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भारत में साधु-संतों का जीवन बहुत कठिन होता है। सभी साधु अपने जीवन को पूरी तरह ईश्वर के नाम समर्पित कर देते हैं। प्राचीन कथाओं में भी साधु संतों का कई जगह वर्णन किया गया है। इन सभी में नागा-साधुओं की चर्चा भी कई बार की गई है। सालों साल लोगों की नजरों से दूर नागा साधु कभी-कभी ही विशेष समय पर अपने तपस्थल से बाहर निकलते हैं। हम साधु-संतों में ज्यादातर पुरुष साधुओं को ही देखते हैं, लेकिन नागा साधुओं में न सिर्फ पुरुष साधु बल्कि महिला नागा साधु भी अपनी सुख-सुविधाओं से भरपूर जीवन को त्याग कर ईश्वर के नाम अध्यात्मिक जीवन को अपना लेती हैं, और नागा साधु की दीक्षा प्राप्त कर पुरुष नागा साधुओं की तरह ही अपना जीवन कठोर तरीके से जीती हैं। ये नागा साधु अक्सर कुंभ या माघ मेला में नजर आते हैं। माघ मेले का शुभारंभ हो गया है। ऐसे में प्रयागराज में संगम के तट पर आम लोगों के साथ साधु-संत और नागा साधु भी श्रद्धा की डुबकी लगाने आते हैं। ऐसे में नागा नर और महिला साधुओं को लेकर लोगों के मन में कई तरह की बाते आती हैं। तो आइए जानते हैं, नागा साधुओं से जुड़ी कुछ विशेष बातें...
क्या होती है महिला साधु?
पुरुष नागा साधु की तरह ही महिला नागा साधु भी अपना पूरा जीवन भगवान के नाम समर्पित करती हैं। लेकिन नागा साधु बनने के लिए इन्हें काफी तपश्या करनी पड़ती हैं। नागा साधु बनना बहुत मुश्किल सफर होता है। इसके लिए इन्हें कई कठिन परीक्षाओं से गुजरना होता है। किसी भी साधु को 10 से 15 साल तक ब्रह्मचर्य नियमों का सख्ती से पालन करना होता है। नागा साधु बनने के लिए इन्हें खुद का अपना पिंडदान करना होता है। जिसके बाद मुंडन किया जाता है, और फिर पवित्र नदी में स्नान किया जाता है। जिसके बाद ही नागा साधुओं में इन्हें शामिल किया जाता है।
महिला नागा साधु की वेशभूषा
नागा साधु पूरी तरह से नग्न रहते हैं, वहीं महिला नागा साधु वस्तधारी रहती हैं। इन्हें अपने मस्तक पर तिलक लगाना होता है। नागा महिला साधु सिर्फ गेरुए रंग का बिना सिला हुआ वस्त्र ही धारण करती हैं। समाज में पुरुष नागा साधुओं की तरह ही महिला नागा साधुओं को सम्मान मिलता है।
महिला नागा साधु से जुड़ी अन्य रोचक बातें
- महिला नागा साधुओं जीवनभर भगवान शिव के लिए खुद को समर्पित कर देती हैं। सभी नागा साधुओं को माता की उपाधि दी जाती है, जिस कारण सभी लोग इन्हें माता कहकर ही पुकारते है।
- दशनाम संन्यासिनी अखाड़ा में ही महिला नागा साधुओं को दीक्षा दी जाती है।
- महिला नागा साधु बनने के लिए महिलाओं को अपने हाथों से ही अपने बाल तोड़ने होते हैं। जिसके बाद इन्हें अपने सभी बाल पूरी तरह छिलवाने होते है।
- महिला नागा साधु स्नान करने के बाद पूरे दिन भगवान शिव की उपासना करती हैं। शाम के समय भगवान दत्तात्रेय की पूजा-अर्चना करती हैं।
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