Latest Updates
-
IND vs SL 2nd Test: कोलंबो में सीरीज जीत की दहलीज पर भारत, बारिश और पिच का क्या है हाल? -
Varalakshmi Vrat Katha: वरलक्ष्मी व्रत के दिन जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, धन से जुड़ी बाधाएं होंगी दूर -
Varalakshmi Vrat 2026 Wishes: मां लक्ष्मी का आशीर्वाद...वरलक्ष्मी व्रत पर प्रियजनों को भेजें ये शुभकामना संदेश -
Rakhi Gift Ideas For Sister: इस रक्षाबंधन बहन को दें ये 7 प्यार भरे तोहफे, देखते ही खुशी से झूम उठेगी -
World Mosquito Day 2026: मच्छरों के काटने से हो सकती हैं ये खतरनाक बीमारियां, बचाव के लिए अपनाएं ये घरेलू उपाय -
पुरूषों को स्पर्म काउंट बढ़ाने के लिए खानी चाहिए ये 7 चीजें, फर्टिलिटी में होगा सुधार -
घर में अचानक कॉकरोच निकलना शुभ या अशुभ? जानें ज्योतिष और वास्तु के संकेत -
40 की उम्र में भी नजर आएंगी 20 की, हेल्दी और ग्लोइंग स्किन के लिए डाइट में शामिल करें ये 7 फूड्स -
September Travel Destinations: सितंबर में घूमने के लिए बेस्ट हैं ये भारत की ये 7 खूबसूरत जगहें, मिलेगा यादगार -
World Photography Day 2026: क्यों मनाया जाता है विश्व फोटोग्राफी दिवस? जानें इस दिन का इतिहास, महत्व और थीम
Onam 2025: कौन थे राजा बलि और क्यों लौटते हैं धरती पर हर साल? जानें ओणम पर्व से जुड़ी पौराणिक कथा
Story of King Mahabali and Lord Vishnu : दक्षिण भारत का सबसे बड़ा और भव्य त्योहार ओणम (Onam) इस वर्ष 5 सितंबर 2025 को मनाया जाएगा। यह पर्व केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामाजिक रूप से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। ओणम का संबंध राक्षसों के राजा महाबली से है, जिनके शासनकाल को स्वर्णयुग कहा जाता है। मान्यता है कि इस अवधि में प्रजा सुखी और समृद्ध थी।

ओणम का महत्व
ओणम मुख्य रूप से केरल का त्योहार है, लेकिन आज यह विश्वभर में केरलवासियों द्वारा बड़े उत्साह से मनाया जाता है। यह फसल कटाई का पर्व है और साथ ही राजा महाबली के धरती पर आगमन की स्मृति में मनाया जाता है। मान्यता है कि महाबली वर्ष में एक बार पाताल से धरती पर आते हैं और अपनी प्रजा से मिलते हैं।
ओणम 2025 कैलेंडर
ओणम उत्सव लगभग 12 दिनों तक चलता है, जिसकी शुरुआत 26 अगस्त 2025 को अथ्थाचमयम से होगी और समापन 7 सितंबर 2025 को चथयम दिवस पर होगा। मुख्य ओणम दिवस थिरुवोणम है, जो इस साल 5 सितंबर को है। इन दिनों के दौरान केरल में जगह-जगह पर विशेष आयोजन होते हैं, जैसे पुक्कलम (फूलों की रंगोली), वल्लम कली (नौका दौड़), पुलीकली (टाइगर डांस) और ओणम साद्य (भव्य भोज)।
राजा महाबली और वामन अवतार की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, असुरों के राजा महाबली बहुत पराक्रमी, दानवीर और अपनी प्रजा से प्रेम करने वाले शासक थे। उनके राज्य में किसी प्रकार का दुख या अभाव नहीं था। महाबली के प्रभाव से देवता भी भयभीत हो गए। तब भगवान विष्णु ने महाबली के घमंड को तोड़ने और धर्म की स्थापना के लिए वामन अवतार लिया।
वामन अवतार में भगवान एक बौने ब्राह्मण के रूप में राजा महाबली के पास पहुंचे और दान स्वरूप तीन पग भूमि मांगी। महाबली ने सहर्ष स्वीकार किया। पहले पग में भगवान विष्णु ने पूरी पृथ्वी नाप ली, दूसरे पग में पूरा ब्रह्मांड। तीसरे पग के लिए जब स्थान नहीं बचा तो राजा महाबली ने विनम्रता से अपना सिर आगे कर दिया। भगवान विष्णु ने प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद दिया कि वे वर्ष में एक बार धरती पर आकर अपनी प्रजा से मिल सकते हैं।
ओणम के दौरान परंपराएं
ओणम का त्यौहार राजा महाबली के इसी आगमन की स्मृति में मनाया जाता है।
घर की सजावट : लोग घरों की सफाई करके आंगन में फूलों से सुंदर पुक्कलम (रंगोली) बनाते हैं।
पारंपरिक भोज : ओणम का सबसे खास आकर्षण है ओणम साद्य, जिसमें केले के पत्ते पर 20 से 26 तरह के व्यंजन परोसे जाते हैं।
खेल और नृत्य : इस दौरान पारंपरिक खेल और नृत्य जैसे पुलीकली, कैकोट्टीकली और वल्लम कली आयोजित किए जाते हैं।
धार्मिक पूजा : पूजा में भगवान विष्णु के वामन अवतार और राजा महाबली दोनों की स्मृति का सम्मान किया जाता है।
असुर राजा की पूजा क्यों?
आमतौर पर त्योहारों पर देवताओं की पूजा होती है, लेकिन ओणम का अनोखा पक्ष यही है कि इसमें असुर राजा महाबली की भी पूजा की जाती है। महाबली की महानता, दानशीलता और प्रजाप्रेम ने उन्हें लोगों के दिलों में अमर बना दिया। यही कारण है कि आज भी लोग उन्हें याद करते हैं और उनकी स्मृति में यह पर्व मनाते हैं।



Click it and Unblock the Notifications