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बिना पंडित के कैसे करें पितरों का श्राद्ध? जान लें तर्पण का सही समय और पूजा की पूरी विधि
How To Do Shradh Without Pandit: 7 सितंबर 2025 यानी आज से पितृपक्ष शुरू हो रहे हैं। ये समय पूर्वजों की आत्मा की शांति और आशीर्वाद प्राप्त करने का विशेष अवसर होता है। कहा जाता है कि इस समय हमारे पितर धरती पर आते हैं और अपने वंशजों के तर्पण, अन्नदान और श्रद्धा से तृप्त होकर आशीर्वाद देते हैं। लोग अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए इस दौरान तर्पण करते हैं परंतु अक्सर लोग सोचते हैं कि श्राद्ध और तर्पण केवल पंडित की सहायता से ही संभव है।
जबकि सच यह है कि यदि विधि और समय का ज्ञान हो तो कोई भी व्यक्ति घर पर स्वयं सरल तरीके से तर्पण कर सकता है। आज हम आपको बताने जा रहे है कि बिना पंडित के कैसे करें पितरों का श्राद्ध और किस समय करना होता है उचित?
श्राद्ध का महत्व?
हर साल पितृपक्ष आते हैं जिन्हें श्राद्ध और कनागत भी कहा जाता है। आमतौर पर 16 श्राद्ध होते हैं लेकिन कभी-कभी ये 15 भी होते हैं। इस साल भी 15 कनागत ही पड़ रहे हैं जो 7 सितंबर से शुरू होंगे और 21 सितंबर को खत्म होंगे। शास्त्रों में कहा गया है कि इस दौरान पितर धरती पर आते हैं और उनके घर के लोग उनकी आत्मा की शांति और संतुष्टि के लिए उनका तर्पण करते हैं। खुश होकर वो स्वर्गलोक को वापस जाते हैं तो अपने बच्चों को आशीर्वाद देते हैं।

बिना पंडित के कैसे करें श्राद्ध?
अक्सर लोगों का मानना है कि बिना पंडित के पितरों का श्राद्ध और तर्पण नहीं होता है। मगर ऐसा नहीं है, अगर नियम और विधि से तर्पण और पूजा की जाती है तो आम व्यक्ति भी आसानी से सही तरीके से श्राद्ध कर सकता है। सबसे पहले स्नान आदि करें और फिर साफ कपड़े पहनें। एक स्वच्छ स्थान चुनें, फिर तांबे या पीतल के लोटे में जल, दूध और काले तिल मिलाकर अपने पितरों का ध्यान करते हुसए 'ॐ पितृ देवतायै नमः' मंत्र का जाप करते हुए हाथों से जल अर्पित करें। तर्पण के बाद, अपनी क्षमता अनुसार किसी ब्राह्मण या गरीब व्यक्ति को भोजन कराएं और दान-दक्षिणा दें। गाय, कुत्ते, कौए और चींटियों को भोजन कराएं।
क्या होता है श्राद्ध का सही समय?
श्राद्ध के दौरान लोगों के मन में ये भी सवाल आता है कि तर्पण करने का सही समय किया होता है? शास्त्रों के अनुसार, तर्पण करने का सही समय 12 बजे के बाद का होता है। इससे पहले भगवान की पूजा की जाती है। हालांकि कुछ लोग ऑफिस जाने की वजह से सुबह ही श्राद्ध कर लेते हैं। मगर कहीं भी ऐसा नहीं लिखा है कि सुबह के समय किया गया श्राद्ध उचित नहीं होता है।



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