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Pitru Paksha 2023: बिहार का गया कैसे बन गया पितृ तीर्थ जो पिंडदान के लिए है सर्वोपरि स्थल?
Importance of Gaya during Pitru Paksha: हिन्दू धर्म के अनुसार पितरों को भी देव तुल्य माना गया है। अगर पितृ प्रसन्न ना हों तो संतान पर पितृ दोष रहता है जिससे संतान सुखी नहीं रहते हैं। ऐसे में पितृ दोष निवारण करना आवश्यक है।
मनुष्य का शरीर मरने के बाद पंचतत्व में विलीन हो जाता है किन्तु आत्मा अमर है वो मरती नहीं। आत्मा को मोक्ष पाना होता है, नहीं तो वो भटकती रहती है। महाभारत के अनुशासन पर्व में पितामह भीष्म ने पितृ दोष निवारण और पितरों की शांति के लिए श्राद्ध करने का उल्लेख किया है।

देव तुल्य पितरों को शांति और मोक्ष प्रदान करने के लिए ही श्राद्ध, तर्पण और पिंड दान किया जाता है। वैसे तो देश में कुल 55 ऐसे स्थान चिन्हित किये गए हैं जहां पिंड दान किया जाता है किन्तु बिहार के गया में पिंड दान का सबसे ज्यादा महत्व है। इसके पीछे भी कारण है।
पिंडदान के लिए गया की महत्ता
रामायण की कथा के अनुसार दशरथ पुत्र राम जब अपनी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ चौदह वर्ष के वनवास पर निकल पड़ते हैं तो कुछ समय बाद उन्हें ज्ञात होता है कि राजा दशरथ की मृत्यु हो गयी है। अब राम वापस अयोध्या लौट नहीं सकते थे क्योंकि उन्होंने अपने पिता के वचन को पूरा करने के लिए चौदह वर्ष का वनवास स्वीकार किया था।

शास्त्र के अनुसार बड़ा पुत्र पिता को मुखाग्नि दे तो पिता को स्वर्ग मिलता है। राम मुखाग्नि नहीं दे पाए थे। दशरथ की आत्मा भी बेचैन थी क्योंकि मरते समय उन्हें राम का दर्शन नहीं हो पाया। ऐसे में अपने पिता की आत्मा की शान्ति के लिए राम ने बिहार के गया स्थान पर पिता दशरथ की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए पिंड दान किया। तब से यह जगह पितरों के श्राद्ध, तर्पण और पिंड दान के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाने लगा।
कहा तो यहां तक जाता है कि भगवान् विष्णु गया में पितृ देव के रूप में विराजमान है। इसलिए गया को पितृ तीर्थ भी कहा जाता है। भादो माह की पूर्णिमा तिथि से पितृ पक्ष आरम्भ हो जाता है जो अश्विन माह की अमावस्या तक चलता है। इन दिनों में अपने पितृ की शान्ति के लिए हर किसी को श्राद्ध, तर्पण और पिंड दान जरुर करना चाहिए।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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