Latest Updates
-
टीम इंडिया की जर्सी पाकर इमोशनल हुए 15 साल के वैभव सूर्यवंशी, कही ये बड़ी बात, देखें Video -
क्यों मनाते हैं International Olympic Day? जानें इसका इतिहास, महत्व और इस साल की खास थीम -
कौन हैं WhatsApp के नए CEO कुणाल शाह? न इंजीनियरिंग, न MBA डिग्री, फिर भी करोड़ों में है नेट वर्थ -
Mahesh Navami 2026: महेश नवमी आज, जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि -
Bada Mangal 2026: ज्येष्ठ माह का आखिरी बड़ा मंगल आज, इन उपायों को करने से मिलेगी हनुमान जी की विशेष कृपा -
Happy Mahesh Navami 2026 Wishes: महेश जिनका नाम है...महेश नवमी पर प्रियजनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
Aaj Ka Rashifal 23 June 2026: मंगलवार को इन 4 राशियों पर बरसेगी बजरंगबली की कृपा, जानें अपना भाग्य -
शाम 7 बजे के बाद गलती से भी मत करना ये 5 काम, बढ़ता है हार्ट अटैक का रिस्क -
बिना मारे चूहों को घर से भगाने का देसी तरीका! आटे में मिलाकर रख दें ये एक चीज, फिर कभी नहीं आएंगे नजर -
Pahadi Crispy Snack Singal Recipe: घर पर बनाएं उत्तराखंड का पारंपरिक और कुरकुरा स्वाद
Ravidas Jayanti 2024: कब हुआ था संत रविदास जी का जन्म, जानें उनका कवि रैदास बनने का सफर
Sant Ravidas Ji Ki Biography in Hindi: संत रविदास भारतीय समाज के महान संत और समाज सुधारक थे, जिनका जन्म लगभग 15वीं शताब्दी के आस-पास हुआ था। वे दलित समुदाय से संबंधित थे और उनके जीवन और कार्य उन्हें एक महान धर्मगुरु बनाते हैं।
संत रविदास ने अपने ग्रंथों के माध्यम से सामाजिक और धार्मिक सुधार को प्रोत्साहित किया। उनकी रचनाओं में जनता को भगवान की शरण में आने के लिए प्रेरित किया गया है, और उन्होंने समाज में अवसरों की समानता और समरसता के प्रति आवाज उठाई।

रविदास जी के अनुयायी उन्हें "गुरु रविदास" भी कहते हैं। उनके ग्रंथों में उन्होंने समाज में समरसता, प्रेम, और सेवा की महत्वपूर्ण बातें उजागर की हैं। आइये इस लेख के माध्यम से जानते हैं संत रविदास जी के जीवन, परिवार और शिक्षा के बारे में।
संत रविदास का जन्म
संत रविदास का जन्म 1377 ई. में वाराणसी (बनारस) में हुआ था। इनका जन्म माघ महीने की पूर्णिमा तिथि के शुभ मुहूर्त दिन रविवार को हुआ था। इसी वजह से इनका नाम रविदास नाम पडा। प्रत्येक वर्ष माघ पूर्णिमा के शुभ अवसर पर संत शिरोमणि रविदास जी का जयंती मनाई जाती है। साल 2024 में संत रविदास जी की जयंती 24 फरवरी, शनिवार के दिन मनाई जाएगी।
गुरू रविदास के परिवार
संत श्री रविदास के पिता जी का नाम संतोष दास और माता का नाम कलशा देवी था। इनका विवाह लोना देवी के साथ हुआ। गुरू रविदास का एक पुत्र था उसका नाम विजय दास था।
संत रविदास की पढ़ाई
पंडित गुरु रविदास ने प्रारंभिक शिक्षा अपने गुरु पंडित शारदानंद के पाठशाला में ली। इनकी पाठशाला वाराणसी में ही स्थित थी। कुछ उच्च वर्गों के लोगों द्वारा गुरु रविदास को पाठशाला आने के लिए मना कर दिया लेकिन पंडित शारदानंद ने होनहार तथा तेजस्वी बालक रविदास की प्रतिभा को देखकर उन्हें अपनी पाठशाला में दाखिला दिया। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गृह ग्राम वाराणसी में ही संपन्न हुई।
संत रविदास का समाज के लिए योगदान
संत शिरोमणि रविदास एक महान विचारधारा वाले तथा भगवान के बहुत बड़े भक्त थे। संत शिरोमणि रविदास जातिवाद तथा समाजवाद साथ ही परिवारवाद के खिलाफ थे। इन्होंने ऐसी विचारधारा के खिलाफ बहुत जोर शोर से आंदोलन भी किया। इसमें वो काफी हद तक सफल भी हुए और इस क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें सम्मानित भी किया गया।
माघ पूर्णिमा के शुभ अवसर पर संत शिरोमणि रविदास की जयंती पर लोग पवित्र नदी या जलाशय में स्नान करके उनके किए गए विख्यात कार्यों का अनुसरण करके उन्हें याद करते हैं। संत शिरोमणि गुरु रविदास के चमत्कारी तथा प्रेरणा स्रोत कार्य स्मरण करते हैं। उनके जन्म स्थान पर जाकर लोग भक्ति आराधना के साथ संत रविदास से जुड़ी महान घटनाओं को स्मृति करते हैं।
महान कवि थे रैदास
संत रविदास अनेकों नाम से विख्यात है जैसे गुरु रविदास, संत शिरोमणि रविदास, भक्त रविदास तथा रैदास। संत रविदास चमार संप्रदाय से आते हैं। वह एक महान प्रखर कवि थे। संत शिरोमणि गुरु रविदास की 40 वाणियों में गुरु ग्रंथ साहिब में एक विशेष स्थान में दर्ज है।
उनकी रचनाएं मानव कल्याण, भगवान, दुनिया और प्रकृति के प्रति प्रेम तथा जीवन जीने की कला सबंधित मधुर रूप से संदेश देती है। वो बहुत ही सरल और सहज एवं सुमधुर वाणी के कवि थे। संत रविदास संत कबीर के समकालीन थे। प्रत्येक वर्ष माघ मास की पूर्णिमा के शुभ दिवस पर संत रविदास जयंती पूरे भारत में हर्ष उल्लास के साथ विधिवत मनाई जाती है। वाराणसी में इस शुभ अवसर को त्यौहार के रूप में मनाया जाता है। लोग रविदास के जन्मदिन पर मधुर गीत तथा वचन सुनते हैं। रविदास एक महान तथा ऊंची विचारधारा के धनी व्यक्ति थे। संत शिरोमणि रविदास जी ने 1528 ई. में देहत्याग दिया। उस समय वह अपने निज निवास वाराणसी में ही थे।
संत शिरोमणि रविदास के कुछ दोहे
• मस्जिद सों कुछ घिन नहीं, मंदिर सों नहीं पिआर।
दोए मंह अल्लाह राम नहीं, कहै रैदास चमार॥
• ऊँचे कुल के कारणै, ब्राह्मन कोय न होय।
जउ जानहि ब्रह्म आत्मा, रैदास कहि ब्राह्मन सोय॥
• माथे तिलक हाथ जपमाला, जग ठगने कूं स्वांग बनाया।
मारग छाड़ि कुमारग उहकै, सांची प्रीत बिनु राम न पाया।।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications