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Ramadan 2023 Special : जानिए रमजान में तरावीह की दुआ और नियत
रमजान सभी मुस्लिम भाइयों का पवित्र महीना माना जाता है। ऐसा माना जाता है जो व्यक्ति रमजान के महीने में रोज़े रखता हैं और साफ़ दिल से दुआएं करता हैं अल्लाह उसके गुनाहों को कई हद तक कम कर देता है। रमजान के महीने की शुरुआत चांद देखने के बाद से होती है। आमतौर पर रमजान का महीना कभी 29 दिन का तो कभी 30 दिन का होता है। चाँद दिखने के अगले दिन से मुस्लिम लोग रोजा रखना शुरू कर देते हैं।
अरबी शब्दकोश की बात करें तो अरबी में रोज़े (उपवास) को उपवास को सौम भी कहा जाता है, इसलिए इस मास को अरबी में माह-ए-सियाम के नाम से भी जानते हैं। हर दिन रोजा रखने की शुरुआत सुबह सहरी के साथ होती है और फिर शाम में इफ्तार करके रोजा खोला जाता है। ऐसा माना जा रहा है कि यदि मक्का में आज चांद नजर आता है तो कल से आरंभ हो सकता है। रोजे रखने के दौरान पांच वक़्त की नमाज़ पढ़ना जरुरी माना जाता है मगर रमजान के महीने में तरावीह नमाज (tarabi ki namaz) का विशेष महत्व माना गया है। तरावीह नमाज (tarabi ki namaz) इस्लाम में हर व्यक्ति को समय से पूरी करनी चाहिए। तो चलिए आपको बताते हैं तरावीह क्या है (Taraweeh ki Namaz Kya Hai ),तरावीह की नियत (Taraweeh ki Niyat) और दुआ के बारे में।

तरावीह क्या होती है (Taraweeh ki Namaz Kya Hai)
ऐसा माना जाता है अगर आपके मन में कोई दुआ या कोई ख्वाईश हैं तो रमजान के महीने में साफ़ दिन से तरावीह पढ़ने से मुराद पूरी होती है। तरावीह एक अरबी शब्द है जिसका मतलब आराम और तेहरना होता है। हमेशा तरावीह की नमाज़ (Taraweeh ki Namaz) ईशा की नमाज के बाद पढ़ी जाने वाली नमाज है, जिसमें 20 रकाते पढ़ी जाती है। जिसमें मुख्यत हर दो रकात के बाद सलाम फेरा जाता है, जिसमें 10 सलाम में 20 रकात होती हैं। वहीं हर 4 रकात के बाद दुआ (tarabi ki dua) पढ़ी जाती है। ऐसा माना जाता है 4 रकात के बाद मांगी जाने वाली दुआ में सभी नमाज़ी अपने चाहें और जानने वालों की सलामती और भाईचारे की दुआ करता है। यह नमाज़ महिला और पुरुष दोनों पर फ़र्ज़ (जरूरी) है। इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार जिस घर में परिवार मिल कर तरावीह की नमाज़ करता है वह बरकत ही बरकत होती है।
रमजान में पुरुषों में तरावीह की नियत का तरीका
रमजान में पुरुषों में तरावीह की नियत का तरीका और औरतों का तरीका अलग अलग होता है। जिसमें पुरुषों के लिए : नियत की मैंने दो रकात नमाज़ सुन्नत तरावीह, अल्लाह तआला के वास्ते, वक्त इशा का, पीछे इस इमाम के मुहं मेरा कअबा शरीफ़ की तरफ़, अल्लाहु अकबर कह कर हाथ बाँध लेना है फिर सना पढ़ेंगे ! (इस तरीके पुरुषों का तरावीह की नियत का तरीका बनाया गया है)
रमजान में महिलाओं में तरावीह की नियत का तरीका
इस्लामिक तौर तरीकों के अनुसार महिलाओं का तरावीह की नियत का तरीका कुछ इस तरह है : नियत की मैंने दो रकात नमाज़ सुन्नत तरावीह, अल्लाह तआला के वास्ते, वक्त इशा का, मुहं मेरा कअबा शरीफ़ की तरफ़, अल्लाहु अकबर हाथ बाँध लेना है। (इस तरह से महिलाओं को तरावीह की नियत का तरीका बताया गया है)
रमजान में तरावीह की नमाज पढ़ने का तरीका (Tarabi ki Namaz Padhne ka Tarika)
इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार यदि तरावीह नमाज़ मस्जिद में इमाम के पीछे पढ़ें तो बस 4 रकात के बाद तरावीह की दुआ (taravi ki dua) पढ़नी चाहिए, वही किसी कारण आप मस्जिद में नमाज ना पढ़ पाए तो फिर सूरह फातिहा के बाद आप अलम-त-र से से सूरह नास तक पढ़ कर तरावीह की नमाज़ (tarabi ki namaz) अदा कर सकते है। अलम-त-र से से सूरह नास तक १० रकात होती है। आप इसे 2 बार पढ़ले ताकि आपकी 20 रकात पूरी हो जाए। अगर अलम-त-र की सूरह याद नहीं है तो आप चारो कुल पढ़कर भी नमाज़ अदा कर सकते है ! वही जब दो -दो रकअत करके चार रकअत मुकम्मल तब आपको तरावीह की दुआ (taraweeh ki dua) पढ़नी चाहिए ! इस तरह 20 रकअत तरावीह की नमाज़ (Taraweeh ki Namaz) में 5 मर्तबा तरावीह की तस्बीह (Taraweeh ki Tasbih) पढ़ी जायेगी ! जिसे हम तरावीह की दुआ (Taraweeh ki Dua) कहते है।
नियत करने के बाद आप हाथ बाँध ले और सना पढ़ें! सना के अल्फाज़ इस तरह है -
सुबहाना कल्ला हुम्मा व बिहम्दिका व तबारा कस्मुका व त'आला जद्दुका वला इलाहा गैरुक
इसके बाद :अउजू बिल्लाहि मिनश शैतान निर्रजिम. बिस्मिल्लाही र्रहमानिर रहीम पढ़े !!
उम्मीद है आपको यह लेख पसंद आया होगा और साल 2023 में आप रमजान के महीने में तरावी की नमाज़ और तरावी की दुआ पढ़ेंगे और पवित्र रमजान के महीने में अपने चाहने वालों के साथ-साथ अपने आस पास रमजान के महीने में तरावी की नमाज़ का महत्व और तरावी की दुआ कैसे करनी है बताएँगे।



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