Ramzan Ke Dusre Ashre Ki Dua: रमज़ान में मगफिरत के 10 दिन शुरू, दूसरे अशरे में पढ़ी जाती है ये दुआ

Dua For 2nd 10 Days Of Ramadan: किसी भी मुसलमान के लिए इस्लामिक कैलेंडर का नौवां महीना रमजान साल के सबसे पाक और खूबसूरत महीनों में से एक होता है। हर मुसलमान के लिए यह इबादत का महीना है। इस मुकद्द्स माह में, मुसलमान दिनभर रोज़ा रखते हैं और पूरे ईमान के साथ पांचों वक्त की नमाज़ा अता करते हैं।

ये साल का वो वक्त है जब इंसान अल्लाह के साथ अपने रिश्ते को मजबूत कर पाता हैं। रमज़ान मुसलमानों के लिए बरकत का महीना कहलाता है। साल 2024 में रमजान का महीना शुरू हो चुका है और देखते ही देखते पहला अशरा भी बीत गया है। आइये जानते हैं कि रमज़ान के दूसे अशरे में कौन सी दुआ पढ़ी जाती है।

Ramzan ke Dusre Ashre Ki Dua Read Prayer of Second Ashra of Ramadan Month

रमज़ान महीने में अशरा क्या होता है? (Second Ashra in Ramzan Month)

गौरतलब है कि रमज़ान के महीने में 29 से 30 दिन होते हैं। रमजान माह को तीन हिस्सों में बांटा जाता है जिसे अशरा कहा जाता है। अरबी में अशरा का मतलब दस नंबर होता है। रमजान के पहले दस दिन (1-10) को पहला अशरा, दूसरे 10 दिन (11-20) को दूसरा अशरा और तीसरे दस दिन (21-30) को तीसरा अशरा कहा जाता है।

इस तरह से रमज़ान महीने में 3 अशरे होते हैं। जानकारों के मुताबिक पहला अशरा रहमत का होता है, दूसरा अशरा मगफिरत यानी गुनाहों की माफी का माना गया है और वहीं तीसरा अशरा जहन्नुम की आग से खुद को बचाने के लिए होता है।

रमज़ान के तीनों अशरों का क्या महत्व है? (Significance of 3 Ashra in Ramzan Month)

रमज़ान महीने के दस दिन लगभग बीत चुके हैं। इन शुरुआती 10 दिनों में यानी पहले अशरे में जो रोजे रखने वालों पर अल्लाह की रहमत बरसती है। वहीं रमजान के दूसरे अशरे में मुसलमान जाने अनजाने में हुए अपने गुनाहों के लिए माफ़ी मांगता है। वो उम्मीद करता है कि अल्लाह की रहमत से वो पाक-साफ हो जाएगा। रमजान के आखिरी 10 दिन यानी तीसरे अशरे में अल्लाह की इबादत करके वो खुद को जहन्नुम की आग से बचाने के लिए दुआ करता है।

रमज़ान का दूसरा अशरा (Dusra Ashra)

दूसरे 10 दिन मगफिरत के माने गए हैं। अल्लाह मरहूमों पर मगफिरत फरमाता है और रोजेदारों को गुनाहों से आजादी मिलती है। इन दस दिनों में रोजेदार अल्लाह से अपने गुनाहों की माफ़ी मांगता है।

रमजान के दूसरे अशरे की दुआ (Second Ashra Dua)

اَسْتَغْفِرُ اللہَ رَبِّی مِنْ کُلِّ زَنْبٍ وَّ اَتُوْبُ اِلَیْہِ

"अस्तग़्फिरुल्लाह रब्बी मिन कुल्लि ज़म्बिन वा आतूबु इलैह"

तर्जुमा: "मैं अपने सभी गुनाहों के लिए अपने रब, अल्लाह पाक से माफ़ी मांगता हूँ और उसकी ओर मुड़ता हूँ। "

नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।

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