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Taraweeh Ki Dua: यहां जानें तरावीह की नमाज़ का तरीका, दुआ, नियत, रकात और फ़ज़ीलत के बारे में
Taraweeh Ki Dua: रमज़ान का मुकद्द्स महीना शुरू हो चुका है। मुसलमानों के लिए ये माह बहुत अहमियत रखता है। रमज़ान के चांद का दीदार होने के साथ ही दुआओं का दौरा भी शुरू हो जाता है। रमजान के महीने में ही तरावीह की नमाज पढ़ना भी जरूरी माना गया है। आइए इस पोस्ट के माध्यम से जानते हैं तरावीह की कौन सी दुआ, कब और कैसे पढ़ें।
तरावीह की नमाज दो तरह की होती है (Taraweeh Ki Namaz)
बड़ी तरावीह की नमाज़: बड़ी तरावीह की नमाज़ में इमाम साहब रमजान के पाक महीने में रोज़े के अंदर पूरे क़ुरान शरीफ़ को मुक्कमल करते हैं।
छोटी तरावीह की नमाज़: छोटी तरावीह की नमाज़ में इमाम पारा 30 के आखिरी 10 सूरह को पढ़ते हैं।

तरावीह की नमाज कब पढ़ी जाती है? (Taraweeh Ki Namaz Kab Padhe)
मुसलमानों के लिए तरावीह की नमाज़ एक सुन्नत ए मोकिदा नमाज़ है। यह नमाज़ ईशा की नमाज़ के वक्त पढ़ी जाती है। तरावीह की नमाज़ में हर चार रकात नमाज़ के बाद तरावीह की दुआ या तस्बीह भी पढ़ने की रिवायत है।
तरावीह की नमाज़ की दुआ (Taraweeh Ki Namaz Ki Dua)
सुबहानाज़िलमुल्कि वलमलाकूति * सुब्हानज़िल इज्ज़ति वल अज्मति वल हैबति वल क़ुदरति वल किबरियाइ वल जबरूत * सुब्हानल मलिकिल हय्यिल लज़ी ला यनामु वला यमूतु * सुब्बुहुन कुद्दुसून रब्बुना व रब्बुल मलाइकति वर्रूह * अल्लाहुम्मा अजिरना मीनन नारी या मुजीरू या मुजीरू या मुजीर *
سُبْحَانَ ذِی الْمُلْکِ وَالْمَلَکُوْتِ ط سُبْحَانَ ذِی الْعِزَّةِ وَالْعَظَمَةِ وَالْهَيْبَةِ وَالْقُدْرَةِ وَالْکِبْرِيَآئِ وَالْجَبَرُوْتِ ط سُبْحَانَ الْمَلِکِ الْحَيِ الَّذِی لَا يَنَامُ وَلَا يَمُوْتُ سُبُّوحٌ قُدُّوْسٌ رَبُّنَا وَرَبُّ الْمَلَائِکَةِ وَالرُّوْحِ ط اَللّٰهُمَّ اَجِرْنَا مِنَ النَّارِ يَا مُجِيْرُ يَا مُجِيْرُ يَا مُجِيْر۔
तरावीह की नमाज़ की रकात (Taraweeh Ki Namaz Ki Rakaat)
तरावीह की नमाज़ में पूरी 20 रकात की नमाज़ होती है। हर 2 रकात के बाद सलाम फेरा जाता है। दो-दो रकात करके 20 रकात पढ़े जाते हैं। 10 सलाम में 20 रकात होती हैं और 4 रकात के बाद दुआ पढ़ी जाती है। हर 4 रकात तरावीह की नमाज़ पढ़ने के बाद तरावीह की तस्बीह पढ़ते हैं।

तरावीह की किस रकात में पढ़ें कौन सी सूरह (Taraweeh Ki Kis Rakat Me Kaun Sa Surah Padhe)
पहली रकात: अलम तारा कैफ़ सूरह
दूसरी रकात: लि इलाफि क़ुरैश सूरह
तीसरी रकात: सूरह अरा ऐतल लज़ी
चौथी रकात: इन्ना आतैनाकल कौसर सूरह
पांचवीं रकात: सूरह कुल या अय्युहल काफ़िरून
छठी रकात: सूरह इज़ा जा अ नसरुल लाहि वल फतह
सातवीं रकात: सूरह तब्बत यदा
आठवीं रकात: सुरह क़ुल हुवल लाहू अहद
नौंवी रकात: सुरह क़ुल अऊजु बिरबबिल फलक
दसवीं रकात: सुरह कुल ऊजु बिरब बिन नास
तरावीह की नमाज़ की नीयत करने का तरीका (Taraweeh Ki Niyat Ka Tarika)
पुरुषों के लिए तरावीह की नियत:
नियत की मैंने दो रकात नमाज़ सुन्नत तरावीह, अल्लाह तआला के वास्ते, वक्त इशा का, पीछे इस इमाम के मुहं मेरा कअबा शरीफ़ की तरफ़, अल्लाहु अकबर कह कर हाथ बाँध लेना है फिर सना पढ़ेंगे !
