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Devuthani Ekadashi 2025: प्रबोधिनी एकादशी के दिन भूलकर भी न करें ये 5 काम, वरना नाराज हो सकते हैं श्रीहरि!
Devuthani Ekadashi 2025 Niyam: देवउठनी एकादशी, जिसे प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है, कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। इस बार एकादशी व्रत दो दिन रखा जा रहा है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं और इसी के साथ शुभ कार्यों का शुभारंभ होता है। इस पावन दिन पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा, तुलसी विवाह और दीपदान का विशेष महत्व होता है। हालांकि शास्त्रों में बताया गया है कि देवउठनी एकादशी के दिन कुछ काम भूलकर भी नहीं करने चाहिए।
इस दिन संयम, श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान श्रीहरि की आराधना करने से सारे पाप मिट जाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। आइए जान लेते हैं कि इस दिन कौन से 5 काम नहीं करने चाहिए जो आपकी श्रद्धा और भक्ति पर भारी पड़ सकते हैं।

देवउठनी एकादशी पर भूलकर भी न करें ये 5 काम
1. मांस-मदिरा का सेवन न करें
देवउठनी एकादशी के दिन मांस, मछली, अंडा या शराब का सेवन करना सख्त वर्जित माना गया है। यह दिन सात्विक आहार और भक्ति के लिए समर्पित होता है। जो इस दिन इन सब चीजों का सेवन करता है श्रीहरि उससे नाराज हो जाते हैं।
2. झूठ बोलना या निंदा करना
वैसे तो कभी भी झूठ नहीं बोलना चाहिए और किसी की निंदा करनी चाहिए लेकिन देवउठनी एकादशी पर किसी की बुराई, झूठ बोलना या मन में दुर्भावना रखना पाप का कारण बनता है। इस दिन वाणी और विचार दोनों पवित्र रखने चाहिए।
3.चावल ना खाएं
देवउठनी एकादशी के दिन भूलकर भी चावल नहीं खाने चाहिए। न ही चावल से बनी कोई भी चीज खानी चाहिए। ऐसा माना जाता है कि जो लोग एकादशी के दिन चावल खाते हैं वो उतने ही कीड़े खाते हैं।
4. दिन नें न सोएं नींद
इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पूजा-पाठ करना अत्यंत शुभ माना गया है। अधिक सोना आलस्य और अपवित्रता का प्रतीक है। इस दिन दोपहर के समय नहीं सोना चाहिए।
5. तुलसी या भगवान की उपेक्षा न करें
देवउठनी एकादशी पर तुलसी का पूजन अनिवार्य होता है। इस दिन तुलसी को जल अर्पित न करना या पूजा में लापरवाही करना अत्यंत अशुभ माना गया है।
देवउठनी एकादशी का महत्व
कहते हैं कि जो भक्त इस दिन नियमपूर्वक व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु की पूजा करते हैं, उन्हें जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। साथ ही, उनके सभी पाप नष्ट होकर जीवन में शुभता का संचार होता है।



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