Latest Updates
-
Women's Day Special: 30 की उम्र के बाद महिलाएं फॉलो करें ये हेल्थ टिप्स, कई बीमारियों से होगा बचाव -
Rang Panchami 2026: रंग पंचमी पर कर लिए ये अचूक उपाय तो चमक जाएगी किस्मत, वैवाहिक जीवन रहेगा खुशहाल -
8 मार्च को ही क्यों मनाया जाता है अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस? जानें इस दिन का इतिहास और इस साल की थीम -
Rang Panchami 2026: कब है रंग पंचमी? जानें तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व -
पेट के कैंसर के शुरुआती स्टेज में दिखाई देते हैं ये 5 लक्षण, ज्यादातर लोग साधारण समझकर करते हैं इग्नोर -
Bhalchandra Sankashti Chaturthi Katha: भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी पर जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, दूर होगी हर परेशानी -
Bhalchandra Sankashti Chaturthi 2026: 6 या 7 मार्च, कब है भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी? जानें शुभ मुहूर्त, महत्व औ -
वरमाला डालते ही अर्जुन ने सानिया चंडोक को लगाया गले, सचिन तेंदुलकर का ऐसा था रिएक्शन, वीडियो वायरल -
बिग बॉस 17 फेम यूट्यूबर अनुराग डोभाल ने की सुसाइड की कोशिश, इंटरकास्ट शादी को लेकर परिवार पर लगाए गंभीर आरोप -
प्रेग्नेंसी में कटहल खाना चाहिए या नहीं? डाइट में शामिल करने से पहले जान लें इसके फायदे-नुकसान
Last Mangala Gauri 2023: सावन का आखिरी मंगला गौरी व्रत कल, जानें महत्व और व्रत की विधि
Sawan Last Mangala Gauri Vrat: मंगलवार के दिन मंगला गौरी का पूजन करते हैं। श्रावण महीने में पड़ने के कारण यह और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि मंगला गौरी माता पार्वती का ही रूप हैं और पार्वती शिव को प्रिय हैं साथ ही सावन भी शिव को बहुत प्रिय है।
मंगला गौरी प्रसन्न हुईं तो फिर अखंड सौभाग्य का वरदान देती हैं। सुहागिनों के लिए इस व्रत का बहुत ज्यादा महत्व तो हैं ही साथ ही कुंवारी लड़कियों के लिए भी यह व्रत वरदान से कम नहीं क्योंकि व्रत करने से उन्हें सुयोग्य वर की प्राप्ति होती है।

इन सबके अलावा इस बार के व्रत के दिन बहुत शुभ योग बन रहे हैं। आइये आपको बताते हैं कि सावन के आखिरी मंगला गौरी व्रत का शुभ योग क्या है और इस दिन व्रत करने की सही विधि क्या है।
अगर किसी लड़की के वैवाहिक कुंडली में या विवाहित महिला के दांपत्य जीवन में कुछ समस्या है तो मंगला गौरी का व्रत करने से सब शुभ होने लगता है, ऐसी मान्यता है। इस साल यानी 2023 का नौवा और अंतिम मंगला गौरी व्रत है 29 अगस्त 2023 दिन मंगलवार को।
मंगला गौरी व्रत की पूजा विधि
ब्रह्ममुहूर्त में उठने की कोशिश करें, अगर संभव ना हो तो कम से कम सूर्योदय के समय जरुर उठ जाएं। नित्यक्रिया से निवृत होकर ऐसे वस्त्र पहनें जिसमें आप सुन्दर दिखें। इसके लिए नारंगी, गुलाबी या पीले रंग के वस्त्र धारण किये जा सकते हैं।
इसके बाद पूरे घर में गंगाजल छिडकं। फिर अपने पूजा स्थान को अच्छे से साफ़ सुथरा करके वहां भी गंगाजल छिड़कें और लाल वस्त्र बिछाएं। इस पर माता पार्वती और शिव की प्रतिमा या फोटो लगायें। गणपति का स्मरण करने के बाद धुप, चन्दन, पुष्प, अक्षत और नैवेद्य से माता की पूजा करें।
इसके बाद सुहाग के सामान को माता को अर्पित करें। फिर पूरी श्रद्धा के साथ मंगला गौरी व्रत कथा सुनें। इसके बाद आरती करें। अगले दिन फिर से माता की पूजा के बाद व्रत का पारण करें और अर्पित किये गए सुहाग के सामान को किसी गरीब विवाहित महिला को दान दे दें। ब्राह्मण को भोजन कराएं और आशीर्वाद प्राप्त करें।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications











