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Papankusha Ekadashi Vrat Katha: पापांकुशा एकादशी पर इस कथा को पढ़ने से मिलता है 1000 अश्वमेध यज्ञ बराबर पुण्य
Papankusha Ekadashi 2025 Katha Aarti: पापांकुशा एकादशी, हर वर्ष आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है और इसे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ दिन माना जाता है। आज यानी 3 अक्टूबर दिन शुक्रवार को पापांकुशा एकादशी मनाई जा रही है। शास्त्रों में वर्णन है कि इस व्रत के प्रभाव से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं और भक्त को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन व्रत करने से व्यक्ति को वैकुण्ठधाम की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। पौराणिक कथा के अनुसार, इस व्रत का महत्व इतना है कि मात्र इसके स्मरण मात्र से भी पाप कट जाते हैं और भगवान विष्णु अपने भक्त की सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं।
इस व्रत में उपवास, पूजा-पाठ, कथा श्रवण और आरती का विशेष महत्व है। मान्यता है कि जो श्रद्धा और विश्वास से पापांकुशा एकादशी का व्रत करता है, उसके जीवन में सुख-समृद्धि, शांति और सदैव भगवान विष्णु का आशीर्वाद बना रहता है।

पापांकुशा एकादशी व्रत कथा
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार एक समय युधिष्ठिर महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा -हे जनार्दन! कृपया मुझे आश्विन शुक्ल पक्ष की एकादशी का नाम, उसका महत्व और उसकी कथा बताइए। तब भगवान श्रीकृष्ण ने कहा - राजन्! यह एकादशी पापांकुशा एकादशी के नाम से जानी जाती है। इसका व्रत करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और मनुष्य विष्णु लोक को प्राप्त होता है। इस व्रत का फल हजारों अश्वमेध यज्ञ और सैकड़ों वाजपेय यज्ञ के बराबर माना गया है। भगवान विष्णु ने आगे कहा -जो मनुष्य इस एकादशी का व्रत करता है, उसे नरक के कष्ट नहीं भोगने पड़ते। यह व्रत मनुष्य को यमराज के भय से मुक्त कर देता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति कराता है। इस व्रत का पालन करने वाला व्यक्ति पुण्यात्मा होकर विष्णु धाम को जाता है। पापांकुशा एकादशी का व्रत करने से मनुष्य सभी तरह के दोषों और पापों से मुक्त होकर सात्विक जीवन जीता है। इसके प्रभाव से मनुष्य को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष - चारों पुरुषार्थ की प्राप्ति होती है।
पापांकुशा एकादशी व्रत का महत्व
इस व्रत का पालन करने से जीवन के समस्त कष्ट दूर होते हैं।
भगवान विष्णु अपने भक्त की मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं।
इस दिन कथा श्रवण, आरती और दान का विशेष फल मिलता है।
मृत्यु के बाद व्रती को विष्णु लोक की प्राप्ति होती है।
परंपरा है कि कथा के अंत में "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप और विष्णुजी की आरती अवश्य करनी चाहिए।
पापांकुशा एकादशी व्रत की पूजा विधि
प्रातःकाल स्नान करके व्रत का संकल्प लें।
घर को स्वच्छ करके भगवान विष्णु का पूजन करें।
विष्णुजी की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक जलाएं और फूल, तुलसी दल, चंदन और धूप अर्पित करें।
पूरे दिन व्रत रखें, फलाहार या निर्जल उपवास कर सकते हैं।
पापांकुशा एकादशी की कथा सुनें और श्रवण करवाएं।
दिनभर "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें।
शाम को आरती करें और गरीबों को दान दें।
अगले दिन द्वादशी तिथि पर ब्राह्मण को भोजन कराकर व्रत का पारण करें।
श्री विष्णु जी की आरती
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ ॐ जय...॥
जो ध्यावे फल पावे, दुख बिनसे मन का।
स्वामी दुख बिनसे मन का, सुख सम्पत्ति घर आवे,
कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय...॥
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी।
स्वामी शरण गहूँ मैं किसकी, तुम बिन और न दूजा,
आस करूँ मैं जिसकी॥ ॐ जय...॥
तुम पूरन परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
स्वामी तुम अन्तर्यामी, पारब्रह्म परमेश्वर,
तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय...॥
तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता।
स्वामी पालनकर्ता, मैं मूरख खल कामी,
कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय...॥
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
स्वामी सबके प्राणपति, किस विधि मिलूँ दयामय,
तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय...॥
दीन-बन्धु दुख-हर्ता, ठकुर तुम मेरे।
स्वामी ठकुर तुम मेरे, अपने हाथ उठाओ,
द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय...॥
विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
स्वामी पाप हरो देवा, श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ,
संतन की सेवा॥ ॐ जय...॥
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ ॐ जय...॥



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