Latest Updates
-
कहीं आप भी तो नहीं पी रहे डिटर्जेंट वाला दूध? FSSAI के बताए इस सिंपल टेस्ट से मिनटों में करें चेक -
Indira Ekadashi 2026: 5 या 6 अक्टूबर, कब है इंदिरा एकादशी? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि -
DHT: क्या है डायरेक्ट हेयर ट्रांसप्लांटेशन? जानें बालों की रिग्रोथ के लिए कितनी कारगर है यह तकनीक -
Captain Smit Machchhar: कैप्टन 'स्मित मच्छर' के सरनेम का क्या है मतलब? जानें इसके पीछे की दिलचस्प कहानी -
नुसरत भरूचा की रीढ़ की हड्डी में हुआ फ्रैक्चर, एयरलिफ्ट कर बाली से लाई गईं मुंबई, वीडियो देख फैंस हुए परेशान -
Jitiya Vrat 2026: जितिया व्रत में पानी पी सकते हैं या नहीं? जानें जरूरी नियम और पारण का समय -
Jitiya Vrat Katha: जितिया (जीवित्पुत्रिका) व्रत में जरूर करें इस कथा का पाठ, पूरे साल सुरक्षित रहेगी संतान -
Jitiya Vrat 2026 Wishes: संतान की लंबी उम्र...जितिया व्रत के अवसर पर अपनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
Lal Bahadur Shastri Jayanti 2026: क्या आप जानते हैं लाल बहादुर शास्त्री का असली नाम? जानें 10 रोचक तथ्य -
Gandhi Jayanti 2026: गांधी जी को 'बापू' क्यों कहा जाता है? जानें किसने दी थी 'महात्मा' की उपाधि
Radha Ashtami 2024: कृष्ण जन्माष्टमी के बाद मनाई जाती है राधा अष्टमी, जानें तिथि और शुभ मुहूर्त
Radha Ashtami 2024 Kab Hai: राधा अष्टमी हिंदू कैलेंडर का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है, जो भादव महीने में शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन राधा रानी की विशेष पूजा की जाती है। यह त्यौहार कृष्ण जन्माष्टमी के 15 दिन बाद मनाया जाता है, जिसमें लाखों भक्त श्री कृष्ण और राधा रानी की पूजा करने के लिए मथुरा, वृंदावन, बरसाना और नंद गांव आते हैं।

राधा अष्टमी 2024 कब है?
इस वर्ष राधा अष्टमी 10 सितंबर को रात 11:11 बजे शुरू होकर 11 सितंबर को रात 11:40 बजे समाप्त होगी। उदय तिथि के अनुसार मुख्य उत्सव 11 सितंबर को होगा। भक्त सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद पाने के लिए उपवास और विशेष अनुष्ठानों के साथ इस दिन का पालन करते हैं।
राधा अष्टमी 2024 पूजा मुहूर्त
राधा अष्टमी पर पूजा का शुभ मुहूर्त 11 सितंबर को सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक है। 2 घंटे 29 मिनट की इस अवधि के दौरान, भक्त भगवान बांके बिहारी और राधा रानी को समर्पित विशेष अनुष्ठान कर सकते हैं।
राधा रानी को प्रेम और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। राधा अष्टमी के दिन उनकी पूजा करने से भक्तों में आपसी प्रेम, भाईचारा और मधुरता बढ़ती है। माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने से सुख-सौभाग्य के साथ-साथ मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
राधा अष्टमी व्रत का महत्व
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार भगवान श्री कृष्ण की पूजा राधा रानी की पूजा के बिना अधूरी है। इसलिए जो लोग श्री कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत रखते हैं, उन्हें राधा अष्टमी का व्रत भी अवश्य रखना चाहिए। कहा जाता है कि इस पावन पर्व पर व्रत रखने से सुख, शांति, समृद्धि और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
यह त्यौहार बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भगवान श्री कृष्ण की प्रिय राधा रानी के जन्मोत्सव का जश्न मनाता है। भक्तों का मानना है कि समर्पण के साथ व्रत रखने से उनकी प्रार्थना पूरी होती है और उन्हें आध्यात्मिक लाभ मिलता है।
अंत में, राधा अष्टमी एक अत्यंत पूजनीय त्यौहार है जो उपवास और विशेष अनुष्ठानों के माध्यम से भक्तों और उनके देवताओं के बीच के बंधन को मजबूत करता है। यह उत्सव न केवल राधा रानी का सम्मान करता है बल्कि अनुयायियों के बीच आपसी प्रेम और भक्ति को भी बढ़ाता है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications
