Latest Updates
-
Maghi Special Bihar Tilkut Recipe: घर पर बनाएं बाजार जैसा कुरकुरा और स्वादिष्ट तिलकुट -
Summer Hair Care: गर्मियों में बालों के लिए बेस्ट 5 हल्के तेल, बिना चिपचिपाहट के मिलेंगे लंबे और मजबूत बाल -
Japan Mango Ban: जापान में सबसे ज्यादा कौन सा आम खाया जाता है? 20 साल बाद भारतीय आमों पर लगाया प्रतिबंध -
Restaurant Style Jeera Aloo Recipe: घर पर बनाएं होटल जैसा चटपटा और कुरकुरा जीरा आलू -
World No Tobacco Day: स्मोकिंग की लत से छुटकारा चाहिए? ये 5 घरेलू उपाय बीड़ी-सिगरेट छोड़ने में करेंगे आपकी मदद -
World No Tobacco Day 2026: क्यों मनाया जाता है विश्व तंबाकू निषेध दिवस? जानें इस दिन का इतिहास, महत्व और थीम -
Bihari Breakfast Special Dahi Chura Recipe: पारंपरिक स्वाद के साथ झटपट तैयार करें -
Aaj Ka Rashifal 31 May 2026: रविवार को इन 4 राशियों पर बरसेगी सूर्य देव की कृपा, धन लाभ के साथ चमकेगा भाग्य -
Light Digestive Lauki Sabzi Recipe: कम मसालों में बनाएं सेहतमंद और स्वादिष्ट सब्जी -
Param Ekadashi 2026: 10 या 11 जून, कब है परम एकादशी? नोट करें सही डेट और पारण का समय
Lohri 2025: कब मनाई जाएगी लोहड़ी 13 या 14 जनवरी? यहां देखें कंफर्म डेट
Lohri 2025: लोहड़ी उत्तर भारत के सबसे खास त्योहारों में से एक है, जिसे सिख और हिंदू समुदाय के लोग बड़े उत्साह से मनाते हैं। यह त्योहार न केवल रबी फसलों की कटाई का प्रतीक है, बल्कि शीत ऋतु के अंत का भी संदेश देता है।
लोहड़ी का पर्व हर साल 13 जनवरी को अलाव जलाकर, गीत-संगीत और नृत्य के साथ मनाया जाता है। आइए जानते हैं इस त्योहार से जुड़ी खास बातें।

लोहड़ी 2025: तारीख और शुभ मुहूर्त (Lohri 2025 Kab Hai?)
हिंदू पंचांग के अनुसार, लोहड़ी का पर्व मकर संक्रांति से एक दिन पहले मनाया जाता है।
- 2025 में लोहड़ी की तारीख: इस साल लोहड़ी का त्योहार 13 जनवरी, सोमवार को मनाया जाएगा।
- मकर संक्रांति का समय: सूर्य 14 जनवरी 2025 को सुबह 8:44 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसलिए, मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी को मनाया जाएगा।
लोहड़ी का महत्व
1. फसल कटाई का उत्सव
यह त्योहार मुख्य रूप से किसानों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह रबी फसलों की कटाई का जश्न है। इस दिन किसान भगवान सूर्य और अग्नि देव की पूजा करते हैं और अच्छी फसल के लिए उनका धन्यवाद करते हैं।
2. सर्दियों का अंत
लोहड़ी शीत ऋतु के समाप्त होने और गर्मियों के आगमन का प्रतीक है। यह दिन सूर्य की उपासना और नई ऊर्जा के स्वागत का पर्व है।
3. सामूहिक उत्सव
इस दिन परिवार और दोस्तों के साथ अलाव जलाकर गीत गाने, नृत्य करने और स्वादिष्ट पकवानों का आनंद लिया जाता है।
लोहड़ी की परंपराएं
1. अलाव जलाना:
लोहड़ी की सबसे खास परंपरा है अलाव जलाना। लोग इसके चारों ओर घूमते हैं, तिल, गुड़, मूंगफली, और मक्के के दानों को अग्नि को अर्पित करते हैं। इसे आभार और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।
2. सांस्कृतिक नृत्य और गीत:
गिद्दा और भांगड़ा इस त्योहार की जान हैं। पारंपरिक कपड़े पहनकर लोग अपने रीति-रिवाजों के अनुसार नृत्य और गायन करते हैं।
3. भोजन का महत्व:
इस दिन तिल, गुड़, सरसों का साग, और मक्के की रोटी का विशेष महत्व है। यह भोजन शरीर को गर्म रखने और सेहतमंद बनाने में मदद करता है।
धार्मिक पक्ष और मंत्र
लोहड़ी पर सूर्य देव और अग्नि देव की पूजा की जाती है। सूर्य देव को ऊर्जा और जीवन का स्रोत माना जाता है। इस दिन विशेष मंत्रों का जाप कर भगवान से सुख-समृद्धि की प्रार्थना की जाती है।
सूर्य देव के मंत्र
1. ऊं ह्यं ह्यीं ह्यौं सः सूर्याय नमः।
2. ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा।
3. ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकरः।
इन मंत्रों का जाप करने से सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
लोहड़ी न केवल किसानों के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए उल्लास और एकता का पर्व है। यह त्योहार प्रकृति के साथ हमारे संबंधों को दर्शाता है और हमें यह सिखाता है कि हर खुशी को परिवार और दोस्तों के साथ साझा करें। इस दिन का हर पहलू, चाहे वह अलाव जलाने की परंपरा हो, गिद्दा और भांगड़ा का उत्साह, या सूर्य देव की उपासना, हमारे जीवन में नई ऊर्जा और खुशियां लाने का संदेश देता है।
तो इस साल 13 जनवरी को लोहड़ी के अलाव के चारों ओर अपने प्रियजनों के साथ जश्न मनाएं और इस पर्व की खुशियां सभी के साथ बांटें।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications