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Chanakya Niti: सफलता चाहते हैं तो ऐसी पत्नी और मित्र से दूरी बनाने में है भलाई
महान आचार्य चाणक्य ने सफलता के बारे में हर पहलु, हर नज़रिए से लिखा। उन्होंने ना केवल शासन और राज्य की सफलता के बारे में सुझाव दिए बल्कि समाज, परिवार और व्यक्ति की सफलता संबंधी भी विस्तार से लिखा।
चाणक्य की नीतियों का ही नतीजा था कि मौर्या शासन और उसके शासक इतने दशकों तक सफ़ल रूप से शासन कर पाएं। चाणक्य कहते हैं कि हर व्यक्ति जीवन में सफ़ल होना चाहता है और खुद को और अपने परिवार को अच्छी जिंदगी देना चाहता है।

जीवन में सफलता के लिए आचार्य चाणक्य के दो श्लोकों को जीवन में अपना लेने से व्यक्ति सफलता की ओर एक कदम आगे बढ़ सकता है-
अधीत्येदं यथाशास्त्रं नरो जानाति सत्तमः।
धर्मोपदेशं विख्यातं कार्याऽकार्य शुभाऽशुभम्।।
इस श्लोक के माध्यम से चाणक्य कहते हैं कि जो व्यक्ति निरंतर शिक्षा लेता रहता है उसको सही-गलत की अच्छे से पहचान हो जाती है। शास्त्रों के अनुसार ज्ञान प्राप्त करने से शुभ-अशुभ के बीच फर्क करके हमेशा सही मार्ग पर चलता है जो मार्ग उसको सफलता की ओर लेकर जाता है। अर्थात् व्यक्ति को कभी भी शिक्षा का दामन नहीं छोड़ना चाहिए। जीवनभर ज्ञान अर्जित करते रहने से हम जीवन में बेहतर निर्णय लेने के काबिल होते हैं, जो अंततः हमें सफलता की राह पर अग्रसित करता है।

प्दुष्टाभार्या शठं मित्रं भृत्यश्चोत्तरदायकः।
ससर्पे च गृहे वासो मृत्युरेव नः संशयः।।
यह श्लोक सफलता के मार्ग पर से बाधाओं को दूर करने की दृष्टि से बहुत ज़रूरी है। चाणक्य इस श्लोक के माध्यम से कहते हैं कि समय रहते दुष्ट पत्नी, झूठे मित्र, धूर्त सेवक की पहचान कर लेनी चाहिए और उनसे दूरी बना लेनी चाहिए। यदि ऐसा न किया जाए, तो इन लोगों के संपर्क में बने रहने से खुद का नुकसान होता है और दुखों का सामना होता है। जीवन में सफ़ल होने के लिए सबसे पहले ऐसे धूर्त और दुष्ट लोगों से दूर हो जाना ज़रूरी होता है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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