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Durga Saptshati Path: नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से मिलते हैं अनगिनत लाभ, बनी रहती है कृपा
Benefits of Durga Saptshati Path in Navratri: नवरात्र प्रारंभ हो रहे हैं और शक्ति की देवी दुर्गा की उपासना करके भक्त सिद्धि प्राप्त करने का अनुष्ठान करेंगे। ऐसे में माता दुर्गा की कृपा प्राप्त करने के लिए सबसे लोकप्रिय मंत्रो का संकलन हैं दुर्गा शप्तशती।
इसका पाठ करने से चमत्कारिक लाभ होते हैं। कहा तो यहां तक जाता है कि दुर्गा सप्तशती एक वरदान की तरह है। आइये जानते है इस पवित्र पुस्तक के कौन से अध्याय को पढने से क्या लाभ होता है।

दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय के पाठ से मिलेगा कौन सा लाभ?
दुर्गा सप्तशती के प्रथम अध्याय को पढने से मानसिक विकार दूर होते हैं। चेतना जागृत होती है और मानसिक चिंताओं से मुक्ति मिलती है, एकाग्रता आती है। कहीं न कहीं इसका फायदा रक्तचाप की बिमारी से जुड़े लोगो को होता है।
दूसरे अध्याय को पढ़ने से शत्रु पर विजय प्राप्त करने की शक्ति प्राप्त होती है। विशेष तौर पर अगर किसी कोर्ट कचहरी का मामला है तो दूसरा अध्याय पढने से इसमें सफलता प्राप्त होने की आशा जगती है। इसका मतलब ये नहीं कि आप अधर्म के रास्ते पर भी हों तो विजय प्राप्त होगी। माता दुर्गा का अवतार हुआ ही था असत्य पर सत्य की विजय के लिए तो इस बात का ध्यान रखें।
तीसरा अध्याय पढने से भय समाप्त होता है। भय दो प्रकार के होते हैं। एक आतंरिक भय और दूसरा बाहरी भय। तीसरे अध्याय के पढने से दोनों प्रकार के भय का नाश होता है।
चौथा अध्याय पढने से माँ की कृपा प्राप्त होती है। जीवन में ऊर्जा का संचार होता है और शक्ति महसूस होती है।
पांचवा अध्याय पढने से भूत प्रेत और बुरे सपनो की परेशानी दूर होती है।
छठा अध्याय पढने से तंत्र मंत्र जादू टोना किया गया हो तो वो दूर होता है। इसके अलावा राहू केतु द्वारा दी जा रही मुसीबतों से भी छुटकारा मिलता है।

सातवे अध्याय के पढने से आपकी सबसे तीव्र इच्छा या मनोकामना पूर्ण होती है।
आठवे अध्याय के पाठ से कोई चीज या व्यक्ति गूम हो गया हो तो वो मिलने के आसार जग जाते हैं। साथ ही धन की कमी हो तो वो भी दूर होती है।
नौवा अध्याय पढने से कोई अमूल्य चीज या संतान प्राप्ति की इच्छा पूरी होती है।
दसवे अध्याय को पढने से संतान को सद्बुद्धि आती है और वो अगर गलत रास्ते पर चल पड़ा हो तो सही रास्ते पर आ जाता है।
ग्यारहवें अध्याय को पढने से धन की हानि रूकती है और अनावश्यक खर्चे पर रोक लगती है।
बारहवे अध्याय का पाठ करने से व्यक्ति को मान सम्मान की प्राप्ति होती है और लगा हुआ लांछन दूर होता है।
तेरहवा अध्याय सबसे महत्वपूर्ण है और इसको पढने से माता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
तो इस नवरात्रि माता की कृपा प्राप्त करने के लिए जब दुर्गा सप्तशती का पाठ करें तो इन अध्याय से होने वाले लाभ को भी याद रखें और पूरे मनोभाव से पढ़ें।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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