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Janmashtami 2026: जन्माष्टमी पर तुलसी तोड़ सकते हैं या नहीं? जानें क्या हैं धार्मिक नियम
Janmashtami 2026 Tulsi Rules: साल 2026 में जन्माष्टमी का पर्व 4 सितंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। धर्म शास्त्रों के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। हर साल उनके जन्मोत्सव को जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं और रात में भगवान कृष्ण के बाल रूप की पूजा करते हैं। जन्माष्टमी पर भोग में माखन-मिश्री, फल और पंजीरी जैसी चीजें चढ़ाई जाती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, तुलसी दल के बिना भीग अधूरा माना जाता है। लेकिन धर्म शास्त्रों में तुलसी के पत्ते तोड़ने को लेकर भी कुछ नियम बताए गए हैं। ऐसे में, कुछ लोग इस बात को लेकर अक्सर असमंजस में रहते हैं कि जन्माष्टमी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ सकते हैं या नहीं? आइए ,जानते हैं क्या कहते हैं धार्मिक मान्यताएं और शास्त्र -

जन्माष्टमी पर तुलसी के पत्ते तोड़ना चाहिए या नहीं?
जन्माष्टमी के दिन भगवान कृष्ण के साथ तुलसी के पौधे का भी पूजन करने की भी परंपरा है। इसी वजह से धार्मिक मान्यताओं में जन्माष्टमी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ने से बचने की बात कही गई है। पूजा के लिए तुलसी दल चाहिए तो उसे एक दिन पहले ही तोड़कर रख लेना बेहतर माना जाता है। ब्रह्मवैवर्त पुराण से जुड़ी मान्यताओं में भी जन्माष्टमी के दिन के लिए पहले से तुलसी दल रखने की बात मिलती है।
क्या पहले से तोड़े हुए तुलसी के पत्ते चढ़ा सकते हैं?
हां, धार्मिक मान्यता के अनुसार तुलसी के पत्तों को सामान्य फूल-पत्तियों की तरह बासी नहीं माना जाता। इसलिए एक दिन पहले तोड़कर रखे गए साफ तुलसी दल को जन्माष्टमी की पूजा और भगवान कृष्ण के भोग में इस्तेमाल किया जा सकता है।
श्रीकृष्ण की पूजा में तुलसी क्यों चढ़ाई जाती है?
धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण, भगवान विष्णु के अवतार हैं और तुलसी भगवान विष्णु को प्रिय मानी जाती है। इसी वजह से कृष्ण जी की पूजा और भोग में भी तुलसी दल चढ़ाने की परंपरा है। जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल को भोग लगाते समय भी तुलसी दल रखा जाता है।
जन्माष्टमी से पहले तुलसी कब तोड़ें?
जन्माष्टमी 2026 में 4 सितंबर, शुक्रवार को है। पूजा के लिए तुलसी दल चाहिए तो इसे 3 सितंबर की सुबह तोड़कर रख सकते हैं। तुलसी के पत्ते तोड़ने के लिए सुबह का समय बेहतर माना जाता है। सूर्यास्त के बाद तुलसी के पत्ते तोड़ने की परंपरा नहीं है। तोड़े हुए पत्तों को साफ जगह पर रखें, ताकि पूजा के समय आसानी से इस्तेमाल किया जा सके।
पूजा में न करें ये गलतियां
शाम को तुलसी न छुएं: जन्माष्टमी पर शाम के समय तुलसी को छूने या पत्ते तोड़ने से बचने की मान्यता है।
बाल बांधकर पूजा करें: तुलसी पूजा के समय महिलाओं को बाल खुले न रखने और सिर ढककर पूजा करने की परंपरा है।
तीन बार परिक्रमा करें: तुलसी को जल चढ़ाने के बाद तीन बार परिक्रमा करें और पास में घी का दीपक जलाएं।
लाल चुनरी चढ़ाएं: जन्माष्टमी पर तुलसी को नई लाल चुनरी चढ़ाई जा सकती है। इसे बार-बार बदलने की जरूरत नहीं मानी जाती।



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