Nag Panchami 2025: शिवलिंग पर चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा क्यों चढ़ाते हैं? जानिए धार्मिक महत्व और फायदे

सावन या श्रावण का महीना भगवान शिव की आराधना का पवित्र समय होता है। इस महीने में भक्त पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ शिवलिंग का पूजन करते हैं और विशेष उपायों को अपनाते हैं, जिससे उन्हें शिवजी की कृपा प्राप्त हो सके। सावन के महीने में शिवलिंग पर चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा चढ़ाना एक ऐसा ही महत्वपूर्ण और फलदायी धार्मिक उपाय माना गया है।

Benefits of Offering a Silver Nag-Nagin Pair on Shivling

चांदी के नाग-नागिन का धार्मिक महत्व

भगवान शिव के पवित्र प्रतीकों में नाग का विशेष स्थान है। शिवजी ने सर्प को अपने गले में आभूषण की तरह धारण किया है, जो उनके नियंत्रण, निर्भयता और ब्रह्मांडीय शक्तियों का प्रतीक माना जाता है। इसीलिए नाग पंचमी, सावन सोमवार या शिवरात्रि जैसे पावन दिनों पर शिवलिंग पर नाग-नागिन का चढ़ाया जाना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।

क्या मिलते हैं लाभ?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शिवलिंग पर चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा चढ़ाने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है। साथ ही यह उपाय ग्रह दोषों को शांत करता है और जीवन में आने वाले कष्टों से सुरक्षा प्रदान करता है। इसे करने से दैवीय आशीर्वाद, धन-समृद्धि, और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।

शिवलिंग पर नाग-नागिन कैसे चढ़ाएं? संपूर्ण विधि

सामग्री एकत्र करें

चांदी या तांबे का नाग-नागिन जोड़ा, दूध, जल, दही, घी, शहद, और पुष्प आदि सामग्री लेकर किसी पवित्र शिव मंदिर जाएं।

सही दिन का चुनाव

आप सावन के किसी भी दिन यह उपाय कर सकते हैं, लेकिन श्रावण सोमवार, नाग पंचमी, या महाशिवरात्रि जैसे दिन विशेष फलदायी माने जाते हैं।

शिवलिंग का अभिषेक करें

मंदिर पहुंचकर सबसे पहले शिवलिंग को जल, दूध, दही, घी और शहद से स्नान कराएं। यह प्रक्रिया शिवलिंग को शुद्ध और पवित्र करने के लिए होती है।

नाग-नागिन स्थापित करें

अब चांदी या तांबे के नाग-नागिन के जोड़े को धीरे-धीरे शिवलिंग के ऊपर रखें। यह करते समय मन में भगवान शिव के प्रति श्रद्धा और भक्ति होनी चाहिए।

मंत्र जाप करें

नाग-नागिन स्थापित करते समय कम से कम 11 बार "ॐ नमः शिवाय" या "ॐ नागेन्द्रहाराय नमः" मंत्र का जाप करें। यदि संभव हो तो 108 बार जाप करना अधिक उत्तम रहेगा।

स्थापना के बाद क्या करें

पूजन के बाद नाग-नागिन के जोड़े को आप मंदिर में ही छोड़ सकते हैं या फिर उसे अपने घर के पूजा स्थल या तिजोरी में स्थापित कर सकते हैं। यह शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

Story first published: Monday, July 28, 2025, 15:10 [IST]
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