Latest Updates
-
No Gas Recipes: गैस खत्म हो जाए तो भी टेंशन नहीं, ट्राई करें ये 5 आसान रेसिपी -
किडनी को डैमेज कर सकती हैं रोजाना की ये 5 गलत आदतें, तुरंत करें सुधार वरना पड़ेगा पछताना -
Alvida Jumma 2026: 13 या 20 मार्च, कब है रमजान का आखिरी जुमा? जानिए क्यों माना जाता है इतना खास -
कृतिका कामरा ने गौरव कपूर संग रचाई गुपचुप शादी, सुर्ख लाल साड़ी में दिखीं बेहद खूबसूरत, देखें PHOTOS -
World Kidney Day 2026: हर साल क्यों मनाया जाता है विश्व किडनी दिवस? जानें इतिहास, महत्व और इस साल की थीम -
घर से मुस्लिम प्रेमी संग भागी महाकुंभ वायरल गर्ल मोनालिसा, केरल में रचाई शादी -
कौन हैं सायली सुर्वे? मिसेज इंडिया अर्थ 2019 ने मुस्लिम पति पर लगाए लव जिहाद के आरोप, हिंदू धर्म में की वापसी -
कौन हैं हरीश राणा, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने दी इच्छामृत्यु की अनुमति? जानिए 13 साल से कोमा में क्यों थे -
Sheetala Ashtami 2026: शीतला अष्टमी पर चाय पी सकते हैं या नहीं? जानें व्रत से जुड़े सभी जरूरी नियम -
Sheetala Ashtami 2026: शीतला अष्टमी के दिन झाड़ू लगाना शुभ या अशुभ? बसौड़ा पर भूलकर भी न करें ये गलतियां
Pongal 2024: चार दिनों तक चलता है पोंगल त्योहार, इस दिन से होती है तमिल नववर्ष की शुरुआत
Pongal 2024: जिस समय उत्तर भारत में लोहड़ी और मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है, उसी दौरान दक्षिण भारत में पोंगल का उत्सव मनाया जाता है। मुख्या रूप से तमिलनाडू, आन्ध्र प्रदेश, केरल और कर्नाटक में मनाए जाने वाले इस पर्व को अब देश के कई अन्य क्षेत्रों में भी मनाया जाता है।
पोंगल का त्यौहार 4 दिनों तक चलता है और इस दौरान पकी हुई फसल की पूजा के साथ साथ प्रकृति और धरती का शुक्रिया अदा किया जाता है। जानते हैं इस वर्ष पोंगल उत्सव कब से शुरू हो रहा है और इस पर्व का जश्न किस प्रकार होता है -

पोंगल 2024 तिथि
इस साल पोंगल 15 जनवरी से शुरू होगा। यह पर्व 4 दिन तक चलता है, जो 18 जनवरी को खत्म होगा। मान्यता अनुसार पोंगल के दिन से ही तमिल नववर्ष की शुरुआत होगी। पोंगल का पहला दिन देवराज इंद्र को समर्पित होता है, इसे भोगी पोंगल भी कहा जाता है।
पोंगल सम्बन्धी प्रमुख परम्पराएं
पहले दिन भोगी पोंगल के अवसर पर भगवान इंद्र देव की पूजा की जाती है। इस दिन प्रकृति का शुक्रिया अदा करते हुए इंद्रा देव को धन्यवाद देते हैं। इस दिन लोग अपने घरों की साफ़ सफाई करते हैं और घर के पुराने-बेकार सामान को आग में डालते हैं।
दूसरा दिन सूर्य पोंगल का होता है। यह सूर्य उत्तरायण के दूसरे दिन मनाया जाता है। इस दिन सूर्य देव का आभार प्रकट करते हुए उनकी पूजा की जाती है। सूर्य पोंगल के दिन एक ख़ास तरह की खीर भी बनायी जाती है जिसे पोंगल खीर कहा जाता है।
पर्व के तीसरे दिन मट्टू पोंगल मनाया जाता है, इस दिन पशुओं की पूजा कीई जाती है। इस दिन किसान परिवार अपने मवेशियों गाय, बैल आदि को सजाते हैं और उनकी पूजा करते हुए आभार प्रकट करते हैं। इसके साथ कई क्षेत्रों में बैलों की दौड़ का भी आयोजन किया जाता है।
पोंगल उत्सव का चौथा दिन कन्या पोंगल के नाम से जाना जाता है। इस दिन घरों को को सुंदर फूलों और पत्तों से सजाया जाता है, इसके साथ ही घरों के आँगन में सुंदर रंगोलियां मनाई जाती है। इस आखिरी दिन गन्ने, चावल, दूध और घी से बना ख़ास पकवान बनाते है।
पोंगल पर्व का महत्व
पोंगल नई फसल और संपन्नता का प्रतीक होता है। यह पर्व मनुष्यों विशेषकर किसान परिवारों द्वारा प्रकृति को धन्यवाद कहने का भी पर्व होता है। इस पर्व से भगवान का भी शुक्रिया अदा किया जाता है जिनके आशीर्वाद से खेतों में फसल लहलाती है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications











