Latest Updates
-
DHT: क्या है डायरेक्ट हेयर ट्रांसप्लांटेशन? जानें बालों की रिग्रोथ के लिए कितनी कारगर है यह तकनीक -
Captain Smit Machchhar: कैप्टन 'स्मित मच्छर' के सरनेम का क्या है मतलब? जानें इसके पीछे की दिलचस्प कहानी -
नुसरत भरूचा की रीढ़ की हड्डी में हुआ फ्रैक्चर, एयरलिफ्ट कर बाली से लाई गईं मुंबई, वीडियो देख फैंस हुए परेशान -
Jitiya Vrat 2026: जितिया व्रत में पानी पी सकते हैं या नहीं? जानें जरूरी नियम और पारण का समय -
Jitiya Vrat Katha: जितिया (जीवित्पुत्रिका) व्रत में जरूर करें इस कथा का पाठ, पूरे साल सुरक्षित रहेगी संतान -
Jitiya Vrat 2026 Wishes: संतान की लंबी उम्र...जितिया व्रत के अवसर पर अपनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
Lal Bahadur Shastri Jayanti 2026: क्या आप जानते हैं लाल बहादुर शास्त्री का असली नाम? जानें 10 रोचक तथ्य -
Gandhi Jayanti 2026: गांधी जी को 'बापू' क्यों कहा जाता है? जानें किसने दी थी 'महात्मा' की उपाधि -
Gandhi Jayanti Wishes 2026: हाथ में लाठी थी...गांधी जयंती पर अपनों को ये खास मैसेज भेजकर दें शुभकामनाएं -
Gandhi Jayanti 2026 Essay, Speech: गांधी जयंती पर ऐसे करें भाषण और निबंध की तैयारी, मिलेगा इनाम
धान की बालियों से सजा मां अन्नपूर्णा का दरबार, जानिए इस अनोखी परंपरा का धार्मिक महत्व
Maa Annapurna Temple Decorated With Dhaan: वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंंदिर में मां अन्नपूर्णा के 17 दिवसीय महाव्रत का उद्यापन बुधवार को बड़ी आस्था और उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ। इस विशेष अवसर पर माता का दरबार धान की बालियों से भव्य एवं दिव्य रूप से सजाया गया, जिसे देखने के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं और माता के दर्शन के लिए भक्तों में उत्सुकता देखते ही बन रही थी। पूरा वातावरण जयघोषों और भक्ति गीतों से गूंज उठा।
क्या आप जानते हैं कि हिंदू धर्म में धान और चावल को शुभ माना जाता है। आइए जानते हैं वाराणसी में मां अन्नपूर्णा को धान की बालियों से सजाने का धार्मिक महत्व और हिंदू धर्म में चावल को क्यों माना जाता है शुभ?

पहली फसल की धान की बालियां मां को अर्पित करने की परंपरा
उद्यापन पर काशी स्थित प्रसिद्ध अन्नपूर्णा मंदिर में मां के मुख्य विग्रह के साथ ही अन्य प्रतिमाओं का भी धान की बालियों से शृंगार किया गया। यह परंपरा अत्यंत पवित्र और शुभ मानी जाती है। पूर्वांचल के किसान अपनी नई फसल की पहली धान की बाली माता के चरणों में अर्पित करते हैं, ताकि सालभर अन्न, धन और खुशहाली बनी रहे। यह अर्पण न केवल कृतज्ञता का प्रतीक है, बल्कि प्रकृति और कृषि संस्कृति के प्रति सम्मान का भाव भी व्यक्त करता है।
फोटो हुई वायरल
वाराणसी के अन्नपूर्णा मंदिर में धान की बालियों से पूरे मंदिर को और देवी-देवताओं की मूर्ती को सजाया गया। ये दृश्य बहुत ही मनमोहक लग रहा था और दूर-दूर से लोग इस नजारे को देखने आए। सोशल मीडिया पर इनकी फोटो और वीडियो वायरल हो रही हैं।
17 दिन का अत्यंत कठिन अनुष्ठान
मां अन्नपूर्णा का यह व्रत धार्मिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण और कठिन माना जाता है। इस व्रत के नियम में भक्त 17 गांठों वाला धागा धारण करते हैं, व्रत के दौरान लगातार 17 दिन तक केवल एक समय फलाहार, वह भी बिना नमक, ग्रहण किया जाता है और व्रत के अंत यानी उद्यापन के दिन मां अन्नपूर्णा को धान की बालियां अर्पित की जाती हैं। मान्यता है कि यह व्रत करने से घर में अन्न का कभी अभाव नहीं होता और जीवन में समृद्धि तथा शांति का वास होता है।
धान और चावल को लेकर क्या है धार्मिक मान्यता
हिन्दू मान्यताओं के अनुसार मां अन्नपूर्णा संसार को अन्न प्रदान करने वाली देवी हैं। जहां धान की बालियां समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक हैं, वहीं उन्हें माता के चरणों में अर्पित करने का अर्थ है कृतज्ञता, आस्था और अन्न का सम्मान करना है। आपने देखा होगा कि हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य में अखंडित अक्षत (साबूत चावल) को जरूर रखा जाता है। बता दें कि अक्षत और धान सम्मान और खुशहाली का प्रतीक हैं।



Click it and Unblock the Notifications
