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Krishna Chatti 2025: कृष्ण भक्तों के लिए खास है छठी, जानें क्यों लगाया जाता है कान्हा जी को कढ़ी-चावल का भोग
Krishna Chatti 2025: सनातन धर्म में कृष्ण जन्माष्टमी का बहुत अधिक महत्व है। माना जाता है कि इस दिन श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। कृष्ण भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और पूजा-पाठ करते हैं। जन्माष्टमी के 6 दिन बाद कृष्ण छठी मनाई जाती है। श्री कृष्ण की छठी कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाई जाती है जिसे बाल कृष्ण षष्ठी कहा जाता है। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित होता है और इसे खासतौर पर उत्तर भारत में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है।
इस दिन भक्तजन बाल स्वरूप में कान्हा जी की पूजा-अर्चना करते हैं और उन्हें कढ़ी-चावल का विशेष भोग लगाते हैं। लेकिन इस बार कई लोगों के मन में सवाल है कि कृष्ण छठी 21 अगस्त को है या 22 अगस्त को? आइए जानते हैं सही तिथि, पूजा विधि, क्यों मनाई जाती है कृष्ण छठी और कढ़ी-चावल के भोग का क्या है महत्व?

कब है कान्हा जी की छठी?
इस साल जन्माष्टमी तिथि को लेकर भी कंफ्यूजन था, क्योंकि 15 अगस्त और 16 अगस्त दोनों दिन अष्टमी तिथि थी। मगर मथुरा-वृंदावन में 16 अगस्त को जन्माष्टमी मनाई गई और भक्तों ने भी इसी दिन जन्माष्टमी मनाई। अब छठी को लेकर भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है कि 21 या 22 अगस्त कब है कृष्ण छठी? जिस तरह जन्माष्टमी दो दिन मनाई गई उसी तरह छठी भी दो दिन मनाई जाने वाली है। जिन लोगों ने 15 अगस्त को व्रत रखा था वो 21 अगस्त को छठी मनाएंगे, वहीं जिन्होंने 16 अगस्त यानी उदया तिथि पर व्रत रखा था वो 22 अगस्त को छठी मनाएंगे। मथुरा-वृंदावन में 21 अगस्त को छठी मनाई जाएगी, ऐसे में अधिकतर लोग इसी दिन इस पर्व को मनाएंगे।
क्यों लगाते हैं कढ़ी-चावल का भोग?
आप लोग ये तो जानते ही हैं कि कृष्ण छठी पर कान्हा जी को कढ़ी-चावल का भोग लगाया जाता है। इसके पीछे की वजह भी खास है। मान्यता के अनुसार, कृष्ण छठी पर श्रीकृष्ण के बाल रूप की पूजा होती है, इसलिए उन्हें सरल और सात्विक भोग अर्पित किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार चावल शांति और समृद्धि का प्रतीक है। यह पवित्रता और सादगी दर्शाता है। वहीं कथा के अनुसार बचपन में श्रीकृष्ण को चावल और दूध से बने पकवान बेहद प्रिय थे। एक मान्यता ये भी है कि इस दिन कढ़ी-चावल का भोग लगाने से दंपत्तियों को संतान सुख की प्राप्ति होती है और बच्चों की लंबी उम्र व स्वास्थ्य की रक्षा होती है।
कृष्ण छठी 2025 तिथि व शुभ मुहूर्त
षष्ठी तिथि प्रारंभ - 21 अगस्त 2025, सुबह 11:42 बजे से
षष्ठी तिथि समाप्त - 22 अगस्त 2025, दोपहर 01:25 बजे तक
इस तरह कृष्ण छठी का व्रत और पूजा 22 अगस्त 2025 को ही श्रेष्ठ मानी जाएगी।
कृष्ण छठी की पूजा विधि
स्नान के बाद व्रती स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
बाल गोपाल की प्रतिमा को स्नान कराकर वस्त्र व आभूषण पहनाएं।
धूप-दीप, पुष्प और फल अर्पित करें।
फिर कान्हा जी को दूध, दही, मक्खन और कढ़ी-चावल का भोग लगाएं।
अंत में आरती कर व्रत कथा सुनें।



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