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Sawan Shivratri 2023: 15 या 16 जुलाई, जानें सावन शिवरात्रि की सही तारीख, नोट कर लें जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त
Sawan Shivratri 2023 Jal Kab Chadega: श्रावण मास भगवान शिव को बेहद प्रिय है। वैसे तो हर माह शिवरात्रि पड़ती है जिसे मासिक शिवरात्रि कहा जाता है। मगर श्रावण मास की शिवरात्रि की विशेष महत्ता बताई गयी है।
सावन माह की शिवरात्रि के दिन पूरे देशभर के शिवालयों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। सावन शिवरात्रि के शुभ दिन पर शिवजी का जलाभिषेक करना अत्यंत फलदायी माना गया है।

सावन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन मासिक शिवरात्रि मनाई जाएगी। इस साल सावन शिवरात्रि की तिथि को लेकर लोगों में दुविधा बनी हुई है। आइये जानते हैं कि किस दिन मासिक शिवरात्रि है और जल चढ़ाने का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा।
सावन शिवरात्रि क्यों है खास
सावन माह के शुभारंभ के साथ ही भक्त कांवड़ यात्रा पर निकल जाते हैं। दुर्गम रास्तों से होते हुए लंबी दूरी की यात्रा तय करके गंगा का पवित्र जल कांवड़ में भरते हैं और शिवरात्रि के शुभ दिन पर शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। जल चढ़ाने के लिहाज से सावन शिवरात्रि का दिन बहुत ही पावन माना जाता है।
सावन शिवरात्रि के मौके पर भोलेबाबा और माता पार्वती की पूजा-अर्चना की जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाने से जीवन के सभी कष्टों से मुक्ति मिल जाती है। सावन शिवरात्रि की महत्ता का जिक्र शिवपुराण में भी मिलता है।
सावन शिवरात्रि 2023 कब है?
इस साल श्रावण माह की शिवरात्रि 15 जुलाई, शनिवार को पड़ रही है।
चतुर्दशी तिथि का प्रारम्भ: 15 जुलाई 2023 को रात 8 बजकर 32 मिनट पर
चतुर्दशी तिथि का समापन: 16 जुलाई 2023 को रात 10 बजकर 08 मिनट पर
निशिता काल पूजा समय - 12:07 ए एम से 12:48 ए एम, जुलाई 16
शिवरात्रि व्रत के पारण का समय 16 जुलाई को सुबह 05 बजकर 33 मिनट से शाम 3 बजकर 54 मिनट तक।

शिवरात्रि चार प्रहर पूजा का समय
रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय - 07:21 पी एम से 09:54 पी एम, जुलाई 15
रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय - 09:54 पी एम से 12:27 ए एम, जुलाई 16
रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय - 12:27 ए एम से 03:00 ए एम, जुलाई 16
रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय - 03:00 ए एम से 05:33 ए एम, जुलाई 16
क्यों चढ़ाया जाता है भगवान शिवजी को जल?
भगवान शिव को जल चढ़ाने का संबंध समुद्र मंथन से है। ऐसा माना जाता है समुद्र मंथन से जब विष निकला था तब सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान शिव ने उसका पान किया। विषपान के कारण भगवान शिव असहज हो गए और उनपर इसके असर को कम करने के उद्देश्य से सभी देवी-देवताओं ने उनपर जल अर्पित किया। जल पड़ने से विष का ताप कम हुआ और शिवजी सामान्य हुए। यही वजह है कि श्रावण मास में भक्त शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं। ऐसा करने से महादेव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन की कठिनाईयों से मुक्ति मिलती है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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