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Ganpati Visarjan 2024: अनंत चतुर्दशी के दिन रहेगा भद्रा का साया, इन शुभ मुहूर्त में करें गणपति विसर्जन
Ganpati Visarjan Muhurat 17 September 2024: दस दिवसीय गणेश उत्सव का समापन 17 सितंबर 2024 को गणेश विसर्जन के साथ होगा। इस दिन भक्तगण गणपति की मूर्तियों को साफ नदियों, तालाबों या समुद्र में विसर्जित करते हैं। हालांकि, इस साल गणेश विसर्जन के दिन अनंत चतुर्दशी पर भद्रा का साया रहेगा।

गणेश विसर्जन का शुभ समय (Ganpati Visarjan 2024 Ka Samay)
ज्योतिष शास्त्र में भद्रा के दौरान शुभ कार्य न करने की सलाह दी गई है। इसलिए गणपति विसर्जन के लिए शुभ समय जानना जरूरी है। 17 सितंबर 2024 को भद्रा सुबह 11:44 बजे से रात 09:55 बजे तक रहेगी। इसके बावजूद विसर्जन के लिए कई शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं।
द्रिक पंचांग के अनुसार, सुबह का मुहूर्त सुबह 09:11 बजे से दोपहर 01:47 बजे तक है। दोपहर का मुहूर्त दोपहर 03:19 बजे से शाम 04:51 बजे तक है। इसके अलावा, शाम का मुहूर्त शाम 07:51 बजे है।
भक्तों को इन समयों के अनुसार गणेश विसर्जन की योजना बनानी चाहिए ताकि वे शुभ समय पर अनुष्ठान कर सकें। ऐसा करने से वे भद्रा और शनि के पारगमन से जुड़े किसी भी नकारात्मक प्रभाव से बच सकते हैं।
संक्षेप में, हालांकि भद्रा की छाया गणेश विसर्जन के दिन एक चुनौती बन सकती है, लेकिन शुभ समय के बारे में सावधानीपूर्वक योजना बनाने से भक्तों को अपने अनुष्ठान को सुचारू रूप से और सफलतापूर्वक करने में मदद मिल सकती है।
गणेश विसर्जन कैसे करते हैं? (Ganesh Visarjan Ki Vidhi)
10 दिनों तक श्री गणेश जी की मूर्ति हमारे घर में विराजमान रहती है और अब उनकी विदाई होगी। इन 10 दिनों में उन्हें प्रसन्न करने के लिए हर संभव प्रयास किए जाते हैं। उन्हें हर तरह का भोग लगाया जाता है। उनकी पूजा की जाती है। कहीं श्री गणेश जी को डेढ़ दिन, कहीं 3 दिन, कहीं 5 दिन और कहीं 7 दिन के लिए रखा जाता है। अब बारी आती है कि उन्हें कैसे विदा किया जाए। परंपरा के अनुसार कहा जाता है कि श्री गणेश जी की मूर्ति को उसी तरह विदा किया जाना चाहिए जैसे हम अपने सबसे प्रिय व्यक्ति के साथ करते हैं जब वह यात्रा पर जाता है। आइए जानते हैं कि श्री गणेश जी की मूर्ति को कैसे विदा किया जाए -
सबसे पहले आरती-पूजन-अर्चना करें जो 10 दिन या डेढ़ दिन, 3 दिन, 5 दिन और 7 दिन तक की जाती है। विशेष प्रसाद चढ़ाएं।
अब श्री गणेश का स्वस्तिवाचन करें।
एक साफ लकड़ी का तख्ता लें। उसे गंगाजल या गोमूत्र से शुद्ध करें। घर की महिला उस पर स्वस्तिक बनाएं। उस पर चावल के दाने रखें। उस पर पीला, गुलाबी या लाल रंग का सजावटी कपड़ा बिछाएं।
इस पर गुलाब की पंखुड़ियाँ बिछाएँ और बोर्ड के चारों कोनों पर चार सुपारियाँ भी रखें।
अब श्री गणेश को स्थापना स्थल से उनके विजय घोष के साथ उठाकर इस फलक पर स्थापित करें। फलक पर स्थापित करने के बाद उनके साथ फल, फूल, वस्त्र, दक्षिणा, 5 मोदक रखें।
एक छोटी सी लकड़ी लें। चावल, गेहूं और पंच मेवा की पोटली बनाकर उस पर बांध दें। यथाशक्ति दक्षिणा (सिक्के) रखें। मान्यता है कि रास्ते में उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। इसलिए पुराने समय में घर से निकलते समय यात्रा की जो तैयारियां की जाती थीं, वही श्री गणेश के प्रस्थान के समय भी करनी चाहिए।
नदी, तालाब या सरोवर के किनारे उन्हें विसर्जित करने से पहले पुनः कपूर की आरती करें। श्री गणेश को विदाई की शुभकामनाएं दें और उनसे धन, सुख, शांति, समृद्धि के साथ मनचाहा वरदान मांगें। साथ ही 10 दिनों तक जाने-अनजाने में हुई किसी भी गलती के लिए क्षमा प्रार्थना करें।
श्री गणेश प्रतिमा को फेंके नहीं, बल्कि वस्त्र व समस्त सामग्री सहित पूरे आदर व सम्मान के साथ धीरे-धीरे विसर्जित करें।
अगर श्री गणेश की मूर्ति पर्यावरण अनुकूल होगी तो आपको ज्यादा पुण्य मिलेगा क्योंकि वह पानी में पूरी तरह से घुल जाएगी। आधी-अधूरी और टूटी-फूटी नहीं रहेगी।
यदि श्री गणेश की मूर्ति इको-फ्रेंडली है, तो आप इसे घर पर ही विसर्जित कर सकते हैं, इस पानी को अपने गमले में डालें और हमेशा अपने पास रखें।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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