महिलाओं के लिए तरावीह की नियत:
नियत करती हूं मैं दो रकात नमाज़ सुन्नत तरावीह की, अल्लाह तआला के वास्ते, वक्त इशा का, मुहं मेरा मक्का कअबा की तरफ, अल्लाहु अकबर..फिर हाथ ऊपर करके नियत बांध लेते हैं।
तरावीह की नमाज़ को पढ़ने का तरीक़ा (Taraweeh Ki Namaza Padhne Ka Tarika)
तरावीह की नमाज़ पढ़ने का तरीका 2 रकअत नमाज़ सुन्नत पढ़ने के तरीके के ही जैसा है यह हम आपको तरावीह की नमाज़ को पढ़ने का सही तरीका के बारे में बताएंगे।
तरावीह की नमाज़ की नीयत करना (Taraweeh Ki Namaz Niyat Karne Ka Tarika)
सना दुआ को पढेंगे।
ताऊज यानी अउजूबिल्लाहिमिनश शैतानिर्रजीम बिस्मिल्लाही र्रहमानिर रहीम
इसके बाद इमाम सूरह फातिहा और कुरान शरीफ़ की आयत को पढ़ते हैं। आपको सिर्फ़ उसे ध्यान से सुनना है।
रुकु करें।
रुकु की तस्बीह को पढ़ें।
सजदा करें।
सजदा की तस्बीह पढ़े।
इमाम के साथ अल्लाहु अकबर कहते हुए खड़े हो जाएं।
पहली रकात की तरह अब दूसरी रकात को इमाम पूरी करेंगे। आप उन्हें फॉलो करते रहें।
अब इस तरह आपकी दो रकात तरावीह की नमाज़ पूरी हो गई है।
इमाम सिर से दो रकात नमाज़ को पूरा करेंगे।
हर चार रकात नमाज पूरी होने के बाद आपको तरावीह की दुआ को पढ़ना है।
ऐसे ही पढ़कर आपकी 20 रकात तरावीह की नमाज़ पुरी होगी।
20 रकात तरावीह की नमाज़ के बाद अल्लाह से दुआ मांगे फिर इमाम के साथ 3 रकात वित्त की नमाज़ पढ़ें।
तरावीह की नमाज़ की फजीलत (Taraweeh Ki Namaz Ki Fazeelat)
हर सजदे पर 1500 नेकी लिखी जाती है। हर सजदे के साथ जन्नत में महल बनता है। इसमें 60 हज़ार सोने चांदी के दरवाजे होते हैं। रमजान के महीने के रात में नूर बरसता है। अल्लाह आसमान से तरावीह पढ़ने वालो को देखता है। जो लोग तरावीह की नमाज पढ़ते हैं उन्हें अल्लाह की रहमत हासिल होती है। रमजान सबसे मुबारक महीना है। इस महीने अल्लाह की खास रहमते दुनिया पर बरसती है। रमजान में की गई इबादतों का सवाब कई गुना बढ़ जाता है। हदीसो के मुताबिक रमज़ान में 1 फर्ज नमाज अदा करने का सवाब 70 फर्ज अदा करने के बराबर होता है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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