Kamada Ekadashi 2024 Kab Hai: कामदा एकादशी व्रत से मिलता है 100 यज्ञ के समान पुण्य, जानें तिथि

Kamada Ekadashi 2024 Kab Hai: प्रत्येक वर्ष चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को कामदा एकादशी व्रत रखा जाता है। इस दिन विधि विधान से भगवान श्री हरि विष्णु नारायण के साथ माँ लक्ष्मी की भी पूजा करने का विधान है। इसके साथ ही नियमित एकादशी व्रत भी रखा जाता है। कामदा एकादशी व्रत भगवान विष्णु की उपासना के लिए रखा जाता है।

धार्मिक एवं आध्यात्मिक मान्यताओं के मुताबिक इस व्रत को रखने से जाने अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही मोक्ष की प्राप्ति होती हैं और उपासक को 100 यज्ञों के बराबर फल प्राप्त होता है तथा ब्रह्मभट वध दोष से भी छुटकारा मिलता है। इसके अलावा व्यक्ति द्वारा किए गए संपूर्ण पाप भी धुल जाते हैं। कामदा एकादशी में आराध्य श्री विष्णु भगवान की विशेष पूजा अर्चना करते हैं, तो आइए विस्तारपूर्वक कामदा एकादशी 2024 के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि को जानते हैं-

कामदा एकादशी 2024 कब है (Kamada Ekadashi 2024 Kab Hai)

Kamada Ekadashi 2024 Kab Hai Date Shubh Muhurat Paran Timings Puja Vidhi Significance in Hindi

चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 18 अप्रैल दिन गुरुवार सायं काल 05 बजकर 41 मिनट से प्रारंभ होकर इसके अगले दिन 19 अप्रैल दिन शुक्रवार को सायं काल 8 बजकर 04 मिनट पर इसकी समाप्ति होगी। उदया तिथि के अनुसार मुख्य रूप से 19 अप्रैल को कामदा एकादशी का व्रत रखा जाएगा।

कामदा एकादशी 2024 का पारण का समय (Kamada Ekadashi 2024 Paran Timing)

उपासक 20 अप्रैल को प्रातः काल 5 बजकर 50 मिनट से 8 बजकर 26 मिनट के मध्य अपना व्रत खोल सकते हैं। इस समय ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करके ध्यान मुद्रा लगाकर भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करें तथा इसके पश्चात ब्राह्मणों को दान दक्षिणा देकर अपने व्रत का पारण करें।

कामदा एकादशी का पूजा विधि (Kamada Ekadashi Ki Puja Vidhi)

* कामदा एकादशी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें, इसके बाद साफ एवं स्वच्छ कपड़ा धारण करें।
* इसके पश्चात भगवान श्री हरि विष्णु नारायण का ध्यान लगाते हुए व्रत का संकल्प लें।
* पूजा के लिए लकड़ी की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएँ और भगवान श्री हरि की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
* फिर प्रतिमा के समीप एक लोटा शुद्ध जल अक्षत, रोली तथा तिल डालकर रखें।
* इसके पश्चात भगवान श्री हरि को फल, फूल ,पंचामृत और तिल इत्यादि समर्पित करें।
* फिर घी का दीपक जलाएँ और सच्ची श्रद्धा तथा शुद्ध मन के साथ भगवान विष्णु तथा माँ लक्ष्मी के नाम का स्मरण करें।
* अब भगवान विष्णु की आरती करें और मंत्रों का जाप करें। और अंतिम में व्रत कथा पढ़ने के पश्चात अपनी पूजा संपन्न करें।

नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।

Story first published: Sunday, April 14, 2024, 17:45 [IST]
Desktop Bottom Promotion