Kawad Yatra 2025 : क्या महिलाएं कांवड़ यात्रा कर सकती हैं? क्‍या कहते है शास्‍त्र और न‍ियम भी जानें

Women Kawad Yatra Do's & Don't : हर वर्ष सावन मास के साथ ही शिवभक्तों की आस्था और भक्ति की सबसे बड़ी पदयात्रा कांवड़ यात्रा की शुरुआत होती है। यह यात्रा शिवभक्ति, संकल्प और त्याग का प्रतीक मानी जाती है। लाखों श्रद्धालु नंगे पांव गंगा नदी से पवित्र जल भरकर अपने गांव या शहर के शिवालयों में जाकर शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं।

सावन माह 2025 में 11 जुलाई (शुक्रवार) से शुरू होकर 9 अगस्त (शनिवार) तक चलेगा। इसी दिन से कांवड़ यात्रा की शुरुआत मानी जाती है। यह यात्रा श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से प्रारंभ होती है। इस वर्ष सावन शिवरात्रि 23 जुलाई 2025 (बुधवार) को है, जो कि कांवड़ यात्रा का मुख्य दिन होता है।

अधिकांश श्रद्धालु इसी दिन गंगाजल अर्पित करते हैं। कुछ स्थानों पर यह यात्रा भाद्रपद मास तक भी जारी रहती है। सावन में कई लोगों के मन में यह सवाल होता है कि क्या महिलाएं कांवड़ यात्रा कर सकती हैं? आइए जानते हैं इसे लेकर पौराणिक महत्व और न‍ियम-

Women Kawad Yatra Do s amp amp Don t

कांवड़ यात्रा का पौराणिक महत्व

धार्मिक मान्यता है कि कांवड़ यात्रा की परंपरा भगवान परशुराम द्वारा शुरू की गई थी, जिन्होंने गंगाजल लाकर भगवान शिव का अभिषेक किया था। तभी से यह यात्रा एक धार्मिक परंपरा बन गई है।

कांवड़ यात्रा भगवान शिव को समर्पित होती है, जिसमें भक्त गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। ऐसा माना जाता है कि सावन मास में शिवजी की पूजा विशेष रूप से फलदायी होती है। इस पावन महीने में की गई कांवड़ यात्रा अश्वमेघ यज्ञ के समान फल देती है।

कांवड़ यात्रा कैसे होती है?

सावन आरंभ होते ही भक्त हरिद्वार, ऋषिकेश, गंगोत्री, गौमुख, वाराणसी, गढ़मुक्तेश्वर आदि तीर्थ स्थलों पर पहुंचते हैं और वहां से पवित्र गंगाजल भरते हैं। यह जल बांस की लकड़ी पर दो कलशों में रखकर एक संतुलित कांवड़ में टांगा जाता है। फिर नंगे पैर शिवमंदिर तक यात्रा की जाती है। रास्ते भर श्रद्धालु "बोल बम" के जयकारे लगाते हैं, भजन-कीर्तन करते हैं और भक्तिभाव में डूबे रहते हैं।

क्या महिलाएं कांवड़ यात्रा कर सकती हैं?

कुछ सामाजिक मान्यताओं के बावजूद शास्त्रों में महिलाओं के कांवड़ यात्रा पर कोई प्रतिबंध नहीं है। भगवान शिव को अर्धनारीश्वर कहा जाता है, अर्थात वे स्त्री और पुरुष दोनों का समन्वय हैं। इसलिए महिलाएं भी पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ कांवड़ यात्रा कर सकती हैं

कांवड़ यात्रा के नियम (Kawad Yatra Niyam)

कांवड़ यात्रा को सफल और फलदायी बनाने के लिए शास्त्रों में कई नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करना अत्यंत आवश्यक है:

- मन, वचन और कर्म से शुद्ध रहना चाहिए।
- शराब, मांस, पान, गुटखा, सिगरेट और तंबाकू जैसे पदार्थों का सेवन पूरी तरह वर्जित है।
- कांवड़िए नंगे पैर यात्रा करते हैं और हर समय शिव का नाम, मंत्र जाप व भजन-कीर्तन करते हैं।
- कांवड़ को कभी भी ज़मीन पर नहीं रखा जाता। अगर कांवड़ को नीचे रखा गया, तो यात्रा अधूरी मानी जाती है और नए सिरे से जल भरना पड़ता है।
- शौच आदि के बाद स्नान करना अनिवार्य है, तभी कांवड़ को फिर से उठाया जा सकता है। - बिना स्नान के कांवड़ को छूना अशुभ माना जाता है।
- यात्रा के दौरान अनुशासन, संयम और एकाग्रता बनाए रखना जरूरी है।
- गंगाजल को सिर के ऊपर या कंधे पर ससम्मान ले जाना चाहिए।
- मासिक धर्म के दौरान कांवड़ यात्रा का हिस्सा ना बनें।
- कांवड़ यात्रा में जाने के लिए शारीरिक रूप से सक्षम जरूर होना चाहिए।

कांवड़ यात्रा का आध्यात्मिक महत्व

शिवपुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि जो व्यक्ति सावन में कांवड़ यात्रा करता है और शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित करता है, उसे कई जन्मों के पुण्य प्राप्त होते हैं। उसके सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही, परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है।

ऐसा भी माना जाता है कि कांवड़ यात्रा करने से व्यक्ति जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है और शिवधाम को प्राप्त करता है। इस यात्रा से व्यक्ति के जीवन में संतुलन, सहनशीलता और संयम का विकास होता है।

Story first published: Friday, July 4, 2025, 8:00 [IST]
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