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Narak Chaturdashi 2024: नरक चतुर्दशी पर क्यों किया जाता है अभ्यंग स्नान, जानें इस साल रूप चौदस की तिथि
Narak Chaturdashi 2024 Kab Hai: नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली या रूप चौदस भी कहा जाता है और यह दीपावली से एक दिन पहले मनाई जाती है। वर्ष 2024 में यह पर्व 31 अक्टूबर को मनाया जाएगा।
इस दिन का धार्मिक महत्व है और इसे विशेष रूप से भगवान श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर के वध से जोड़ा जाता है। आइए इस पर्व के महत्व और अभ्यंग स्नान के बारे में विस्तार से जानते हैं।

तिथि और मुहूर्त (Narak Chaturdashi 2024)
इस वर्ष, नरक चतुर्दशी की तिथि 30 अक्टूबर की दोपहर 1:15 बजे से शुरू होकर 31 अक्टूबर को दोपहर 3:52 बजे तक रहेगी। अभ्यंग स्नान का शुभ मुहूर्त 31 अक्टूबर को सुबह 5:20 से 6:32 बजे तक रहेगा।
अभ्यंग स्नान क्या होता है? (Abhyang Snan Kya Hota Hai?)
अभ्यंग स्नान एक विशेष प्रकार का स्नान है जिसे धार्मिक और आयुर्वेदिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे विशेष रूप से नरक चतुर्दशी और अन्य त्योहारों के दिन किया जाता है। अभ्यंग स्नान का मुख्य उद्देश्य शरीर और मन को शुद्ध करना होता है। इस स्नान में व्यक्ति अपने पूरे शरीर पर उबटन या तेल का प्रयोग करता है, जो त्वचा को निखारने के साथ-साथ शरीर से थकान और विषाक्त पदार्थों को भी बाहर निकालने में मदद करता है।
इस दिन तिल का तेल या औषधीय तेल का उपयोग करके स्नान किया जाता है, जो न केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए बल्कि मानसिक शांति के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। इसके बाद स्नान करने से व्यक्ति दिनभर ऊर्जावान महसूस करता है।
अभ्यंग स्नान का महत्व (Significance of Abhyang Snan)
नरक चतुर्दशी के दिन अभ्यंग स्नान करने की परंपरा है। इसे शुभ माना जाता है और इसका उद्देश्य नकारात्मक ऊर्जा और रोगों को दूर करना होता है। इस दिन सुबह उबटन लगाकर स्नान किया जाता है, जिससे शरीर और मन शुद्ध हो जाते हैं। माना जाता है कि इस दिन स्नान करने से स्वास्थ्य लाभ और सुंदरता मिलती है।
नरक चतुर्दशी की कथा (Narak Chaturdashi Kyu Manate Hain?)
इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने राक्षस नरकासुर का वध किया था, जिसने देवी-देवताओं और 16,100 कन्याओं को बंधक बना रखा था। नरकासुर को यह श्राप था कि वह एक स्त्री के हाथों मरेगा, इसलिए भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा की मदद से उसका वध किया। नरकासुर के मारे जाने के बाद, कन्याओं को स्वतंत्र किया गया और इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाने लगा। इस कारण इसे नरक चतुर्दशी कहा जाता है।
नरक चतुर्दशी का पर्व हमें यह सिखाता है कि बुराई का अंत अवश्य होता है और अच्छाई की जीत होती है। इस दिन की धार्मिक परंपराओं का पालन करके हम भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त कर सकते हैं और अपने जीवन में सुख-समृद्धि ला सकते हैं।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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