Latest Updates
-
International Self Care Day: अच्छी सेहत के लिए सेल्फ-केयर है जरूरी, रोजाना अपनाएं ये 5 सेल्फ केयर हैबिट्स -
रात में राजमा भिगोना भूल गए? इन आसान ट्रिक्स से बिना भिगोए भी बन जाएगा एकदम नरम राजमा -
National Cousins Day 2026 Wishes: नेशनल कजिन्स डे पर अपने भाई-बहन भेजें ये खास मैसेज, यादगार बन जाएगा दिन -
CJP Protest Delhi: आलिया भट्ट से लेकर सलमान खान तक, छात्रों के समर्थन में उतरे ये बॉलीवुड सितारे -
Chia Seeds Vs Sabja Seeds: चिया सीड्स या सब्जा के बीज, जानिए आपकी सेहत के लिए क्या बेहतर? -
टूटते-झड़ते बालों से हैं परेशान? ट्राई करें गुड़हल और नारियल तेल से बना हेयर ऑयल, रुक जाएगा Hair Fall -
6 महीने के बच्चे को सॉलिड फूड देते समय न करें ये 5 गलतियां, 'बच्चों की डॉक्टर' ने बताई सही शुरुआत -
हेल्दी दिखने वाले ये 7 फूड्स बढ़ा सकते हैं आपका ब्लड शुगर, खरीदने से पहले जरूर पढ़ लें लेबल -
National Broadcasting Day 2026: 23 जुलाई को ही क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय प्रसारण दिवस? जानें इसका इतिहास -
Guru Purnima 2026: कब है गुरु पूर्णिमा? जानिए सही तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि
Chaturmas 2026: चातुर्मास कब से शुरू होगा? इस दौरान क्या करें और क्या न करें? जानें सभी जरूरी नियम
Chaturmas 2026: हिंदू धर्म में चातुर्मास का विशेष धार्मिक महत्व है। चातुर्मास के चार महीनों को भक्ति, साधना और आत्मसंयम का समय माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और चार महीने बाद देवउठनी एकादशी पर जागते हैं। इसी अवधि को चातुर्मास कहा जाता है। इस दौरान विवाह, सगाई, गृहप्रवेश, मुंडन और दूसरे तरह के मांगलिक कार्यों की मनाई हो जाती है। वहीं, पूजा-पाठ, जप-तप, दान और व्रत का विशेष महत्व बढ़ जाता है। आइए जानते हैं चातुर्मास में में क्या करना चाहिए और क्या नहीं। -

चातुर्मास 2026 कब से कब तक रहेगा?
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल चातुर्मास की शुरुआत 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी से होगी। वहीं, इसका समापन 20 नवंबर को देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशी के दिन होगा। इन चार महीनों को धर्म-कर्म और आध्यात्मिक साधना के लिए बेहद शुभ माना जाता है।
चातुर्मास क्या होता है?
'चातुर्मास' का अर्थ है चार महीने की अवधि। धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं। जब तक वे विश्राम करते हैं, तब तक श्रद्धालु सांसारिक सुख-सुविधाओं से दूरी बनाकर पूजा, जप, तप और सेवा जैसे कार्यों में अधिक समय देते हैं। देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु के जागने के बाद शुभ और मांगलिक कार्य फिर से शुरू किए जाते हैं।
चातुर्मास का धार्मिक महत्व
चातुर्मास को आध्यात्मिक साधना का सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है। इस दौरान साधु-संत एक स्थान पर रहकर प्रवचन, जप और तप करते हैं। मान्यता है कि इन चार महीनों में भगवान विष्णु की आराधना, मंत्र जाप, धार्मिक ग्रंथों का पाठ और दान-पुण्य करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। यही वजह है कि लाखों श्रद्धालु इस अवधि में अपने जीवन में संयम, सेवा और भक्ति को अपनाने का प्रयास करते हैं।
चातुर्मास में क्या करना चाहिए?
चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु और भगवान शिव की नियमित पूजा करें।
विष्णु सहस्रनाम, श्रीमद्भगवद्गीता या रामचरितमानस का पाठ करें।
रोज भगवान के मंत्रों का जाप और ध्यान करें।
चातुर्मास के चार महीनों के दौरान सात्विक भोजन ग्रहण करें और संयमित जीवनशैली अपनाएं।
अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, वस्त्र और अन्य जरूरी वस्तुओं का दान करें।
चातुर्मास के दौरान जरूरतमंद लोगों की सहायता करें।
चातुर्मास में किन कामों से बचना चाहिए?
चातुर्मास में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य शुभ संस्कार करने से बचें।
नए व्यापार या किसी बड़े शुभ कार्य की शुरुआत न करें।
मांस, मदिरा और तामसिक भोजन का सेवन न करें।
क्रोध, झूठ, ईर्ष्या और कटु व्यवहार से दूरी बनाए रखें।



Click it and Unblock the Notifications