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Chaitra Navratri 2023 Day 5: संतान प्राप्ति का आशीर्वाद देती हैं माता स्कंदमाता, पढ़ें मंत्र और आरती
नवरात्र के पांचवें दिन मां दुर्गा के पांचवें रूप देवी स्कंदमाता की अराधना की जाती है। देवी स्कंदमाता को वात्सल्य, ममता और प्रेम की देवी माना जाता है। पूरी श्रद्धा से उनकी उपासना करने वाले जातकों के जीवन को वो प्रेम और आशीर्वाद से भर देती हैं। साथ ही संतान प्राप्ति के इच्छुक भक्तों को भी पंचमी के दिन विशेष रूप से मां स्कंदमाता की पूजा करनी चाहिए, इससे उन्हें संतान लाभ मिल सकता हैं।
स्कंदमात का स्वरुप चार भुजाओं वाला होता हैं, जिनमें से एक भुजा में वे अपने पुत्र कार्तिकेय को लेकर बैठी होती हैं। बाकी हाथों में कमल, श्वेत कमल और वरद मुद्रा होती है।

माता भक्तों के कल्याण का आशीर्वाद देती हैं। मां की आराधना से महिलाओं को सौभाग्य की प्राप्ति और संतान का सुख मिलता है। आइये जानते हैं पंचमी के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त, स्कंदमाता मन्त्र और आरती:
स्कंदमाता पूजा का शुभ मुहूर्त
चैत्र शुक्ल की पंचमी तिथि का शुभारंभ - 25 मार्च 2023, दोपहर 04.23
चैत्र शुक्ल पंचमी तिथि का समापन - 26 मार्च 2023, दोपहर 04.32

स्कंदमाता मन्त्र
सिंहासना गता नित्यं पद्माश्रि तकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी।।
या देवी सर्वभूतेषु मां स्कंदमाता रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

स्कंदमाता आरती
जय तेरी हो स्कंद माता।
पांचवां नाम तुम्हारा आता॥
सबके मन की जानन हारी।
जग जननी सबकी महतारी॥
तेरी जोत जलाता रहू मैं।
हरदम तुझे ध्याता रहू मै॥
कई नामों से तुझे पुकारा।
मुझे एक है तेरा सहारा॥
कही पहाडो पर है डेरा।
कई शहरों में तेरा बसेरा॥
हर मंदिर में तेरे नजारे।
गुण गाए तेरे भक्त प्यारे॥
भक्ति अपनी मुझे दिला दो।
शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो॥
इंद्र आदि देवता मिल सारे।
करे पुकार तुम्हारे द्वारे॥
दुष्ट दैत्य जब चढ़ कर आए।
तू ही खंडा हाथ उठाए॥
दासों को सदा बचाने आयी।
भक्त की आस पुजाने आयी॥
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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