Latest Updates
-
दुआ के दूसरे बर्थडे पर दीपिका-रणवीर ने कराया मैटरनिटी फोटोशूट, बेबी बंप फ्लॉन्ट करते हुए शेयर की तस्वीरें -
Laddu Gopal Chatthi 2026: 9 या 10 सितंबर, कब है लड्डू गोपाल की छठी? नोट करें सही तिथि, पूजा विधि और भोग -
Krishna Chhathi 2026 Wishes: माखन-मिश्री का भोग...कृष्ण जी की छठी पर अपनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
वायरल बुखार, खांसी-जुकाम और इंफेक्शन से बचने के लिए करें ये 5 योगासन, इम्यूनिटी होगी बूस्ट -
‘बबीता सिंह रिपोर्टिंग’ के बाद निमिषा सजयन ने ऐसे घटाया 14 किलो वजन, एक्ट्रेस ने शेयर की वेट लॉस जर्नी -
Paryushana Mahaparva 2026: आज से शुरू हुआ हुआ पर्युषण महापर्व, जानें आठ दिनों का महत्व और नियम -
पेरिस में बना फ्रांस का पहला पारंपरिक हिंदू मंदिर, 1970 के संकल्प से 2026 तक ऐसे पूरा हुआ सफर -
International Literacy Day 2026: क्यों मनाया जाता है अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस? जानें इतिहास, महत्व और थीम -
International Literacy Day 2026: साक्षरता दिवस पर ये संदेश भेज सबको करें जागरूक, बताएं पढ़ने-लिखने का महत्व -
Aja Ekadashi Vrat Katha: अजा एकादशी पर पढ़ें ये व्रत कथा, मिलेगा अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य
क्या शादीशुदा थे नीम करोली बाबा? जानें महाराज जी के परिवार में कौन-कौन है और कैसे छोड़ दिया था घर
Neem Karoli Baba Wife And Children Name: विश्व प्रसिद्ध संत नीम करोली बाबा (Neem Karoli Baba) को लोग एक ऐसे दिव्य योगी के रूप में जानते हैं, जिन्होंने आजीवन कंबल ओढ़ा और दुनिया को मानवता व प्रेम का पाठ पढ़ाया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि चमत्कारों और सिद्धियों के धनी बाबा महाराज केवल एक सन्यासी नहीं, बल्कि एक गृहस्थ भी थे? जी हां, अध्यात्म की पराकाष्ठा पर पहुंचने वाले बाबा महाराज शादीशुदा थे और उनका एक पूरा परिवार था। महज 11 वर्ष की अल्पायु में विवाह के बंधन में बंधने वाले 'लक्ष्मण नारायण शर्मा' (बाबा का असली नाम) का वैराग्य से लेकर दोबारा गृहस्थ आश्रम लौटने का सफर बेहद दिलचस्प और प्रेरणादायक है। आइए जानते हैं नीम करोली बाबा के अनसुने पारिवारिक जीवन का पूरा सच, उनकी पत्नी और बच्चों के बारे में।

महज 11 साल की उम्र में विवाह और अचानक वैराग्य का फैसला
नीम करोली बाबा का जन्म उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के अकबरपुर गांव में एक संपन्न ब्राह्मण परिवार में हुआ था। पुराने दौर की परंपरा के अनुसार, माता-पिता ने महज 11 वर्ष की उम्र में ही उनका विवाह एक संभ्रांत परिवार की कन्या से कर दिया था। विवाह के कुछ समय बाद ही बाबा का मन सांसारिक सुखों से उचट गया। उनके भीतर का वैराग्य जाग उठा और वे किशोर अवस्था में ही किसी को बिना बताए चुपचाप घर छोड़कर चले गए। घर छोड़ने के बाद उन्होंने देश के कई हिस्सों में घूमकर कठिन साधना की।
पिता के आदेश पर दोबारा लौटे गृहस्थ आश्रम
घर छोड़ने के बाद बाबा कई सालों तक साधु संतों की संगति में रहे, लेकिन उनके पिता जिनका नाम दुर्गा प्रसाद जी था लगातार उनकी खोज में लगे रहे।आखिरकार कई सालों बाद पिता ने उन्हें गुजरात के पास खोज निकाला। पिता ने बाबा को आदेश दिया कि वे वापस घर लौटें और अपनी पत्नी व गृहस्थ जीवन की जिम्मेदारियों को निभाएं। बाबा महाराज अपने पिता का बेहद सम्मान करते थे। पिता की आज्ञा को शिरोधार्य करते हुए वे वापस घर लौटे और एक सामान्य शादीशुदा व्यक्ति की तरह खेती-किसानी और पारिवारिक जीवन जीने लगे।

बाबा महाराज का परिवार: पत्नी और बच्चों के बारे में जानिए
बाबा ने घर लौटने के बाद परिवार और वैराग्य के बीच ऐसा बेहतरीन संतुलन बनाया, जो आज भी मिसाल है। पत्नी के साथ रहे और शादीशुदा जीवन की जिम्मेदारी निभाते हुए वो 3 बच्चों के पिता बने। नीम करौली बाबा की पत्नी का नाम रामबेटी देवी था। वे एक बेहद शांत और धार्मिक स्वभाव की महिला थीं, जिन्होंने बाबा के आध्यात्मिक सफर में कभी बाधा नहीं डाली, बल्कि उनके त्याग को समझा।गृहस्थ जीवन के दौरान बाबा के तीन बच्चे हुए। उनके दो बेटे अनेक सिंह शर्मा और धर्मनारायण शर्मा हैं, जबकि उनकी एक बेटी हैं जिनका नाम गिरिजा देवी है।
आज कहां हैं नीम करोली बाबा के बच्चे और क्या करते हैं वंशज?
नीम करोली बाबा ने अपने बच्चों को हमेशा सादगी और उच्च संस्कारों के साथ पाला। उन्होंने कभी भी अपनी दिव्य शक्तियों या नाम का इस्तेमाल बच्चों को किसी प्रकार का वीआईपी स्टेटस दिलाने के लिए नहीं किया। बाबा के दोनों बेटों ने उत्तर प्रदेश में ही बेहद साधारण जीवन व्यतीत किया और खेती व सरकारी सेवा से जुड़े रहे। बाबा महाराज के पोते और उनके परिवार के अन्य सदस्य आज भी आगरा और उनके पैतृक गांव के आस-पास रहते हैं। बाबा की बेटी और दामाद भी धार्मिक कार्यों में सक्रिय रहते हैं। मजे की बात यह है कि बाबा महाराज के वंशज आज भी खुद को किसी वीआईपी संत का परिवार नहीं, बल्कि एक सामान्य नागरिक मानते हैं।

गृहस्थी और अध्यात्म का अनोखा संतुलन: बाबा की सबसे बड़ी सीख
बाबा का गोल्डन संदेश: नीम करोली बाबा अक्सर अपने भक्तों से कहते थे कि भगवान को पाने के लिए घर-बार छोड़ना, जंगलों में जाना या सन्यासी बनना जरूरी नहीं है। यदि आप अपने परिवार के बीच रहकर, अपनी जिम्मेदारियों को ईमानदारी से निभाते हुए ईश्वर का स्मरण करते हैं, तो वह भक्ति सबसे श्रेष्ठ है। बाबा खुद इसका सबसे बड़ा उदाहरण थे।



Click it and Unblock the Notifications
