऊ जे खइले जूठ कइले, सुरुज देव के परसाद।
5. पटना के घाट पर (पवन सिंह/पारंपरिक)
यह गीत पटना के गंगा घाट की सुंदरता और श्रद्धा का वर्णन करता है।
बोल (Lyrics):
पटना के घाट पर हमहूँ अरघिया देब,
हे छठी मैया, दर्शन दीहीं आपन।
नारियल केरवा के घउदवा, सजल बा दोकनिया,
सजल बा दोकनिया, हे छठी मैया।
दीहीं आशीष मैया, जुग-जुग जियसु ललनवा,
जुग-जुग जियसु ललनवा, हे छठी मैया।
सबके मनोकामना, पूरा करीं आपन,
पूरा करीं आपन, हे छठी मैया।



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