Latest Updates
-
Ram Navami 2026 Sanskrit Wishes: 'अस्तु शुभं रामनवमी', अपनों को भेजें ये खास संस्कृत श्लोक और संदेश -
Navratri Day 8: नवरात्रि के आठवें दिन करें मां महागौरी की पूजा, जानें पूजा विधि, मंत्र, भोग और आरती -
अष्टमी-नवमी पर कन्याओं के लिए 15 मिनट में तैयार करें भोग की थाली, नोट करें परफेक्ट हलवा-चना रेसिपी -
Durga Ashtami 2026 Wishes: मां दुर्गा का आशीर्वाद मिले...दुर्गा अष्टमी पर प्रियजनों को भेजें ये शुभकामना संदेश -
Durga Ashtami Sanskrit Wishes: दुर्गा अष्टमी के पावन मौके पर अपने प्रियजनों को भेजें ये संस्कृत संदेश -
Aaj Ka Rashifal 26 March 2026: आज दुर्गा अष्टमी और शुक्र गोचर का महासंयोग, जानें मेष से मीन तक का राशिफल -
Bank Holidays March 2026: अगले 4 दिन बंद रहेंगे बैंक, राम नवमी पर कहां-कहां रहेगी छुट्टी? देखें पूरी लिस्ट -
कौन हैं अनन्या बिड़ला? RCB के बिकने के बाद सोशल मीडिया पर छाईं, जानिए उनकी नेट वर्थ -
गैस, ब्लोटिंग और एसिडिटी की समस्या से रहते हैं परेशान तो करें ये 5 योगासन, पाचन तंत्र होगा मजबूत -
Chaitra Navratri 2026 Havan: अष्टमी या नवमी पर हवन कैसे करें? जानें हवन विधि, मंत्र, मुहूर्त और सामग्री
Onam 2025: कौन थे राजा बलि और क्यों लौटते हैं धरती पर हर साल? जानें ओणम पर्व से जुड़ी पौराणिक कथा
Story of King Mahabali and Lord Vishnu : दक्षिण भारत का सबसे बड़ा और भव्य त्योहार ओणम (Onam) इस वर्ष 5 सितंबर 2025 को मनाया जाएगा। यह पर्व केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामाजिक रूप से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। ओणम का संबंध राक्षसों के राजा महाबली से है, जिनके शासनकाल को स्वर्णयुग कहा जाता है। मान्यता है कि इस अवधि में प्रजा सुखी और समृद्ध थी।

ओणम का महत्व
ओणम मुख्य रूप से केरल का त्योहार है, लेकिन आज यह विश्वभर में केरलवासियों द्वारा बड़े उत्साह से मनाया जाता है। यह फसल कटाई का पर्व है और साथ ही राजा महाबली के धरती पर आगमन की स्मृति में मनाया जाता है। मान्यता है कि महाबली वर्ष में एक बार पाताल से धरती पर आते हैं और अपनी प्रजा से मिलते हैं।
ओणम 2025 कैलेंडर
ओणम उत्सव लगभग 12 दिनों तक चलता है, जिसकी शुरुआत 26 अगस्त 2025 को अथ्थाचमयम से होगी और समापन 7 सितंबर 2025 को चथयम दिवस पर होगा। मुख्य ओणम दिवस थिरुवोणम है, जो इस साल 5 सितंबर को है। इन दिनों के दौरान केरल में जगह-जगह पर विशेष आयोजन होते हैं, जैसे पुक्कलम (फूलों की रंगोली), वल्लम कली (नौका दौड़), पुलीकली (टाइगर डांस) और ओणम साद्य (भव्य भोज)।
राजा महाबली और वामन अवतार की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, असुरों के राजा महाबली बहुत पराक्रमी, दानवीर और अपनी प्रजा से प्रेम करने वाले शासक थे। उनके राज्य में किसी प्रकार का दुख या अभाव नहीं था। महाबली के प्रभाव से देवता भी भयभीत हो गए। तब भगवान विष्णु ने महाबली के घमंड को तोड़ने और धर्म की स्थापना के लिए वामन अवतार लिया।
वामन अवतार में भगवान एक बौने ब्राह्मण के रूप में राजा महाबली के पास पहुंचे और दान स्वरूप तीन पग भूमि मांगी। महाबली ने सहर्ष स्वीकार किया। पहले पग में भगवान विष्णु ने पूरी पृथ्वी नाप ली, दूसरे पग में पूरा ब्रह्मांड। तीसरे पग के लिए जब स्थान नहीं बचा तो राजा महाबली ने विनम्रता से अपना सिर आगे कर दिया। भगवान विष्णु ने प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद दिया कि वे वर्ष में एक बार धरती पर आकर अपनी प्रजा से मिल सकते हैं।
ओणम के दौरान परंपराएं
ओणम का त्यौहार राजा महाबली के इसी आगमन की स्मृति में मनाया जाता है।
घर की सजावट : लोग घरों की सफाई करके आंगन में फूलों से सुंदर पुक्कलम (रंगोली) बनाते हैं।
पारंपरिक भोज : ओणम का सबसे खास आकर्षण है ओणम साद्य, जिसमें केले के पत्ते पर 20 से 26 तरह के व्यंजन परोसे जाते हैं।
खेल और नृत्य : इस दौरान पारंपरिक खेल और नृत्य जैसे पुलीकली, कैकोट्टीकली और वल्लम कली आयोजित किए जाते हैं।
धार्मिक पूजा : पूजा में भगवान विष्णु के वामन अवतार और राजा महाबली दोनों की स्मृति का सम्मान किया जाता है।
असुर राजा की पूजा क्यों?
आमतौर पर त्योहारों पर देवताओं की पूजा होती है, लेकिन ओणम का अनोखा पक्ष यही है कि इसमें असुर राजा महाबली की भी पूजा की जाती है। महाबली की महानता, दानशीलता और प्रजाप्रेम ने उन्हें लोगों के दिलों में अमर बना दिया। यही कारण है कि आज भी लोग उन्हें याद करते हैं और उनकी स्मृति में यह पर्व मनाते हैं।



Click it and Unblock the Notifications











