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रास्ते में मिल जाये भंडारा तो खाना चाहिए या नहीं, जानें प्रेमानंद जी महाराज के विचार
Premanand Ji Maharaj Ke Vichar: वृंदावन वाले प्रेमानंद महाराज जी के प्रवचन आजकल हर उम्र के लोगों को पसंद आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी उनकी वीडियो बहुत तेजी से वायरल हो जाती हैं। प्रेमानंद महाराज जी बहुत ही प्रसिद्ध हैं। महाराज जी का प्रवचन देश ही नहीं अपितु विदेशों में में भी सुना जाता है।
दर्शन के लिए श्रद्धालु लाखों की संख्याओं में उनके आश्रम में पहुंचते हैं। महाराज सुख और सरल सुखद अनुभव के धनी हैं। प्रेमानंद महाराज जी सत्संग के दौरान अपने भक्तों के सवालों का जवाब भी देते हैं। रास्ते में मिलने वाला भंडारा या फ्री का भोजन बंट रहा हो तो वो खाना चाहिए या नहीं, इस सवाल पर जानें प्रेमानंद जी महाराज ने क्या कहा।

भंडारा या फ्री का भोजन बंट रहा हो तो वो खाना चाहिए या नहीं?
सत्संग के दौरान एक भक्त ने प्रेमानंद महाराज जी से सवाल पूछा कि क्या रास्ते में बंट रहे भंडारा या फ्री का भोजन खाना चाहिए या नहीं। इसका जवाब देते हुए महाराज जी कहते हैं कि अगर आप दूसरे से पैसा ले रहे हो या दूसरे का मुफ्त का भोजन खा रहे हो तो यह बिल्कुल ही गलत है। महाराज जी कहते हैं कि अपने घर में जाकर नमक रोटी खा लेना या फिर उपवास रख लेना। भले ही दिन हो या रात भूख में क्यों न गुजारनी पड़े लेकिन अपनी दरिद्रता नहीं खराब करनी चाहिए। प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं कि कहीं दूध बंट रहा है, कहीं खिचड़ी बंट रही है। कहीं खीर तो कहीं हलवा या फिर कहीं चाय बांट रही है तो कहीं भी फ्री में नहीं लेना चाहिए। इससे आपका पुण्य क्षीण होता है और आप पाप का भागीदार बनते हैं।
प्रेमानंद जी महराज की सलाह
प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं कि तुम भी अपनी सोच बदलो और कड़ी मेहनत करो। अपने मन में भी लेकर आओ कि 5 kg हलवा बनाकर हम भी किसी को बांटे लेकिन फ्री का भोजन न करें।
प्रेमानंद महाराज जी आगे कहते हैं कि इसमें आपको लाभ मिलने की संभावना बहुत कम होती है। अपनी कड़ी मेहनत करके ईमानदारी से जो काम करते हैं इससे बहुत बड़ी उपलब्धि मिलती है।
करें ये काम
महाराज जी कहते हैं कि अगर आप गृहस्थ हैं और किसी आश्रम में गए हैं और वहां भोजन प्रसादी मिल रहा है तो उसको ग्रहण कर लें और उसके बदले में कुछ दक्षिणा दान कर दें। महाराज जी आगे कहते हैं कि मुफ्त का भोजन मत लो। मुफ्त की सेवा कभी न लें। इससे आपको पुण्य फल की प्राप्ति अवश्य हो जायेगी।
प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं कि अगर आप विरक्त हैं तो भगवान जैसा भी आपका जीवन चलाएं, उसे स्वीकार करें। वहीं अगर आप गृहस्थ हैं तो अपनी इन आदतों में सुधार कर लीजिए।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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