Latest Updates
-
40 की उम्र में भी नजर आएंगी 20 की, हेल्दी और ग्लोइंग स्किन के लिए डाइट में शामिल करें ये 7 फूड्स -
September Travel Destinations: सितंबर में घूमने के लिए बेस्ट हैं ये भारत की ये 7 खूबसूरत जगहें, मिलेगा यादगार -
World Photography Day 2026: क्यों मनाया जाता है विश्व फोटोग्राफी दिवस? जानें इस दिन का इतिहास, महत्व और थीम -
5 साल से तालाब में रह रहे इकबाल की मदद के लिए आगे आए अनंत अंबानी, इलाज के लिए मुंबई एयरलिफ्ट कराया -
इन 5 लोगों को भूलकर भी नहीं करना चाहिए मशरूम का सेवन, सेहत को हो सकता है गंभीर नुकसान -
Special Marriage Act क्या है? सोनाक्षी-जहीर इकबाल समेत इन बॉलीवुड कपल्स ने बिना धर्म बदले की शादी -
किन्नौर कैलाश के दर्शन के बाद बदल गई हिमांशी खुराना की जिंदगी, एक्ट्रेस ने बताया क्यों इतनी खास है यह जगह -
Raksha Bandhan 2026: कब है रक्षाबंधन? जानें तिथि, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त, भद्रा का समय और महत्व -
कभी 75 रुपये में साफ करते थे गाड़ियां, आज कहलाते हैं दिल्ली के खान सर; पढ़ें मनोज गर्ग की सक्सेस स्टोरी -
Sawan 2026: सावन में दाढ़ी और बाल कटवाना चाहिए या नहीं? जानें ज्योतिष और धार्मिक नियम
Pitru Paksha 2025: श्राद्ध में दाढ़ी, मूंछ और बाल कटवाने चाहिए या नहीं, जानिए क्या हैं नियम
Shradh Me Hair Cut Kar Sakte Hai Ya Nahi : हिंदू धर्म में पितृपक्ष का विशेष महत्व माना जाता है। हर साल भाद्रपद मास की पूर्णिमा से लेकर अश्विन मास की अमावस्या तक पितृपक्ष का समय होता है। इसे श्राद्ध पक्ष या महालय भी कहा जाता है। इस दौरान अपने पितरों को तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म करके श्रद्धांजलि दी जाती है, ताकि उनकी आत्मा को शांति और मोक्ष की प्राप्ति हो।
इस साल पितृपक्ष की शुरुआत 7 सितंबर 2025, शनिवार से होगी और यह 21 सितंबर 2025 तक चलेगा। इस बार कुल 17 दिनों तक पितरों की तृप्ति और श्राद्ध कर्म किए जा सकेंगे।
पितृ पक्ष को लेकर अक्सर लोगों के मन में यह दुविधा रहती है कि इस दौरान दाढ़ी-बाल बनवाना सही है या नहीं। कई लोग मानते हैं कि ऐसा करने से पितृ नाराज़ हो जाते हैं, इसलिए वे श्राद्ध पक्ष में न तो शेविंग करते हैं और न ही बाल या नाखून काटते हैं। हालांकि शास्त्रों में इसका कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है। यह परंपरा श्रृंगार और सजावट से परहेज की मान्यता पर आधारित है। असल मायने में यह पूरी तरह से आस्था और व्यक्तिगत श्रद्धा पर निर्भर करता है।

पितृपक्ष का महत्व
धार्मिक मान्यता है कि पितृपक्ष में हमारे पूर्वज धरती पर अपने वंशजों से तर्पण और श्राद्ध स्वीकार करने आते हैं। इस दौरान पिंडदान, तर्पण और भोजन करवाने से पितरों की आत्मा को संतोष मिलता है और वे अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं। महाभारत के अनुशासन पर्व में भीष्म पितामह ने पितृपक्ष का उल्लेख किया है और पितरों की प्रसन्नता के लिए श्राद्ध, दान और सादगीपूर्ण जीवनशैली अपनाने की सलाह दी है।
पितृपक्ष और बाल-दाढ़ी कटवाने का नियम
पितृपक्ष को शोक का समय माना जाता है। यही कारण है कि इन दिनों कई लोग बाल, दाढ़ी, मूंछ और नाखून काटने से परहेज करते हैं।
श्राद्धकर्म करने वाले लोग : शास्त्रों के अनुसार, जो व्यक्ति पितृ पक्ष में प्रतिदिन तर्पण करता है या श्राद्ध तिथि पर अपने पितरों का श्राद्ध करता है, उसके लिए दाढ़ी-मूंछ और बाल न कटवाना उचित माना गया है।
अन्य लोग : जिन लोगों की सीधी भागीदारी श्राद्धकर्म में नहीं होती, वे यदि चाहें तो बाल-दाढ़ी कटवा सकते हैं। उनके लिए कोई कठोर नियम नहीं है।
धार्मिक दृष्टि से देखा जाए तो दाढ़ी या बाल कटवाना श्रृंगार के अंतर्गत आता है। पितृपक्ष में श्रृंगार या विलासिता के काम करना उचित नहीं माना जाता। यह समय साधना, सादगी और पितरों के स्मरण का होता है।
क्या वास्तव में है धार्मिक नियम?
यह जानना महत्वपूर्ण है कि किसी भी वेद, पुराण या धार्मिक ग्रंथ में ऐसा स्पष्ट उल्लेख नहीं है कि पितृपक्ष में बाल, दाढ़ी या नाखून काटना वर्जित है। यह परंपरा अधिकतर मान्यता और सामाजिक आस्था पर आधारित है।
दरअसल, प्राचीन काल में श्रृंगार और सजावट को उत्सव का हिस्सा माना जाता था। लेकिन पितृपक्ष शोक और स्मरण का समय है, इसलिए इस दौरान श्रृंगार से परहेज करने की परंपरा बन गई। यही कारण है कि बाल और दाढ़ी न कटवाने की परंपरा चली आ रही है।
हर मनुष्य पर तीन प्रकार के ऋण
धार्मिक मान्यता के अनुसार, हर व्यक्ति पर तीन प्रकार के ऋण होते हैं -
- देव ऋण
- ऋषि ऋण
- पितृ ऋण
पितृपक्ष का समय पितृ ऋण को चुकाने का अवसर है। इस समय व्यक्ति को सात्विक जीवनशैली अपनाने, दान-पुण्य करने और पितरों का स्मरण करने पर बल दिया जाता है। इसलिए इसमें बाल या नाखून काटने जैसे कामों को वर्जित माना जाता है।
पितृपक्ष में किन चीजों से बचना चाहिए?
- श्राद्ध पक्ष में कुछ और कार्य भी वर्जित माने गए हैं:
- मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज जैसे तामसिक भोजन से परहेज करें।
- नशीली वस्तुओं का सेवन न करें।
- बासी खाना खाने से बचें।
- मांगलिक कार्य जैसे शादी, गृहप्रवेश या बड़े उत्सव न करें।
- दिखावे और विलासिता से दूरी बनाए रखें।
इस समय का मुख्य उद्देश्य सादगीपूर्ण जीवन जीना और पितरों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करना है।



Click it and Unblock the Notifications