Latest Updates
-
Maghi Special Bihar Tilkut Recipe: घर पर बनाएं बाजार जैसा कुरकुरा और स्वादिष्ट तिलकुट -
Summer Hair Care: गर्मियों में बालों के लिए बेस्ट 5 हल्के तेल, बिना चिपचिपाहट के मिलेंगे लंबे और मजबूत बाल -
Japan Mango Ban: जापान में सबसे ज्यादा कौन सा आम खाया जाता है? 20 साल बाद भारतीय आमों पर लगाया प्रतिबंध -
Restaurant Style Jeera Aloo Recipe: घर पर बनाएं होटल जैसा चटपटा और कुरकुरा जीरा आलू -
World No Tobacco Day: स्मोकिंग की लत से छुटकारा चाहिए? ये 5 घरेलू उपाय बीड़ी-सिगरेट छोड़ने में करेंगे आपकी मदद -
World No Tobacco Day 2026: क्यों मनाया जाता है विश्व तंबाकू निषेध दिवस? जानें इस दिन का इतिहास, महत्व और थीम -
Bihari Breakfast Special Dahi Chura Recipe: पारंपरिक स्वाद के साथ झटपट तैयार करें -
Aaj Ka Rashifal 31 May 2026: रविवार को इन 4 राशियों पर बरसेगी सूर्य देव की कृपा, धन लाभ के साथ चमकेगा भाग्य -
Light Digestive Lauki Sabzi Recipe: कम मसालों में बनाएं सेहतमंद और स्वादिष्ट सब्जी -
Param Ekadashi 2026: 10 या 11 जून, कब है परम एकादशी? नोट करें सही डेट और पारण का समय
Jitiya Vrat 2024: यहां देखें जितिया व्रत में नहाय खाय से लेकर पारण का सही समय
Jitiya Vrat 2024: जितिया या जीवित्पुत्रिका व्रत, माताओं द्वारा बच्चों की भलाई और लंबी आयु के लिए रखा जाता है, यह एक कठोर उपवास अनुष्ठान है जिसमें न तो भोजन और न ही पानी ग्रहण किया जाता है। यह व्रत, जो अधिक चुनौतीपूर्ण माना जाता है, अश्विन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दौरान रखा जाता है।
यह व्रत नहाय-खाय नामक अनुष्ठान से शुरू होता है, इसके बाद पारण होता है, जो व्रत का समापन करता है। उपवास और पूजा प्रक्रिया के अभिन्न अंग ये अनुष्ठान जितिया के पालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इस वर्ष यह व्रत 24 सितंबर 2024 को शुरू होकर 26 सितंबर 2024 को समाप्त होगा। अष्टमी तिथि का विशिष्ट समय 24 सितंबर को दोपहर 12:38 बजे से 25 सितंबर को दोपहर 12:10 बजे तक है।
व्रत की शुरुआत से पहले नहाय-खाय की परंपरा 24 सितंबर 2024 को मंगलवार के दिन रखी गई है। यह प्रथा अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग है, इस अवसर पर विशेष भोजन तैयार किया जाता है।
व्रत रखने वाले लोग इस समय सात्विक भोजन करते हैं। कुछ क्षेत्रों में, नहाय-खाय के दौरान मछली खाना शुभ माना जाता है, जो जितिया व्रत से जुड़ी रस्मों में विविधता को दर्शाता है। 25 सितंबर को एक दिन के कठोर उपवास के बाद, 26 सितंबर को व्रत तोड़ा जाता है, या पारण किया जाता है। नोनी साग, तुरई की सब्जी, रागी की रोटी और अरबी जैसे विशिष्ट खाद्य पदार्थों के साथ व्रत तोड़ने से पहले जीमूतवाहन देवता सहित घरेलू देवताओं की पूजा करने की प्रथा है।
व्रत की शुरुआत 24 सितंबर को नहाय-खाय से होगी और 26 सितंबर को पारण के साथ इसका समापन होगा। यह क्रम जितिया व्रत के समग्र पालन में दोनों अनुष्ठानों के महत्व को रेखांकित करता है। हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि जितिया व्रत से जुड़ी जानकारी और मान्यताएँ परंपरा में निहित हैं।
अंत में, जितिया व्रत मातृ भक्ति का एक गहन प्रदर्शन है, जिसमें कठोर उपवास और विशिष्ट अनुष्ठानों का पालन किया जाता है। नहाय-खाय व्रत की शुरुआत करता है और पारण इसके समापन को चिह्नित करता है, ये अनुष्ठान व्रत के महत्व को रेखांकित करते हैं। जैसे-जैसे व्रत करीब आता है, विभिन्न पारंपरिक व्यंजनों की तैयारी और 24 सितंबर को नहाय-खाय अनुष्ठान का पालन शुरू हो जाता है, जो इस महत्वपूर्ण उपवास अवधि से जुड़ी विविध और समृद्ध प्रथाओं को उजागर करता है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications