Kajari Teej 2026 Vrat Katha: कजरी तीज के दिन जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, मिलेगा अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद

Kajari Teej 2026 Vrat Katha: सनातन धर्म में कजरी तीज का विशेष महत्व है। कजरी तीज को कजली तीज, सातुड़ी तीज और बड़ी तीज भी कहा जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को कजरी तीज का व्रत रखा जाता है। इस बार 31 अगस्त, सोमवार को कजरी तीज मनाई जाएगी, कजरी तीज का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। कजरी पर विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना से व्रत रखती हैं। वहीं, अविवाहित लड़कियां भी मनचाहे जीवनसाथी की कामना से यह व्रत करती हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह व्रत पहली बार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए किया था। कजरी तीज के दिन माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा के साथ-साथ कजरी तीज की व्रत कथा भी सुनी जाती है। मान्यता है कि ऐसा करने से सुहागिनों को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। तो चलिए, जानते हैं कजरी तीज की कथा -

Kajari Teej Vrat Katha

कजरी तीज व्रत की कथा (Kajari Teej Vrat Katha In Hindi)

पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में एक गांव में एक गरीब ब्राह्मण अपनी पत्नी के साथ रहता था। दोनों बहुत साधारण जीवन जीते थे। घर की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि कई बार दो वक्त का भोजन जुटाना भी कठिन हो जाता था।

एक बार कजरी तीज का पर्व आया। ब्राह्मण की पत्नी ने श्रद्धा और विश्वास के साथ तीज माता का व्रत रखने का संकल्प लिया। व्रत के दिन उसने अपने पति से कहा, "आज मैंने तीज माता का व्रत रखा है। आप मेरे लिए सवा किलो चने का सत्तू ले आइए।"

ब्राह्मण ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा, "घर में पैसे नहीं हैं। ऐसे में मैं सत्तू कैसे लेकर आऊं?"

यह सुनकर ब्राह्मणी कुछ नाराज हुई और बोली, "मुझे इसके बारे में कुछ नहीं पता। आपको किसी भी तरह मेरे लिए सत्तू लेकर आना होगा।"

पत्नी की बात सुनकर ब्राह्मण बहुत चिंतित हुआ, लेकिन उसके मन में अपनी पत्नी का व्रत पूरा करवाने की इच्छा थी। वह रात के समय सत्तू की तलाश में घर से निकल पड़ा।

चलते-चलते वह एक साहूकार की दुकान पर पहुंचा। रात हो चुकी थी और साहूकार के साथ उसके नौकर भी गहरी नींद में सो रहे थे। ब्राह्मण धीरे से दुकान के भीतर गया और सत्तू ढूंढने लगा। लेकिन उसे वहां सत्तू नहीं मिला।

तब उसने सोचा कि सत्तू बनाने के लिए चने की दाल, घी और शक्कर ही ले चलता हूं। उसने सवा किलो के करीब ये सामग्री इकट्ठी कर ली।

तभी सामान खिसकने की आवाज से दुकान के नौकरों की नींद खुल गई। उन्होंने ब्राह्मण को देखकर शोर मचा दिया और चोर-चोर कहकर साहूकार को जगा दिया। साहूकार ने तुरंत ब्राह्मण को पकड़ लिया।

डरे हुए ब्राह्मण ने हाथ जोड़कर कहा, "सेठ जी, मैं चोर नहीं हूं। मेरी पत्नी ने कजरी तीज का व्रत रखा है। उसने मुझसे सवा किलो सत्तू लाने को कहा था। दुकान में सत्तू नहीं मिला, इसलिए मैं उसे बनाने के लिए चने की दाल, घी और शक्कर लेकर जा रहा था। आप मेरी तलाशी ले सकते हैं।"

साहूकार ने ब्राह्मण की तलाशी ली। उसके पास उन सामानों के अलावा कुछ भी नहीं मिला। ब्राह्मण ने फिर विनती करते हुए कहा, "सेठ जी, मुझे जाने दीजिए। चंद्रमा निकल आया होगा। मेरी पत्नी व्रत खोले बिना मेरा इंतजार कर रही होगी।"

ब्राह्मण की बात सुनकर साहूकार का हृदय द्रवित हो गया। उसे ब्राह्मण की गरीबी और उसकी पत्नी के प्रति श्रद्धा देखकर बहुत दुख हुआ। उसने कहा, "आज से तुम्हारी पत्नी मेरी धर्म बहन है।"

इसके बाद साहूकार ने ब्राह्मण को सवा किलो सत्तू के साथ रुपये, आभूषण, मेहंदी, लच्छा और अन्य सामान भी दिया। इतना ही नहीं, उसने ब्राह्मण की मदद के लिए काफी धन भी दिया और उसे सम्मानपूर्वक घर भेज दिया।

ब्राह्मण के घर पहुंचने पर उसकी पत्नी ने चंद्रमा को अर्घ्य दिया और विधि-विधान से अपना व्रत पूरा किया। तीज माता की कृपा से धीरे-धीरे उनके जीवन के सभी कष्ट दूर होने लगे। घर में सुख, शांति और समृद्धि आने लगी और उनके बुरे दिन समाप्त हो गए।

कहा जाता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा के साथ कजरी तीज की इस कथा को पढ़ता या सुनता है, उसके जीवन में भी सुख-समृद्धि आती है। तीज माता की कृपा से उसके दुख दूर हों और घर-परिवार में हमेशा खुशहाली बनी रहे।

Story first published: Monday, August 31, 2026, 8:00 [IST]
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