Jaya Ekadashi 2026: जया एकादशी में न खाएं ये चीजें 5 वरना टूट जाएगा व्रत, जानें उपवास के लिए क्या है सही आहार

Jaya Ekadashi 2026 Vrat Foor Rules: आज यानी 29 जनवरी 2026 को जया एकादशी है। साल में 24 एकादशी होती हैं जिसमें से एक शुक्ल पक्ष में आती है और एक कृष्ण पक्ष में आती है। हर एकादशी का अपना अलग महत्व होता है और शास्त्रों में कहा गया है कि एकादशी का व्रत केवल भूखे रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह मन और इंद्रियों के शुद्धिकरण का पर्व है। जया एकादशी के दिन भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए श्रद्धालु उपवास रखते हैं, लेकिन अक्सर जानकारी के अभाव में खान-पान की गलतियां व्रत को निष्फल कर देती हैं।

एकादशी के दिन कुछ खास नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है वरना व्रत का फल नहीं मिलता। अगर आप भी इस साल जया एकादशी का व्रत रखने जा रहे हैं, तो यह जान लेना बेहद जरूरी है कि आपकी थाली में क्या होना चाहिए और क्या नहीं, ताकि आपका व्रत पूर्ण और सफल हो सके। किन चीजों को खाना चाहिए और किन चीजों को नहीं खाना चाहिए ये जानना आपके लिए जरूरी है।

भूलकर भी न खाएं ये चीजें

चावल

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी के दिन चावल में 'महर्षि मेधा' का अंश माना जाता है, इसलिए इस दिन चावल खाना वर्जित है।

अनाज और दालें

इस दिन गेहूं, जौ, मक्का और मसूर की दाल, उड़द की दाल, चना दाल जैसी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।

तामसिक भोजन

एकादशी के व्रत में लहसुन, प्याज और मांस-मदिरा का सेवन पूरी तरह वर्जित है। यहां तक कि बैंगन और गोभी जैसी सब्जियों से भी परहेज की सलाह दी जाती है।

साधारण नमक

अगर आप जया एकादशी का व्रत रखने वाले हैं तो इस बात का ध्यान रखें कि आप साधारण नमक न खाएं बल्कि सेंधा नमक का सेवन करें।

जया एकादशी के दिन क्या खाएं?

फल और मेवे

ताजे फल जैसे केला, सेब, अंगूर और सूखे मेवे बादाम, काजू, अखरोट आदि का सेवन करें क्योंकि ये ऊर्जा का बेहतरीन स्रोत हैं।

दूध और डेयरी उत्पाद

जया एकादशी व्रत में दूध, दही, पनीर और घर पर बनी खोये की मिठाई का सेवन किया जा सकता है।

कुट्टू और साबूदाना

आप कुट्टू के आटे की पूरी, साबूदाने की खिचड़ी या खीर बनाकर खा सकते हैं।

सेंधा नमक

स्वाद के लिए केवल सेंधा नमक (Rock Salt) का ही प्रयोग करें। ऐसा माना जाता है कि व्रत में साधारण नमक खाने से व्रत टूट जाता है।

खान-पान के विशेष नियम

दशमी से ही परहेज

एकादशी का नियम दशमी तिथि की रात से ही शुरू हो जाता है। दशमी की रात को मसूर की दाल या शहद का सेवन नहीं करना चाहिए।

शुद्धता का ध्यान

भोजन सात्विक होना चाहिए और उसे शुद्ध मन व स्वच्छता के साथ बनाया जाना चाहिए।

पारण का नियम

एकादशी के अगले दिन (द्वादशी) को पारण के समय सबसे पहले तुलसी पत्र या जल से व्रत खोलें, फिर सात्विक भोजन ग्रहण करें।

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