Jitiya Ke Geet 2025 : जिउतिया पर्व पर गाए जाते हैं पारंपरिक लोकगीत, यहां पढ़ें लिरिक्स

Jitiya Vrat Lokgeet Lyrics : जितिया व्रत संतान की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना के लिए किया जाने वाला महत्वपूर्ण पर्व है। इसकी शुरुआत नहाय खाय से होती है, जो पवित्र स्नान और सात्विक भोजन से शुरू होता है। यह व्रत आश्विन मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है और इसका विशेष महत्व बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में है।

महिलाएं इस दिन निर्जला उपवास रखकर अपनी संतान की सुख-समृद्धि और दीर्घायु की प्रार्थना करती हैं। जितिया पर्व की खास पहचान इसके लोकगीत हैं, जिन्हें बड़े उत्साह और आस्था के साथ गाया जाता है। इन गीतों में परंपरा, संस्कृति और मातृत्व की गहरी भावनाएं झलकती हैं। आइए यहां पढ़ें जितिया पर्व के पारंपरिक गीतों के लिरिक्स।

Jitiya Vrat Lokgeet Lyrics

Jitiya Vrat Geet Lyrics (जितिया व्रत गीत के लिरिक्स)

1. जुग जुग जिय ए बबुआ हमार होतोहरा प बाबू कबहू आचना आए

अचरा के फुलवा कबो ना मुरझाए
तोहरा प बाबू कबहू आचना आए
अचरा के फुलवा कबो ना मुरझाए
तोहरो जीनगीया के दिही सवार हो
जिऊत वाहन देव अर्जी करीह स्वीकार हो
चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
हमरो दुलरवा के नजरों ने लागे
रहीह तू हरदम सबका से आगे
पढ़ लिख के बबुआ खूब नाम कमईह
कौनो परेशानी से तू कबहू ना डेरईह
जीऊत वाहन देव के बा महिमा अपार हो
एही से त निर्जल भूकल बानी त्यौहार हो
चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
हमरो उमर तोहरा के लग जाए
रोग बल्ला कोई छू नहीं पाई
पावन परब हम तोहरे ला करिले
कवनो ना गलती होखे ध्यान हम धरीले
तोहरे से रोशन बा अंगना हमार हो
कबहु भुलइह ना माई के दुलार हो
चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो

2. जुग जुग जिए मोर बबुआ दुलरुवा

जुग जुग जिए मोर
जुग जुग जिए मोर बबुआ दुलरुवा
जिउत वहांन देवता से करब हम अरजिया
ऐ हो सखी भुखीब
ऐ हो सखी भुखीब
जितिया के परबिय
बड़ा भारी होला सखी जितिया के बरतिया
बड़ा भारी होला
तीन दिन के होला सखी पावन परबिया
न खाये उपवास पारण के बा बिधिया
आशीन अनहरिया के अस्टमी तिथि के
जीवतिया पुजाला निरजल व्रत रख के
सासु जी से पूछब
सासु जी से
सासु जी से पूछब कुल व्रत के नियमिय
ऐ हो सखी भुखीब
ऐ हो सखी भुखीब
जितिया के परबिया
बड़ा भारी होला सखी जितिया के बरतिया
बड़ा भारी होला
सप्तमी के दिने होला गंगा आसन्नवा
नवनि संग मडवा वर्ती खाये एहि दिनवा
नेनुवाके पातपर पुवा पकवनवा
चील सियारिन दिहल जाला भोगवा
गोतनि सग करब हम
गोतनि सग
गोतनि सग करब हम
भोर में सरगहिया
ऐ हो सखी भुखीब
ऐ हो सखी भुखीब
जितिया के परबिया
बड़ा भारी होला सखी जितिया के बरतिया
बड़ा भारी होला
लव कुश पुजला सखी अष्टमी के संझिया
कथा सुनीली बूढ़ होके चाहे कन्या
नवमी के भोर होला पारण के दिनवा
कांडा गिराउके बनेला भोजनवा
सईया से मगाइब हम
उत्तम जी से
खुसबू मगाइये सोने के जिउतिया
ऐ हो सखी भुखीब
ऐ हो सखी भुखीब
जितिया के परबिय
बड़ा भारी होला सखी जितिया के बरतिया
बड़ा भारी होला

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