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Ramadan 2023: जकात क्या है? किसको दे सकते हैं और इस्लाम में इसका महत्व जानें
रमजान के महीने में हर मुस्लिम को अपनी सेविंग से कुछ अमाउंट डोनेट करना फर्ज होता है। इस्लाम में पांच जरूरी पिलर हैं जो शाहदा, सलात, ज़कात, सवाम और हज हैं और हर मुसलमान की ये जिम्मेदारी है कि वो इन पांचों पिलर्स को फॉलो करे। ज़कात इस्लाम का तीसरा पिलर है, जिसमें एक मुसलमान को अपने माल का एक हिस्सा गरीबों और जरूरत मंदों को देना होता है और ये कंपलसरी होता है। जिस तरह से पांच वक्त की नमाज जरूरी है वैसे ही एक मुसलमान पर जकात भी फर्ज है। लेकिन ये सभी पर लागू नहीं होता है। जो इसके लिए एलिजिबल होते हैं, उन पर ये फर्ज होता है।
जकात क्या है-जकात का मतलब ?
ज़कात इस्लाम में एक फंडामेंटल है, जो एक साल में एक शख्स के द्वारा कमाई कुल अमाउंट का, चाहे वो बैंक में हो या घर पर रखा पैसा, सोना, चांदी, कृषि उपज, पशुओं की कमाई, और स्टॉक और इनवेस्टमेंट से कमाए हुए पैसे के लाभ पर निकाला जाता है। इस्लाम में इसको इसलिए फर्ज किया गया है जिससे एक मुसलमान लालच और स्वार्थ से फ्री हो सके, गरीबों और जरूरतमंदों की मदद कर सके।

जकात का महत्व
जकात का अहमियत इतना ज्यादा है कि कुरान ए-पाक में जकात के बारें 80 बार बताया गया है। रमजान के महीने में साल भर कमाए हुए पैसों का हिसाब करके कुछ हिस्सा जकात के लिए निकाला जाता है, जिसका मकसद अल्लाह पाक के नाम पर दुनिया भर में भाईचारे और मुस्लिम ब्रदरहुड को बढ़ावा देना है।

जकात कितने तरह का होता है-
1. ज़कात अल मल: ज़कात का सबसे कॉमन टाइप है। ज़कात अल मल एक शख्स के माल पर किया जाने वाला एनुअल डोनेशन है। माल में नकद, सोना, चांदी और संपत्ति में पैसा शामिल है।
2. ज़कात अल फ़ित्र: एक और जरूरी डोनेशन जो मुसलमानों के लिए अनिवार्य है, ज़कात अल फ़ितर है। डोनेशन को वैलिड बनाने के लिए इसे ईद से पहले-पहले डोनेश किया जाता है।
जकात नियम
सालाना डोनेशन के कई बुनियादी रूल्स हैं जिनके बारे में हर मुसलमान को पता होना चाहिए-

जकात के लिए कौन पात्र है?
एक शख्स अपने माल को एक जिम्मेदारी की तरह से डोनेट करना होता है। जकात में देर नहीं करनी चाहिए। वहीं इसके साथ ही रमजान महीने के लास्ट में और ईद से पहले परिवार के मुखिया द्वारा जकात अल-फितर देना अनिवार्य होता है, जो परिवार के प्रत्येत सदस्य के हिसाब से निकाली जाती है।
जकात किसको दी जा सकती है-
आठ तरह के लोग हैं जो जकात किए गए डोनेशन को पा सकते हैं-
फकीर - गरीब और जरूरतमंद
मिस्किन - भूख लगी है और खाने के लिए कुछ नहीं है
आमिल - ज़कात कलेक्टर जो इसे दूसरों की ओर से वितरित करता है
रिक़ाब - बंदी
कर्ज में डूबे लोग
फ़िसाबिलिल्लाह - अल्लाह के रास्ते में काम करने वाले लोग
इब्नस साबिल - फंसे हुए यात्री
मुअल्लफ - धर्मान्तरित लोग
Image Courtesy-Freepik



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