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Pana Sankranti 2026: आज ओडिशा में मनाई जा रही है पना संक्रांति, जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि
Pana Sankranti 2026: पना संक्रांति का त्योहार ओडिशा में बड़े उत्साह और परंपरा के साथ मनाया जाता है। साल 2026 में यह पर्व 14 अप्रैल को मनाया जाएगा, जो ओड़िया नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक भी है। इस दिन लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं और नए साल का स्वागत बेहद खुशी से करते हैं। इस मौके पर खासतौर पर ठंडक देने वाले पेय तैयार किए जाते हैं, जिन्हें 'पना' कहा जाता है। इसे दही, सत्तू, बेल का गूदा, गुड़ और फल मिलाकर बनाया जाता है, जिसे भगवान को अर्पित करने के बाद प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। दिलचस्प बात यह है कि यही पर्व देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। उत्तर भारत में इसे बैसाखी, केरल में विशु, तमिलनाडु में पुथांडु और असम में बिहू के रूप में मनाया जाता है। इस तरह यह दिन पूरे देश में अलग-अलग परंपराओं के साथ नई शुरुआत और खुशियों का संदेश देता है।

पना संक्रांति 2026 का शुभ मुहूर्त
साल 2026 में पना संक्रांति 14 अप्रैल, मंगलवार को मनाई जाएगी। इस दिन सूर्यदेव मेष राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे संक्रांति का मुख्य क्षण माना जाता है। इस अवधि में स्नान, दान और पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस समय किए गए शुभ कार्यों से जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता आती है।
सूर्य प्रवेश (संक्रांति क्षण): सुबह लगभग 9:31 बजे
पणा संक्रांति का प्रमुख क्षण: करीब 9:39 बजे
महा पुण्य काल: सुबह 7:33 बजे से 11:44 बजे तक
पुण्य काल: सुबह 6:22 बजे से दोपहर 1:50 बजे तक
पना संक्रांति का महत्व
पना संक्रांति को सौर नववर्ष की शुरुआत के रूप में देखा जाता है, इसलिए इसका धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व काफी खास होता है। ओडिशा की परंपराओं के अनुसार, इसी दिन भगवान हनुमान का जन्म हुआ माना जाता है, इसलिए यहां पना संक्रांति के साथ-साथ हनुमान जयंती भी श्रद्धा के साथ मनाई जाती है।
ज्योतिष दृष्टि से यह समय भी खास माना जाता है, क्योंकि इस दिन सूर्यदेव उत्तरायण के अपने सफर का महत्वपूर्ण पड़ाव पार करते हैं। ऐसे में, इसे ऊर्जा और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। अन्य संक्रांतियों की तरह इस दिन भी स्नान और दान का विशेष महत्व बताया गया है। लोग पवित्र नदियों में स्नान करते हैं, पितरों का तर्पण करते हैं और भगवान विष्णु के मधुसूदन रूप की पूजा करते हैं। मान्यता है कि इस दिन किए गए पुण्य कर्म जीवन में सुख-शांति और समृद्धि लेकर आते हैं।
पना संक्रांति पर क्या करते हैं?
पना संक्रांति के दिन भगवान सूर्य की पूजा को बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन सुबह स्नान के बाद सूर्यदेव को अर्घ्य दिया जाता है और उनकी कृपा पाने की कामना की जाती है। मान्यता है कि सूर्य की उपासना से जीवन में ऊर्जा, सम्मान और सकारात्मकता बढ़ती है। इसलिए लोग इस दिन खास तौर पर सूर्य पूजा को अपनी दिनचर्या में शामिल करते हैं।
पना संक्रांति पर दान का महत्व
मेष संक्रांति के अवसर पर दान-पुण्य करना भी बहुत फलदायी माना जाता है। कहा जाता है कि इस दिन जरूरतमंदों को अन्न, जल या अन्य चीजों का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और सूर्यदेव की कृपा बनी रहती है। परंपरा के अनुसार, दान करने से पहले पवित्र नदी में स्नान करना शुभ माना गया है। हालांकि, अगर ऐसा संभव न हो, तो घर पर स्नान करते समय पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करना भी कर सकते हैं।
पना संक्रांति की पूजा विधि
पना संक्रांति के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। ओडिशा में इस दिन पवित्र नदी में स्नान को बहुत शुभ माना जाता ह।
स्नान के बाद घर के आंगन में तुलसी के पौधे के ऊपर एक छोटा मिट्टी का बर्तन टांगा जाता है, जिसमें छोटा सा छेद किया जाता है, ताकि पानी की बूंदें लगातार तुलसी पर गिरती रहें। इसे गर्मी में जीवन और शीतलता का प्रतीक माना जाता है।
इस दिन खास पना पेय बनाया जाता है, जिसमें गुड़, दही, छैना, केला और बेल का फल मिलाया जाता है। इसे भगवान जगन्नाथ और तुलसी माता को अर्पित किया जाता है।
पना संक्रांति के मौके पर हनुमान जयंती भी मनाई जाती है, इसलिए हनुमान चालीसा का पाठ करना और मंदिर जाकर दर्शन करना शुभ माना जाता है।
अंत में सूर्यदेव को अर्घ्य देना जरूरी माना जाता है, जिससे जीवन में ऊर्जा और सकारात्मकता बनी रहती है।
इस तरह पूरे दिन श्रद्धा और सादगी के साथ पूजा करने से सुख-शांति और समृद्धि की कामना की जाती है।



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