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मिच्छामी दुक्कड़म... कहकर पीएम मोदी ने नई संसद में दिया पहला भाषण, जानें इसका मतलब और महत्व
Hindi Meaning of Micchami Dukkadam : गणेश चतुर्थी के मौके पर आज नए संसद भवन का शुभारंभ हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई संसद में अपने पहले संबोधन में जैन धर्म से संबंधित भाव 'मिच्छामि दुक्कड़म' का जिक्र किया। उन्होंने कहा, 'आज संवत्सरी का भी पर्व है। ये अपने आप में एक अद्भुत परंपरा है। इस दिन को एक प्रकार से क्षमा वाणी का भी पर्व कहते हैं।
आज मिच्छामी दुक्कड़म कहने का दिन है। ये पर्व मन से, कर्म से, वचन से अगर जाने-अनजाने किसी को भी दुख पहुंचाया है तो उसकी क्षमा याचना का अवसर है। मेरी तरफ से भी पूरी विनम्रता के साथ, पूरे हृदय से आप सभी को, सभी संसद सदस्यों को और देशवासियों को मिच्छामी दुक्कड़म।' आइए जानते हैं मिच्छामि दुक्कड़म' का मतलब और जैन धर्म में इसका महत्व-

मिच्छामी दुक्कड़म का मतलब
,'मिच्छामी दुक्कड़म' जैन धर्म से जुड़ा है। श्वेतांबर समाज हर वर्ष 'अष्टाह्निका' नाम से आठ दिन का पर्युषण पर्व मनाता है। पर्युषण पर्व के दौरान ही 'विश्व मैत्री दिवस' यानी संवत्सरी पर्व मनाया जाता है। इस पर्व के समापन पर जैन धर्म के सभी अनुयायी एक-दूसरे से क्षमा प्रार्थना करते हैं। जैनियों का दिगंबर संप्रदाय 'उत्तम क्षमा' तो श्वेतांबर संप्रदाय 'मिच्छामी दुक्कड़म' कहकर जाने-अनजाने में हुई गलती के लिए एक-दूसरे से क्षमा मांगते हैं।
मिच्छामी दुक्कड़म प्राकृत भाषा का शब्द है। मिच्छामी का अर्थ क्षमा जबकि दुक्कड़म का अर्थ दुष्ट कर्म यानी बुरे कर्म होता है। इस तरह मिच्छामी दुक्कड़म का मतलब होता है- बुरे कर्मों के लिए क्षमा प्रार्थना।

आज है संवत्सरी महापर्व
इस साल जैन धर्म के श्वेताबंरों के 11 सितंबर से ही पर्युषण पर्व मनाए जा रहे थे। यह पर्व 8 दिवसीय होता है। इसकी समाप्ति के बाद आखिरी दिन संवत्सरी महापर्व मनाने की परंपरा रही है। इस हिसाब से 19 सितंबर यानी मंगलवार को ही संवत्सरी महापर्व मनाया जा रहा है। इस पर्व का सार ये है कि 'मेरा किसी के साथ कोई बैर नहीं है और सभी से मेरी दोस्ती या मैत्री' है।



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