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Navratri 2024: नवरात्रि के समापन के बाद उगे हुए ज्वारे का क्या करें?
Navratri Ke Baad Jaware Ka Kya Kare: सनातन धर्म में नवरात्रि के प्रथम दिन कलश स्थापना के समय जवारा या जौ बोने का विधान है। 9 दिनों तक उन्हें सींचा जाता है और देखभाल की जाती है ताकि ज्वारा सही तरीके से उगे।
नवरात्रि के पावन पर्व पर हरे भरे ज्वारे को सुख, शांति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। ज्वारे को आने वाली फसल से भी जोड़कर देखा जाता है। नवरात्र के पश्चात कई लोग ज्वारों को पवित्र नदी या जलाशय में प्रवाहित कर देते हैं या इधर-उधर रख देते हैं।

अगर आप भी नवरात्रि के पावन पर्व पर ज्वार बोते हैं तो आपके मन में भी सवाल होगा कि नवरात्रि समाप्त होने के पश्चात ज्वारे का क्या करना चाहिए। तो आईए इस बारे में विस्तार पूर्वक जानते हैं।
Navratri Ke Baad Jaware Ka Kya Kare
नवरात्रि पूजन के समाप्ति के पश्चात ज्वार को मिट्टी के बर्तन से बाहर निकालना चाहिए। कुछ ज्वार को पूजा स्थल पर रख दें। कुछ ज्वार को अपनी अलमारी या तिजोरी में लाल वस्त्र में बांधकर रख दें। इसके अलावा एक या दो ज्वार को अपने पर्स में भी हमेशा पास में रखें। मान्यता है ऐसा करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है और जीवन में खुशहाली और आर्थिक स्थिति में संपन्नता का आगमन होता है।
अगर आप कोई भी कारोबार या बिजनेस कर रहे हैं तो आप अपने मुख्य ऑफिस में दो-चार ज्वार रख सकते हैं। इससे आपके बिजनेस में कभी नुकसान की स्थिति पैदा नहीं होगी। इसके पश्चात बाकी बचे ज्वार को पवित्र नदी या जलाशय में प्रवाहित कर दें।
संसार का पहला अनाज माना गया है जौ
सनातन धर्म ग्रंथो में जौ को ब्रह्म स्वरूप माना गया है। सृष्टि के प्रारंभ में स्वयं भगवान ब्रह्मा जी ने जौ की उत्पत्ति की थी। यही वजह है कि इसे संसार का प्रथम अनाज माना जाता है। नवरात्रि के पावन पर्व पर भक्त मां दुर्गा की प्रतिमा के समक्ष जौ बोकर आने वाली अच्छी फसल के लिए कामना करते हैं।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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