Muharram 2023: इस साल कब से मनाया जाएगा मुहर्रम? क्यों कहते हैं इसे गम का महीना? जानिए इसका इतिहास

Muharram 2023: इस्लाम धर्म में मुहर्रम का महीना इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना होता है, इसे इस्लामिक न्यू ईयर भी कहते हैं, लेकिन ये महीना गम का महीना होता है। इसको पूरी दुनिया के मुसलमान बेहस अहम तरीके से देखते हैं। मुहर्रम का महीना लूनर कैलेंडर के अनुसार, चांद दिखने के बाद शुरू होता है। इस महीने के शुरूआती दस दिन बहुत ही खास होते हैं। मुहर्रम का 10वें दिन को आशूरा कहते हैं।

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आइए जानते हैं कि मुहर्रम का इतिहास, महत्व और साल 2023 में ये कब पड़ रहा है-
मुहर्रम पूरे भारत में मुस्लिम समुदाय एक गम के महीने के रूप में मनाते हैं। लेकिन ये इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना है। पूरे दुनिया के मुसलमान पैगंबर हजरत मुहम्मद ( ﷺ) के नाती हजरत हुसैन इब्न अली की शहादत के तौर पर मनाते हैं। महीने के शुरूआती 10 दिनों में कर्बला की लड़ाई हुई थी, जिसमें इमाम हुसैन के पूरे परिवार को शहीद कर दिया गया था, उनको तकलीफें दी गई थी। यजीद जो अपने आप को खलीफा कहलाता था, उस पर बैत करने से मना कर दिया था। जिससे नाराज होकर यजीद ने इमाम हुसैन अलैहिस्साम और उनके पूरे परिवार का पानी बंद कर दिया था और उनके खिलाफ लड़ाई शुरू कर दी थी। 680 ई. में आशूरा के दिन कर्बला की लड़ाई हुई थी, इस लड़ाई में इमाम साहब के पूरे परिवार का बेरहमी के साथ कत्ल कर दिया था, साथ ही इमाम हुसैन अलैहिस्सालाम का सिर मुबारक शहीद कर दिया गया था।

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इसके साथ ही पैगंबर मूसा अलैहिस्सलाम ने लाल सागर के बीच से रास्ता बनाकर यहूदी जो उनके अनुयाई थे, मुहर्रम के 10वें दिन मिस्र के फिरौन और उसकी सेना से बचाकर पार करवाया था और उस पर जीत हासिल की थी।

इस्लाम के मुताबिक ये भी कहा जाता है कि आदम और हव्वा को अल्लाह पाक ने इस पाक महीने के 10वें दिन बनाया था।

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पूरे भारत में मुहर्रम मनाया जाता है
मुहर्रम में ताजिया का जुलूस भी निकाला जाता है। जुलूस निकालकर मुसलमान इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हैं।

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कब है मुहर्रम 2023 (Muharram 2023 Date)
इस साल मुहर्रम का महीना 20 जुलाई या 21 जुलाई से शुरू हो सकता है। मोहर्रम महीने का चांद 19 या फिर 20 जुलाई 2023 को देखा जा सकता है। मुहर्रम के दसवें दिन 28 या 29 जुलाई को आशूरा पड़ सकता है।
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इसे मुहर्रम उल हराम क्यों कहते है?
मुहर्रम के महीने को इस्लाम धर्म में बहुत ही पाक महीना माना जाता है। इसलिए इस महीने में किसी तरह की लड़ाई या युद्ध शुरू नहीं किया जाता है। इसे गम का महीना कहते हैं, इस महीने में मुसलमान कोई नया काम, नये कपड़े, नई चीजे नहीं खरीदते हैं।

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